UP में पंजा-साइिकल-हाथी की मानसिकता वाले कुछ अफसर मिल ही जाएंगे, मंत्री संजय निषाद ने क्यों कही ये बड़ी बात
लखनऊ, 21 जुलाई: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में अब सभी मंत्रियों को अपने मातहत काम करने वाले अधिकारियों में ही खोट नजर आने लगी है। यूपी के जलशक्ति राज्य मंत्री दिनेश खटीक ने अफसरों के कामकाज के तरीकों पर सवाल उठाते हुए अपना इस्तीफा सीधे गृहमंत्री अमित शाह को भेज दिया था। इसके बाद से ही यूपी में सियासी भूचाल आया हुआ है। खटीक ने योगी से मिलकर अपनी सफाई पेश कर दी है लेकिन अब योगी सरकार के दूसरे मंत्री और सहयोगी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद ने अफसरों की मानसिकता को लेकर सवाल उठाया है। निषाद के इस बयान के बाद यूपी की राजनीति में एक बार फिर उबाल आ गया है।

उत्तर प्रदेश के प्रभावशाली दलित मंत्री दिनेश खटीक के इस्तीफे की पेशकश के बाद मत्स्य मंत्री संजय निषाद ने अफसरों की मानसकिता पर सवाल उठाए हैं। संजय निषाद की पार्टी सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सहयोगी है। उन्होंने गुरुवार को राज्य सरकार के कुछ अधिकारियों पर निशाना साधते हुए कहा कि, "कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की मानसिकता वाले कुछ अधिकारी हमेशा हो सकते हैं, लेकिन वे अपवाद हैं।"
उन्होंने गुरुवार को मीडियाकर्मियों से बात करते हुए कहा, "जो थोड़े बहुत हैं भी, उनके ऊपर कर्यवाही भी तो हो रही है और फिर इक्का दुक्का ऐसे अधिकारियों से हम अपने संगठन और सरकार पर थोड़े ही सवाल खड़े कर सकते हैं। जब भी ऐसे (अधिकारी) सामने आते हैं, प्रभावी कार्रवाई शुरू की जाती है। मैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद देता हूं।"
संजय निषाद ने अफसरों और कर्मचारियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि, "कुछ इक्का दुक्का पांजा, साइकिल, हाथी वाले कर्मचारी जरूर हो सकते हैं ... यूपी बड़ा प्रदेश है ... 25 करोड़ की आबादी है ... कहीं न कहीं निकल ही जाते हैं ... पंजा (कांग्रेस का चुनाव चिह्न), साइकिल (समाजवादी पार्टी का चुनाव चिह्न) और हाथी (बहुजन समाज पार्टी का चुनाव चिह्न)। लेकिन वे अपवाद हैं, नियम नहीं।"
मंत्री के अपने विभाग में तबादलों पर कुछ मुद्दों के बारे में पूछे जाने पर, उन्होंने कहा कि, "कुछ कर्मचारी थे जिनकी वास्तविक जरूरतें थीं। मैंने कहा था कि अगर वे ट्रांसफर पॉलिसी के तहत आ रहे हैं तो भी उनकी वास्तविक जरूरतों पर विचार किया जाए और वह किया गया था।"
मंत्री ने कहा कि उनके विभाग में अधिक अधिकारी नहीं हैं। हमारे पास कुछ कर्मचारी और अधिकारी हैं। फिर भी, अगर हम 100 दिनों में नीतियों और कार्यक्रमों को लोगों तक पहुँचाने की उपलब्धियां दर्ज कर सकते हैं, तो निश्चित रूप से, यह कर्मचारी ही हैं जो इसके लिए श्रेय के पात्र हैं।"
गौरतलब है कि यूपी में नई तबादला नीति आने के बाद से ही जो तबादले हुए हैं उनको लेकर योगी सरकार में माहौल गरमाया हुआ है। इसकी शुरुआत उस समय हुई जब यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद के बीच तबादलों को लेकर ठन गई थी। यह मामला मुख्यमंत्री के दरबार तक पहुंच गया था। अभी यह मामला शांत भी नहीं हुआ था कि पीडब्लूडी में तबादलों को लेकर हुए खेल की पोल खुल गई। इसमें पांच अफसरों को सस्पेंड कर दिया गया था। इसके बाद यूपी के कई मंत्रियों का अपने विभागों के अफसरों के बीच समन्वय न होने की बातें सामने आईं हैं। सबसे बड़ा मामला उस समय सामने आया जब यूपी के जलशक्ति राज्य मंत्री ने अफसरों पर आरोप लगाते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।












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