Ram Mandir news:'सुल्तान अंसारी कोई हिंदू नहीं है...' ट्रस्ट पर लगे आरोपों के बारे में सबकुछ जानिए

लखनऊ, 14 जून: अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण में जुटे श्री राम मंदिर जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी ने बहुत बड़े जमीन घोटाले का आरोप लगाया है। आरोपों के मुताबिक ट्रस्ट ने सिर्फ 2 करोड़ की जमीन मिनटों में 18.5 करोड़ रुपये देकर खरीद ली। इस आधार पर ये दल सीबीआई और ईडी से इसकी जांच की मांग कर रहे हैं। वहीं श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इन आरोपों को नकार दिया है तो बीजेपी की दलील है कि विपक्ष को अब यह नहीं दिख रहा है कि जिस शख्स से बहुत ज्यादा कीमत देकर जमीन खरीदने के आरोप लगाए जा रहे हैं, वह हिंदू नहीं मुसलमान है। यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव मॉर्य भी विपक्ष के आरोपों को सिरे से नकार चुके हैं। आइए जानते हैं कि यह पूरा विवाद है क्या ? और इसको लेकर कौन क्या दावे कर रहा है ?

जमीन बेचने वाला कोई हिंदू नहीं है-भाजपा

जमीन बेचने वाला कोई हिंदू नहीं है-भाजपा

अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट पर मंदिर निर्माण के लिए जमीन खरीदने में घोटालों के आरोपों का जवाब देने के लिए भाजपा ने भी मोर्चा संभाल लिया है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता और वकील गौरव गोयल की सबसे बड़ी दलील ये है कि मंदिर ट्रस्ट पर जिस शख्स से बहुत ही ज्यादा कीमत पर जमीन खरीदने के आरोप लगाए जा रहे हैं, वह कोई हिंदू नहीं है। इसलिए विपक्ष ये आरोप साजिश के तहत भ्रम फैलाने के इरादे से लगा रहा है। गौरव गोयल ने कहा है, '18 मार्च, 2021 को सुल्तान अंसारी से आज के मार्केट प्राइस पर राम मंदिर ट्रस्ट लगभग 18 साढ़े 18 करोड़ रुपये की एक नंबर की पूरी पेमेंट व्हाइट में देकर ये जगह खरीदता है। अब ये सुल्तान अंसारी कोई हिंदू नहीं है.......'उन्होंने तथ्यों का हवाला देकर दावा किया है कि 19 सितंबर, 2019 को कुसुम पाठक नाम की महिला ने अपनी वो जगह सुल्तान अंसारी को दो करोड़ रुपये में बेची थी। इसके लगभग दो महीने बाद सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद वहां की जमीनों के भाव आसमान छूने लगे। क्योंकि, वहां हजारों करोड़ के निवेश होने हैं, भव्य मंदिर बनना है। यूपी सरकार को भी भव्य मंदिर के लिए वहां पर जमीन जमीन का अधिग्रहण करना था। राम मंदिर के एक्सटेंशन के लिए यह जगह बहुत जरूरी है, क्योंकि यह प्राइम लोकेशन पर है। उनके मुताबिक इसलिए उसकी कीमत बढ़ना स्वाभाविक है।

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    विपक्ष ने सीबीआई-ईडी से जांच कराने की मांग की

