Ram Mandir Donation मामले में सुप्रीम कोर्ट का तुरंत सुनवाई से इनकार, कहा- पहले बताइए इतनी जल्दबाजी क्यों?

Ayodhya Ram Mandir Donation Case: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में कथित गड़बड़ी के आरोपों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 29 जून को अहम टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने मामले की जल्द सुनवाई की मांग करने वाले याचिकाकर्ता को सलाह दी है कि वह कोर्ट की रजिस्ट्री में एक पत्र देकर बताए कि इस मामले की तत्काल सुनवाई क्यों जरूरी है। इसके बाद कोर्ट जल्द सुनवाई की मांग पर विचार कर सकता है।

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यह मामला राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान और चढ़ावे के कथित दुरुपयोग या गबन के आरोपों से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की है।

Ram Mandir Donation Case Supreme Court: याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि कोर्ट की रजिस्ट्री से उन्हें जानकारी मिली है कि मामला अदालत की छुट्टियों के बाद ही सूचीबद्ध हो सकता है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि अगर सुनवाई में काफी देरी हो गई तो मामले से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और डिजिटल सबूतों के साथ छेड़छाड़ की आशंका है। उनका कहना था कि ऐसे मामलों में समय बहुत महत्वपूर्ण होता है और देरी होने पर महत्वपूर्ण सबूत प्रभावित हो सकते हैं। इसी वजह से उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से जल्द सुनवाई कराने का अनुरोध किया।

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सुप्रीम कोर्ट ने क्या जवाब दिया?

याचिकाकर्ता की दलील सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि मामला वास्तव में इतना जरूरी है तो उसकी तात्कालिकता को लिखित रूप में अदालत की रजिस्ट्री के सामने रखा जाए। कोर्ट ने सलाह दी कि याचिकाकर्ता एक पत्र देकर बताए कि मामले की तत्काल सुनवाई क्यों जरूरी है। इसके बाद अदालत इस अनुरोध पर विचार करेगी और तय करेगी कि मामले को प्राथमिकता के आधार पर सुना जाए या नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मामले की जांच या आरोपों के संबंध में कोई टिप्पणी नहीं की है। अदालत ने सिर्फ जल्द सुनवाई की प्रक्रिया को लेकर मार्गदर्शन दिया है।

राम मंदिर चंदा चोरी का क्या है पूरा विवाद?

हाल के दिनों में अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे और दान को लेकर विवाद खड़ा हुआ है। कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई धनराशि और कीमती वस्तुओं के प्रबंधन में अनियमितताएं हुई हैं। इन्हीं आरोपों के आधार पर अदालत में याचिका दायर कर CBI जांच की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके।

हालांकि, राम मंदिर ट्रस्ट पहले ही इन आरोपों को खारिज कर चुका है। ट्रस्ट का कहना है कि मंदिर में आने वाले सभी दान और मूल्यवान वस्तुओं का पूरा रिकॉर्ड रखा जाता है और सब कुछ नियमों के अनुसार संचालित किया जाता है।

इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?

याचिकाकर्ता का कहना है कि आजकल ज्यादातर रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रखे जाते हैं। ऐसे में अगर जांच में देरी हुई तो इलेक्ट्रॉनिक डेटा के साथ छेड़छाड़ या बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

यही वजह है कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से मामले की जल्द सुनवाई की मांग की है। उनका मानना है कि समय रहते जांच शुरू होने से सभी सबूत सुरक्षित रहेंगे और निष्पक्ष जांच संभव हो सकेगी।

अब गेंद याचिकाकर्ता के पाले में है। यदि वह सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में मामले की तात्कालिकता बताते हुए पत्र जमा करता है, तो अदालत जल्द सुनवाई की मांग पर विचार कर सकती है। फिलहाल SC ने न तो CBI जांच का आदेश दिया है और न ही आरोपों की सच्चाई पर कोई राय दी है। अदालत का अगला कदम इस बात पर निर्भर करेगा कि याचिकाकर्ता जल्द सुनवाई की मांग को किस तरह उचित ठहराता है।

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