वायुसेना के बड़े प्लान का हिस्सा है पूर्वांचल एक्सप्रेसवे की कूड़ेभार एयरस्ट्रिप, रेंज में होगा चीन
सुलतानपुर, 16 नवम्बर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर पहुंचकर एक कार्यक्रम में पूर्वांचल एक्सप्रेस का लोकार्पण किया। सुलतानपुर जिले के कूड़ेभार के पास आयोजित इस कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहे भारतीय वायुसेना के सुखोई, मिराज और जगुआर जैसे विमान रहे जिन्होंने हाईवे पर टच डाउन कर लोगों को रोमांचित किया।

वायु सेना के बड़े प्लान का हिस्सा है ये हवाई पट्टी
पूर्वांचल एक्सप्रेस पर कूरेभार में 3.3 किलोमीटर लंबे रनवे को लड़ाकू विमानों के लिए खासतौर पर डिजाइन किया है। चीन की बढ़ती आक्रमता के बीच यह हवाई पट्टी भविष्य में वायु सेना के बड़े प्लान का हिस्सा है।
पिछले कुछ समय से चीन ने भारत से लगती 3488 किमी लंबी सीमा पर अपनी सक्रियता बढ़ाई है। चीन एलएसी से सटे अपने क्षेत्रों में नए हवाई अड्डों का निर्माण करने के साथ ही पहले से मौजूद हवाई अड्डों को अपग्रेड कर रहा है।

चीन को ध्यान में रखकर तैयारी
भारतीय वायुसेना की पिछले कुछ समय से ऐसे विशेष हाईवे की योजना पर काम कर रहा है जो लड़ाकू विमानों और परिवहन विमानों को उतारे जाने की क्षमता रखते हों। पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर बनी कूरेभार एयरस्ट्रिप वायुसेना की इसी योजना का हिस्सा है। दरअसल 1965 और 1971 की लड़ाई में भारतीय एयरबेस पर पाकिस्तानी एयरफोर्स की बमबारी में भारतीय एयर फोर्स को कई जहाज गंवाने पड़े थे। उस पुराने अनुभव से सबक लेते हुए अब वायु सेना ने तय किया है कि अब युद्ध या आपात स्थिति में इन हवाई पट्टी को विमानों की उड़ान और लैंडिंग के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

कैसे होगा इस्तेमाल ?
हालांकि भारतीय वायुसेना ने अभी तक अपनी योजना के बारे में भले ही कुछ नहीं बताया है लेकिन तथ्य यह है कि यूपी में दो निर्धारित पट्टियां एयरबेस के करीब हैं ताकि आपात स्थिति में लड़ाकू या परिवहन विमानों की लैंडिंग या ईधन और हथियार की सप्लाई में कोई बाधा न आ सके। कई हवाई अड्डों में एक ही हवाई पट्टी होती है। ऐसे में अगर दुश्मन के हवाई हमले में वो पट्टी बरबाद हो जाए तो इन हाईवे को हवाई पट्टी के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा। कूड़ेभार हवाई पट्टी के पास के गोरखपुर, कानपुर और बरेली एयरबेस हैं जो देश की उत्तरी और पूर्वी सीमा के लिए फ्रंट लाइन बेस हैं। जाहिर है इन हवाई पट्टियों के होने से चीन के साथ मुकाबले में भारतीय वायुसेना को ऑपरेशन में किसी तरह की बाधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।












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