फूलपुर उपचुनाव : प्रियंका गांधी के डर से कोई दल घोषित नहीं कर रहा प्रत्याशी, खुद लड़ सकती हैं चुनाव!

इलाहाबाद। यूपी की हॉट लोकसभा सीट फूलपुर का उपचुनाव 11 मार्च को होना है, लेकिन नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के 3 दिन बाद भी किसी दल ने अपने प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है। इसके पीछे जब हमने सियासी गलियारे में पड़ताल शुरू की तो कई राज खुलते नजर आए, लेकिन सबसे दमदार राज मिला कांग्रेस के जिला मुख्यालय से। दरअसल फूलपुर लोकसभा से प्रियंका गांधी को चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी चल रही है और इसके लिए जिला कांग्रेस कमेटी ने प्रियंका गांधी के नाम का प्रस्ताव भेजा है। सियासी गलियारे में यह ख़बर पूरी तरह से आंधी की तरह बह रही है और कांग्रेसी भी खुद इस बात को स्वीकार कर रहे हैं। यह निश्चित है कि अगर प्रियंका गांधी मैदान में उतरती हैं तो इस सीट पर ना तो योगी और मोदी का जादू चल पाएगा और ना ही सपा या बसपा का कोई कैंडिडेट टिक पाएगा। इसलिए कोई भी दल अपना प्रत्याशी घोषित करने से पहले कांग्रेस पर नजर बनाए हुए हैं। भाजपा भी अपने ऐसे प्रत्याशी के साख को दांव पर नहीं लगाना चाहती जिससे कि हार के बाद कोई गलत संदेश जनता में जाए। फिलहाल प्रियंका गांधी के नाम पर अंतिम फैसला राहुल गांधी को करना है और आधिकारिक घोषणा के बाद ही यह तय हो सकेगा कि प्रियंका गांधी चुनाव लड़ेगी या नहीं।

प्रियंका लड़ी तो जीतेंगी

प्रियंका लड़ी तो जीतेंगी

फूलपुर लोकसभा सीट से 7 बार कांग्रेस ने जीत हासिल की है । इस सीट पर पंडित जवाहरलाल नेहरु ने लगातार तीन चुनाव जीते उसके बाद विजयलक्ष्मी पंडित ने दो बार चुनाव जीता। फिर विश्वनाथ प्रताप सिंह और राम पूजन पटेल ने भी फूलपुर में कांग्रेस का पताका लहराया था। आंकड़े यही कहते हैं कि फूलपुर हमेशा से कांग्रेस का गढ़ रहा है, लेकिन तीन दशक से कांग्रेस को यहां ना तो कोई ऐसा प्रत्याशी मिल सका जो नेहरू जैसा करिश्मा कर सके और ना ही कोई ऐसी शख्सियत नजर आई जिसके नाम पर वोटर खींचा चला आये। ऐसे में अगर प्रियंका गांधी फूलपुर से उप चुनाव लड़ती है तो उनमे यह दोनों गुण हैं कि वह करिश्माई नेतृत्व कर सकें और अपने नाम पर भीड़ भी जुटा सकें। यह निश्चित है कि प्रियंका के लिए उनका बिखरा वोट बैंक एकजुट होगा, उनके लिए एक बार फिर से जातिगत राजनीति की गणित टूट जाएगी और वह जीत हासिल करेंगी। क्योंकि प्रियंका गांधी एक बड़ा नाम है और नेहरु गांधी परिवार की सबसे बड़ी उम्मीदों में से एक है। यह तो तय है कि वह जिस जगह से चुनाव लड़ेंगी उस लोकसभा क्षेत्र का कायाकल्प भी होगा, ऐसे में जनता को भी प्रियंका गांधी से खासी उम्मीदें होंगी, विकास और पुराने जुड़ाव का असर चुनाव में होगा और जनता उनके लिए वोट करेगी।

प्रियंका की हुई कई बार मांग

प्रियंका की हुई कई बार मांग

प्रियंका गांधी को सक्रिय राजनीति में लाने की कवायद तो कई सालों से चल रही है, लेकिन प्रियंका गांधी कई बार प्रचार प्रसार में तो सक्रिय हुई पर चुनाव लड़ने के बावत वह पीछे हट गईं। हालांकि इलाहाबाद में उन्होंने कहा था कि सही समय आने पर वह चुनाव जरूर लड़ेंगी और वह सही वक्त शायद नजदीक है। दरअसल प्रियंका गांधी की शख्सियत और उनका व्यक्तित्व इंदिरा गांधी से हुबहू मिलता है। उनके बोलने का अंदाज और विरोधियों पर हमला करने की जो शैली है वह इंदिरा गांधी सरीखी है। कई बार यह बात उठ चुकी थी प्रियंका गांधी में इंदिरा जी की झलक दिखाई पड़ती है राजनीतिक पंडित यह संभावना हमेशा से व्यक्त करते रहे हैं कि जब प्रियंका गांधी चुनाव मैदान में आएंगी तो एक बड़ी राजनेता बनेगी। फिलहाल प्रियंका अगर मैदान में उतरती हैं तो निश्चित तौर पर यह कांग्रेस के लिए संजीवनी होगी और सियासत यही कहती है कि गांधी नाम का जो जलवा 7 बार इस सीट पर देखने को मिला था वह एक बार फिर से शुरू हो जाएगा।