    विपक्ष ने सीबीआई-ईडी से जांच कराने की मांग की

    दरअसल, यह सारा विवाद सपा और आम आदमी पार्टी को ओर से राम मंदिर ट्रस्ट पर दान में मिली रकम के घोटाले के आरोपों की वजह से शुरू हुआ है। दोनों ही दलों ने आरोप लगाए हैं कि राम मंदिर ट्रस्ट ने खरीदी गई जमीन के दाम बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए हैं। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और सपा नेता और पूर्व मंत्री पवन पांडे ने 2 करोड़ की जमीन 18.5 करोड़ रुपये में खरीदने के मामले की जांच सीबीआई और ईडी से कराने की मांग की है। एक प्रेस कांफ्रेंस में पांडे ने सवाल किया कि 'सिर्फ 5 मिनट के अंदर 2 करोड़ की जमीन के एक टुकड़े की कीमत 18.5 करोड़ रुपये कैसे हो गई?' वहीं, संजय सिंह ने आरोप लगाया कि, 'ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने अनिल मिश्रा नाम के सदस्य की मदद से जमीन खरीदी। यह एक मनी लॉन्ड्रिंग का मामला है और सरकार को इसकी जांच सीबीआई और ईडी से करवानी चाहिए।' सपा नेता का ये भी दावा है कि सेल डीड से पता चलता है कि जमीन बाबा हरिदास ने सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी को बेची और फिर राम जन्मभूमि ट्रस्ट ने उनसे जमीन खरीदी।

    हम 100 वर्षों से आरोपों का सामना कर रहे हैं- चंपत राय

    हम 100 वर्षों से आरोपों का सामना कर रहे हैं- चंपत राय

    राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, सपा-आम आदमी पार्टी नेताओं की ओर से लगाए गए सभी आरोपों को पहले ही खारिज कर चुके हैं। विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ नेता की दलील है कि 'हम 100 वर्षों से ऐसे आरोपों का सामना कर रहे हैं। हम पर महात्मा गांधी की हत्या के आरोप लगाए गए थे। हम आरोपों से नहीं डरते। हमपर लगाए गए आरोपों का मैं अध्ययन करूंगा और उनकी जांच करूंगा।' वहीं अयोध्या के मेयर ऋषिकेश उपाध्याय को भी इन आरोपों में राजनीतिक साजिश की बू आ रही है। उनका कहना है, 'मैं कई डील में गवाह बन चुका हूं। यह डील वर्षों पहले हुई थी। ट्रस्ट इसके बारे सब कुछ बताएगा। जिन लोगों ने सवाल उठाया है, उन्हें भगवान राम से दिक्कत है। मार्केट रेट क्या है, कोई भी देख सकता है।' विपक्ष ने आरोपों में इनपर भी आरोप लगाए हैं।

    यूपी सरकार ने क्या कहा है ?

    यूपी सरकार ने क्या कहा है ?

    अगले साल यूपी विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए कांग्रेस पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी इस मामले में कूदने में देरी नहीं की है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा है, ''करोड़ों लोगों ने आस्था और भक्ति के नाम पर भगवान के चरणों में चढ़ावा चढ़ाया है। उस चंदे का दुरुपयोग अधर्म है, पाप है और उनकी आस्था का अपमान है।'' लेकिन, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य ने विपक्ष के आरोपों पर जोरदार पलटवार किया है। उन्होंने कहा है, 'जिन लोगों के हाथ राम भक्तों के रक्त से रंगे हुए हैं, वो हमें सलाह न दें।'

    राम मंदिर निर्माण की स्थिति क्या है ?

    राम मंदिर निर्माण की स्थिति क्या है ?

    आसार हैं कि इस साल अक्टूबर तक भगवान राम के मंदिर का फाउंडेशन तैयार हो जाएगा। इस भव्य राम मंदिर के निर्माण की शुरुआती लागत 1,100 करोड़ रुपये अनुमानित है। लेकिन, इस साल की शुरुआत में जो राम मंदिर ट्रस्ट की ओर चंदा जुटाया गया, उसने सभी अनुमानों को धाराशायी कर दिया और करीब 2,100 करोड़ रुपये जमा हो गए। पिछले साल 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मंदिर की आधारशिला रखी थी। बता दें कि 9 नवंबर, 2019 को सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय खंडपीठ ने ऐतिहासिक फैसले में सैकड़ों साल पुराने बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद का निपटारा करते हुए अयोध्या की वह जमीन राम मंदिर को दी थी। जबकि, अदालत के आदेश पर ही बाबरी मस्जिद के बदले में यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या के ही नजदीक धन्नीपुर गांव में पांच एकड़ जमीन आवंटित की गई है।

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