पहले OBC विवाद, अब "दलित उत्पीड़न" पर रार: BJP के 'दलित कनेक्ट' अभियान को डैमेज कर पाएगा विपक्ष ?

लखनऊ, 21 जुलाई: उत्तर प्रदेश में जलशक्ति राज्यमंत्री दिनेश खटीक के इस्तीफे ने यूपी की सियासत में हलचल मचा दी है। खटीक ने गृहमंत्री अमित शाह को जो पत्र लिखा था उसमें उन्होंने कहा था कि दलित होने के नाते अधिकारी उनकी सुन नहीं रहे हैं। इसलिए मैं अपने पद से इस्तीफा दे रहा हूं। दरअसल तीन महीने पहले जब यूपी में विधानसभा चुनाव हुए थे तब बीजेपी ने दावा किया था कि दलितों का कुछ फीसदी वोट उन्हें मिला है। इसी लिहाज से बीजेपी ने दलितों से कनेक्ट होने के लिए कई कार्यक्रमों का ऐलान भी किया। लेकिन अब दलित मंत्री के इस्तीफे के बाद विपक्ष को सरकार पर हमला करने का अच्छा मौका मिल रहा है। विपक्ष अब खटीक के इस्तीफे को "दलित उत्पीड़न" बताकर योगी सरकार को घेरने की कवायद में जुट गई है।

योगी आदित्यनाथ

दलितों में पैठ बनाने जुटी बीजेपी को खटीक ने दिया झटका

दरअसल दलितों में पैठ बनाने के लिए बीजेपी ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है। खासतौर से मायावती की दलित वोटों पर ढीली पड़ती पकड़ को देखते हुए अब बीजेपी ने ऐसे चेहरों को आगे लाना शुरू कर दिया है जो किसी न किसी बहाने से फायदेमंद हों। बेबीरानी मौर्य से लेकर असीम अरुण तक बीजेपी की पौध उसी रणनीति का हिस्सा है जिसपर बीजेपी अपना दूर का फायदा देख रही है। बीजेपी को लग रहा है कि इन चेहरों पर दांव लगाकर कुछ पर्सेंट दलितों को अपने फेवर में किया जा सकता है। विधानसभा चुनाव में भी इसका असर दिखा और सरकार बनने पर बेबीरानी मौर्य और असीम अरूण जैसे दलित चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था।

खटीक का इस्तीफा बीजेपी के लिए चिंता का सबब

विपक्ष खटीक के इस्तीफे के बाद से ही जिस तरह से हमलावर है उसको देखते हुए बीजेपी की चिंता बढ़ गई है। बीजेपी को इस बात का डर सता रहा है कि कहीं संगठन के भीतर जातीय असंतोष की स्थिति न पैदा हो जाए। चुनाव के दौरान ही कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य और दारा सिंह चौहान ने योगी सरकार पर ओबीसी विरोधी होने काआरोप लगाकर मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उस इस्तीफे के बाद काफी हंगामा मचा था। स्वामी प्रसाद मौर्य और दारा सिंह चौहान ने भी अपने इस्तीफों में कहा था कि योगी सरकार में ओबीसी की सुनवाई नहीं हो रही है।

जितिन को समय न देकर बाकी मंत्रियों को दिया संदेश

खटीक के अलावा केंद्रीय नेतृत्व ने जिस तरह से पीडब्लूडी मंत्री जितिन प्रसाद के मामले को डील किया उससे यूपी के मंत्रियों के बीच एक नया संदेश गया है। दरअसल जितिन पूरी हनक के साथ दिल्ली अमित शाह से मिलने पहुंचे थे लेकिन उन्होंने मिलने से इंकार कर दिया। बीजेपी सूत्रों का दावा है कि जितिन से न मिलकर अमित शाह ने मंत्रियों को यह संदेश दे दिया कि तबादलों में खेल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। तबादलों को लेकर यदि राज्य सरकार ने जांच बैठाई है तो उसका निपटारा भी वहीं होगा न कि दिल्ली में होगा। जितिन को साफशब्दों में यह कहा गया कि आप मीडिया में जाकर यह कहिए कि तबादलों को लेकर योगी सरकार जो कदम उठा रही है वह सही है। इससे जितिन के अलावा जो अन्य मंत्री नाराज थे उनको भी साफ संदेश चला गया।

दलित उत्पीड़न के बहाने सरकार को घेरने की कोशिश

मायावती ने कहा कि बीजेपी सरकार के मंत्रिमंडल में दलित मंत्री की उपेक्षा किया जाना बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार अपनी जातिवादी मानसिकता और दलितों के प्रति तिरष्कार और अपमान की भावना को त्यागकर उनके हित में कदम उठाए तो बेहतर होगा। वहीं कांग्रेस के प्रवक्ता अंशु अवस्थी ने कहा कि अब तो सब एकदम साफ हो चुका है दूध का दूध पानी का पानी हो चुका है जो भारतीय जनता पार्टी दुहाई देती थी जीरो टॉलरेंस की। आज उनके मंत्री दिनेश खटीक का इस्तीफा इस बात का प्रमाण है कि भाजपा सरकार में सिर्फ एक उद्योग चल रहा है भ्रष्टाचार उद्योग , और दलितों को लेकर जो झूठे प्रेम का दिखावा भारतीय जनता पार्टी करती थी, मंत्री ने अपने इस्तीफे में उसकी कलई खोल दी है।

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