कांग्रेस का गढ़ था इलाहाबाद

कांग्रेस का गढ़ था इलाहाबाद

एक जमाने में इलाहाबाद कांग्रेस का गढ़ हुआ करता था और आनंद भवन में कांग्रेसियों का जमावड़ा इतिहास के पन्नों पर दर्ज है। यहीं पार्टी का मुख्यालय था और यही से पूरे देश की राजनीति की दिशा तय हुआ करती थी। तब पंडित जवाहरलाल नेहरू इसी फूलपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा करते थे, इसी सीट से जीत कर वह देश के पहले प्रधानमंत्री बने थे। 1952, 1957 व 1962 में लगातार तीन बार जवाहरलाल नेहरू ने इस सीट पर जीत हासिल की थी। जबकि उसके बाद उनकी जगह विजयलक्ष्मी पंडित ने 1964 व 1967 भी जीत दर्ज की थी। कुल मिलाकर फूलपुर के इतिहास में 7 बार ऐसा मौका आया जब कांग्रेस ने जीत हासिल की है और इस रिकॉर्ड के आसपास भी अभी तक कोई दल फटक नहीं सका है। प्रियंका गांधी चुनावी मैदान में आती हैं तो निश्चित तौर पर कांग्रेस एक बार फिर से जोश से भोर उठेगी और यहां मिलने वाली जीत जिसकी सौ प्रतिशत संभावना है डूबते कांग्रेसी जहाज को वापस सतह पर ले आएंगी।

वर्षों बाद किया था प्रवास

वर्षों बाद किया था प्रवास

2 साल पहले राहुल गांधी के साथ प्रियंका गांधी और सोनिया गांधी इलाहाबाद आई थीं। उस वक्त अपने ननिहाल में सभी ने रात भी गुजारी थी। उस समय ही यह संभावना थी कि प्रियंका गांधी अब कांग्रेस के गढ़ को फिर से जीवंत करेंगी। एक दिवसीय कार्य के दौरान कांग्रेस के तमाम बड़े नेता और पुराने कांग्रेसी भी इकट्ठा हुए थे, जिसके बाद माना जा रहा था कि कांग्रेस हाईकमान कोई बड़ा निर्णय लेंगी। लेकिन तब खुद प्रियंका गांधी ने कहा था कि वह जब चुनाव लड़ेंगे तब सब को खुद पता चल जाएगा फिलहाल वह अभी चुनाव नहीं लड़ रही हैं। हालांकि अब जब पार्टी की कमान राहुल गांधी ने संभाली है तब संभावना है कि वह अपनी बहन प्रियंका गांधी को चुनाव मैदान में उतार सकते हैं।

क्यों नहीं लडेंगी चुनाव

क्यों नहीं लडेंगी चुनाव

प्रियंका गांधी को फूलपुर लोकसभा के उपचुनाव में उतारने की तैयारी भले ही चल रही है, लेकिन प्रियंका का यह चुनाव लड़ना थोड़ा मुश्किल है क्योंकि उप चुनाव के बाद सांसद का कार्यकाल सिर्फ 1 साल का होगा। यानी कार्यकाल शुरू होने और खत्म होने में महज चंद महीने होंगे। वैसे भी अभी तक प्रियंका की ओर से चुनाव पर हामी नहीं भरी गई है और राहुल गांधी ने भी ऐसे कोई संकेत उपचुनाव के लिए नहीं दिए हैं। यह पूर्ण संभावना है कि 2019 में जब लोकसभा का चुनाव होगा तब इस सीट पर प्रियंका गांधी चुनाव में आ सकती हैं। क्योंकि उस दरमियान कांग्रेस को सही मायने में जीत की जरूरत होगी और केंद्र में सत्ता परिवर्तन के लिए प्रियंका जैसी शख्सियत की कांग्रेस को आवश्यकता पडेगी। राहुल गांधी ने अभी हाल ही में कांग्रेस की कमान संभाली है, ऐसे में वह पहले पार्टी की हर तरह की स्थिति को समझ लेना चाहते हैं उसके बाद ही ऐसा फैसला करेंगे। अगर प्रियंका के चुनाव में कोई समस्या आती है तब इसे जल्दी बाजी में लिया गया फैसला कहां जाएगा और राहुल गांधी के नेतृत्व पर भी सवाल उठेगा, लेकिन जब यही प्रियंका गांधी लोकसभा चुनाव में उतरेगी तब यह एक परफेक्ट रणनीति का हिस्सा होगा और भाजपा व नरेंद्र मोदी को कड़ी टक्कर देने के लिए प्रियंका गांधी ट्रंप कार्ड साबित होगी।

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