जन के बहाने "जाति का आशीर्वाद", जानिए वोट का वो गणित जिसके लिए सात केंद्रीय मंत्री उतरे यूपी की सड़कों पर

लखनऊ, 16 अगस्त: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी यूपी में जन आशीर्वाद यात्रा चला रही है। इस यात्रा में यूपी के 32 लोकसभा क्षेत्रों और 121 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करने का प्लान तैयार किया गया है। इस यात्रा का रोडमैप इस तरीके से तैयार किया गया है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचा जा सके। हालांकि आधिकारिक तौर पर तो संगठन के पदाधिकारी दावा कर रहे हैं कि यह इस यात्रा के माध्यम से केवल सरकारी योजनाओं को जन जन तक पहुंचाना ही लक्ष्य है लेकिन केंद्र के सात मंत्रियों को यूपी में उतारने के पीछे एक गणित यह भी है कि इन मंत्रियों को उन इलाकों में घुमाया जाए जहां उनके समाज के लोग ज्यादा हों ताकि लोगों की नाराजगी दूर हो सके।

जातिगत गणित के हिसाब से बनाया गया है मंत्री

जातिगत गणित के हिसाब से बनाया गया है मंत्री

मोदी मंत्रिमंडल में जिन सात लोगों को मंत्री बनाया गया था वह सब जातिगत गणित के हिसाब से ही बनाया गया था। केंद्रीय राज्य मंत्री बी एल वर्मा, एसपी सिंह बघेल, भानु प्रताप सिंह, कौशल किशोर सिंह, अजय मिश्र टेनी, पंकज चौधरी और अनुप्रिया पटेल को पार्टी ने बहुत ही रणनीतिक तरीके से जनता के बीच उतारने का काम किया है। बीजेपी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, '' दरअसल जिन लोगों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था, उसका आधार ही यही था कि चुनाव से पहले जातिगत समीकरण साधा जाए। अब चुनाव से पहले केंद्रीय नेतृत्व ने पीएम मोदी के कहने पर इन मंत्रियों को टास्क दिया है। उन्हें जनता के बीच भेजा गया है ताकि वह अपने अपने इलाकों में पार्टी के फेवर में एक माहौल बना सकें।''

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    नए केंद्रीय मंत्रियों को शामिल किया

    नए केंद्रीय मंत्रियों को शामिल किया

    जन आशीर्वाद यात्रा का हालांकि यह पहला चरण है जिसमें यूपी के नए केंद्रीय मंत्रियों को ही शामिल किया गया है। आने वाले समय में इसका और विस्तार किया जाएगा और यूपी के मंत्रियों को भी अलग से टास्क पकड़ा जाएगा। इस बारे में जन आशीर्वाद यात्रा के प्रभारी गोविंद नारायण शुक्ला कहते हैं, '' पहले चरण की यह यात्रा यूपी के 32 लोकसभा क्षेत्रों और 121 विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरेगी। ऐसा नहीं है कि इसमें केवल केंद्रीय मंत्री ही रहेंगे। यह यात्रा लोकसभा के साथ ही जिस विधानसभा से होकर गुजरेगी वहां के विधायक और सांसद को इसमें शामिल होना होगा।''

    जातिय गणित साधने की कवायद

    जातिय गणित साधने की कवायद

    भाजपा की इस जन आशीर्वाद यात्रा के पीछे एक गणित यह भी है कि चुनावी लिहाज से नए मंत्रियों को जनता के बीच उतारा जाए। लेकिन बीजेपी के सूत्र बताते हैं कि बहुजन समाज पार्टी के ब्राह्मण सम्मेलन के बाद ही समाजवादी पार्टी ने भी प्रबुद्ध सम्मेलनों के माध्यम से जातिय गणित बैठाने की कवायद शुरू कर दी थी। इन दोनों पार्टियों के इन सम्मेलनों की काट निकालने के लिए ही बीजेपी ने जन आशीर्वाद यात्रा का आगाज किया है ताकि एक साथ कई निशाने साधे जा सकें।

