Ram Mandir चढ़ावा घोटाले में अब नया खुलासा! वाराणसी की सिक्योरिटी एजेंसी के 6 कर्मचारी SIT जांच के घेरे में

Ram Mandir Donation Scam: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे में गड़बड़ी के मामले में जांच लगातार आगे बढ़ रही है। अब इस मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में पता चला है कि अब तक गिरफ्तार किए गए 8 आरोपियों में से 6 लोग वाराणसी की एक निजी सिक्योरिटी एजेंसी 'सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज' (Sainik Security Services) के कर्मचारी थे।

यही एजेंसी मंदिर में दान पेटियों से निकली नकदी की गिनती के लिए स्टाफ उपलब्ध कराती थी। इस मामले की SIT जांच कर रही है और अब तक कई अहम तथ्य सामने आ चुके हैं।

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Ram Mandir Donation Scam में वाराणसी की सिक्योरिटी एजेंसी से जुड़े थे आरोपी

मिली जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए 8 लोगों में से 6 कर्मचारी वाराणसी स्थित सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज के पेरोल पर थे। यह एजेंसी दिसंबर 2017 में प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के रूप में पंजीकृत हुई थी और इसका मुख्य कार्यालय वाराणसी में है। कंपनी की वेबसाइट के अनुसार, यह एजेंसी देश के 15 राज्यों में सेवाएं देती है और कई सरकारी कंपनियां भी इसकी ग्राहक हैं।

SBI ने एजेंसी को दिया था काम

सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज के मालिक और निदेशक गौरव सिंह ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि उनकी कंपनी को यह काम स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की अयोध्या के नया घाट शाखा के माध्यम से मिला था। उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का बैंक खाता SBI की इसी शाखा में था और नकदी की गिनती के लिए बैंक ने उनकी कंपनी से कर्मचारियों की मांग की थी।

गौरव सिंह के मुताबिक, स्थानीय SBI शाखा ने 19 लोगों के नाम सुझाए, जिन्हें उनकी कंपनी ने अपने यहां नियुक्त किया और फिर बैंक को उपलब्ध कराया। उन्होंने कहा, मंदिर हमारा ग्राहक नहीं था। हमारा अनुबंध SBI के साथ था। बैंक ने जिन लोगों की मांग की, हमने उन्हें अपनी कंपनी में नियुक्त कर बैंक को उपलब्ध कराया।"

करोड़ों की चोरी: 79.85 लाख रुपये कैश बरामद

एसआईटी (SIT) की जांच के अनुसार, मंदिर में आने वाले चढ़ावे को बैंक खाते में जमा करने से पहले ही, नोटों की गिनती के दौरान बहुत ही शातिर तरीके से गायब कर दिया जाता था। पुलिस ने अब तक गिरफ्तार आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी करके ₹79.85 लाख की नकदी (कैश) बरामद कर ली है।

विवाद बढ़ने पर अयोध्या के बार एसोसिएशन ने भी कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने प्रस्ताव पास किया है कि यदि कोई भी वकील इस घोटाले के आरोपियों का केस कोर्ट में लड़ेगा, तो उस पर ₹5 लाख का जुर्माना लगाया जाएगा।

SBI का क्या कहना है?

SBI ने बयान जारी कर कहा है कि वह जांच में पूरी तरह सहयोग कर रहा है। बैंक के अनुसार, वह जनवरी 2024 में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को बैंकिंग सेवाएं दे रहा है। HT की रिपोर्ट के मुताबिक- सामान्य तौर पर इस तरह की नियुक्तियां कॉरपोरेट स्तर पर होती हैं, लेकिन इस मामले में स्थानीय शाखा की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

कौन-कौन हैं गिरफ्तार आरोपी?

पुलिस अब तक इस मामले में 8 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें शामिल हैं-

  • अनुकल्प मिश्रा
  • लवकुश मिश्रा
  • राम शंकर यादव 'टिन्नू'
  • मनीष यादव
  • सुभाष श्रीवास्तव
  • अविनाश शुक्ला
  • रामाशंकर मिश्रा
  • करुणेश पांडेय

जांच में यह भी सामने आया है कि अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा आपस में रिश्तेदार हैं। दोनों का संबंध ट्रस्ट के पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा से भी बताया जा रहा है। वहीं राम शंकर यादव, ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के करीबी सहयोगी बताए जाते हैं और उनका संबंध मनीष यादव से भी है।

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ट्रस्ट के दो बड़े पदाधिकारियों ने दिया इस्तीफा

इस मामले के सामने आने के बाद पिछले सप्ताह श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, उनके इस्तीफे और जांच के बीच किसी आधिकारिक संबंध की पुष्टि नहीं की गई है।

कैसे सामने आया यह पूरा घोटाला?

7 जून 2026: समाजवादी पार्टी (SP) के नेता तेज नारायण 'पवन' पांडेय ने सबसे पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि रामलला के चढ़ावे से करीब ₹5 करोड़ से ₹7.5 करोड़ रुपये गायब किए गए हैं।

13 जून 2026: विवाद बढ़ने पर उत्तर प्रदेश सरकार ने लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत और आईजी किरण एस. की अगुवाई में एक हाई-लेवल SIT का गठन किया।

26 जून 2026: शुरुआती जांच में गड़बड़ी सही पाए जाने के बाद पुलिस ने धोखाधड़ी, चोरी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर इन 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

फिलहाल, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और सिक्योरिटी एजेंसी दोनों ही जांच में सहयोग कर रही हैं, और एसआईटी यह पता लगाने में जुटी है कि इस सिंडिकेट ने कुल कितने करोड़ रुपये की चपत राम मंदिर के खजाने को लगाई है।

जांच में क्या सामने आया?

SIT ने 15 से 20 जून के बीच अयोध्या में प्रारंभिक जांच की। प्रारंभिक जांच में SIT को दान पेटियों से निकली नकदी और अन्य चढ़ावे के प्रबंधन में पहली नजर में अनियमितताएं मिलीं। जांच एजेंसियों के अनुसार, ऐसा प्रतीत होता है कि दान पेटियों से निकाली गई नकदी का एक हिस्सा बैंक में जमा होने से पहले ही अलग कर लिया जाता था। इसी आधार पर 26 जून को नकदी गिनने और संभालने से जुड़े 8 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया।

किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इनमें शामिल हैं

  • आपराधिक विश्वासघात (Criminal Breach of Trust)
  • धोखाधड़ी (Cheating)
  • चोरी (Theft)
  • आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy)
  • इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(a) के तहत भी कार्रवाई की जा रही है।

SIT इस पूरे मामले की जांच कर रही है। अभी तक जो जानकारी सामने आई है, वह प्रारंभिक जांच और पुलिस के दस्तावेजों पर आधारित है। अंतिम निष्कर्ष अदालत में पेश होने वाली जांच रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होंगे। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि इस कथित गड़बड़ी में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।

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