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    PICs: आपातकाल के ज्वलंत 'पद्मश्री' साहित्यकार मनु शर्मा का आज होगा राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार

    By Gaurav Dwivedi
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    वाराणसी। पद्मश्री सम्मान से नवाजे जा चुके काशी की धरोहर कहे जाने वाले प्रख्यात साहित्यकार मनु शर्मा का उनके वाराणसी के पिपलानी कटना निवास पर निधन हो गया। 90 बसंत पार करने वाले मनु शर्मा लंबी बीमारी से ग्रस्त थे और अपना आखरी 90वां जन्मदिन अस्पताल में ही मनाया था। मनु शर्मा को इसी वर्ष सीएम अखिलेश यादव ने पद्मश्री से नवाजा था। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र से शुरू किए स्वच्छता अभियान के दूसरे दौर पर आने पर अपबे नौ रत्नों में उन्हें शामिल किया था। वरिष्ठ पत्रकार हेंमत शर्मा के पिता मनु शर्मा का ये नाम तो विश्व विख्यात था लेकिन असल में उनका नाम हनुमान प्रसाद शर्मा था। वैसे तो मनु शर्मा ने अपने जीवनकाल में कई पुस्तकें लिखीं लेकिन उनकी लिखी 'लौट आए गांधी' और 3000 पेजों की 8 खंड की 'कृष्ण की आत्मकथा' बेहतरीन कृतियां रही हैं। OneIndia से बात करते हुए परिवार के तुषार शर्मा ने बताया कि मनु शर्मा की तबियत अचानक से खराब हुई और अस्पताल ले जाते समय उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। उनके निधन की सूचना के बाद काशी के शिक्षाविदों, राजनेताओं अधिकारियों का तांता उनके निवास पर लग गया। वहीं शाम को श्रद्धांजलि देने पहुंचे बनारस के डीएम योगेश्वर राम ने घोषणा की कि गुरुवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार काशी के मणिकर्णिका घाट पर किया जाएगा।

    Padma shri literary veteran Manu Sharma funeral today in Varanasi
    Padma shri literary veteran Manu Sharma funeral today in Varanasi

    लाइब्रेरियन से साहित्यकार का तय किया सफर

    मनु शर्मा का जन्म 1928 को यूपी के फैजाबाद जिले में हुआ था। गरीबी और आभाव का जीवन यापन करने वाले स्व. शर्मा ने अपने जीवन की पहली सीढ़ी बनारस के डीएवी कॉलेज में लाइब्रेरियन से शुरू की जहां उनकी मुलाकात कृष्णदेव प्रसाद गौड़ उर्फ बेढब बनारसी जी से हुई। गुरु के रूप में उन्हें पाने के बाद मनु शर्मा का जीवन ही बदल गया, उन्होंने उसी कॉलेज में उन्हें हिंदी के टीचर के पद पर नौकरी दिलाई।

    Padma shri literary veteran Manu Sharma funeral today in Varanasi

    दरअसल कृष्णदेव जी ने उनके अंदर एक गजब की ऊर्जा देखी लाइब्रेरी में पुस्तकों को संवारते हुए वहीं उन्होंने पौराणिक उपन्यासों का आधुनिक संदर्भ दिया। यहीं लेखन की ऊर्जा कृष्णदेव को प्रभावित कर गई। यही नहीं जनवार्ता के काशी से प्रकाशित होने समय में उनके लेख प्रतिदिन प्रकाशित होते थे और ये इतने प्रभावशाली होते थे कि आपातकाल में उनके लेखों पर बैन लगा दिया गया था।

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    Padma shri literary veteran Manu Sharma funeral today in Varanasi
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