    जनता के आशीर्वाद के लिए निकाली गई है यात्रा

    जनता के आशीर्वाद के लिए निकाली गई है यात्रा

    इस यात्रा के माध्यम से जातियों को साधने के सवाल पर भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता आनंद दुबे ने वन इंडिया डॉट कॉम से बातचीत में कहा कि जाति और जमात की राजनीति कौन कर रहा है यह जनता देख रही है। सपा और बसपा ने जिस तरह से प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन के माध्यम से एक जाति विशेष पर फोकस करने का काम किया है लेकिन भाजपा का नारा सबका साथ और सबके विकास का है। मोदी जी ने इसमें एक शब्द और जोड़ दिया है सबका प्रयास। इसको लेकर ही मंत्रियों की यह जन आशीर्वाद यात्रा निकाली जा रही है।

    जन आशीर्वाद से जुड़े हैं मोदी के मंत्री

    जन आशीर्वाद से जुड़े हैं मोदी के मंत्री

    केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा की। उनकी जन आशीर्वाद यात्रा 16 अगस्त को वृंदावन मथुरा से प्रारंभ हो गई है। मथुरा जिला व महानगर की विधानसभाओं से होते हुए आगरा जिला, आगरा महानगर, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर, बुलंदशहर से होते हुए ये जन आशीर्वाद यात्रा 19 अगस्त को बदायूं में समाप्त होगी। बीएल वर्मा लोध विरादरी से आते हैं और यूपी में इनका वोट प्रतिशत लगभग आठ प्रतिशत है। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह भी लोध नेता ही थे लेकिन बीजेपी अब वर्मा को नए लोध नेता के तौर पर आगे लेकर आ रही है।

    भानु प्रसाद सिंह वर्मा बुंदलेखंड में भाजपा के लिए मुफीद

    भानु प्रसाद सिंह वर्मा बुंदलेखंड में भाजपा के लिए मुफीद

    केंद्रीय राज्य मंत्री भानु प्रताप वर्मा जनता का आशीर्वाद लेने के लिए 17 अगस्त को ललितपुर से जन आशीर्वाद यात्रा प्रारंभ करेंगे फिर झांसी, महोबा, बांदा, चित्रकूट होते हुए 19 अगस्त को फतेहपुर पहुंचेंगे जहां यात्रा का समापन होगा। लगातार पांच बार से सांसद भानु प्रसाद सिंह वर्मा बुंदेलखंड की जालौन सीट से सांसद हैं। ये कोरी समुदाय से आते हैं जो अभी एससी एसटी के दायरे में आती है। इसलिए इनको बुंदेलखंड के उन इलाकों की जिम्मेदारी सौंपी गई हैं जहां उनके समुदाय की तादाद ज्यादा है।

    कौशल किशोर को भुनाना चाहती है बीजेपी

    कौशल किशोर को भुनाना चाहती है बीजेपी

    केंद्रीय राज्य मंत्री कौशल किशोर 16 अगस्त की सुबह चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट लखनऊ पहुंचेंगे फिर मोहान उन्नाव से जन आशीर्वाद यात्रा का शुभारंभ करेंगे उन्नाव रायबरेली बाराबंकी होते हुए 18 अगस्त को सीतापुर में ये जन आशीर्वाद यात्रा समाप्त होगी। कौशल किशोर मोहनललागंज से सांसद हैं। ये पार्टी के अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष भी हैं और ये काफी प्रभावशाली नेता भी माने जाते हैं। ये समााजिक मुददों पर हमेशा सक्रिय दिखायी देते हैं। ये पार्टी के गैर जाटव दलित के फॉर्मूले में बिल्कुल फिट बैठते हैं। हालांकि कौशल किशोर पासी समाज से आते हैं और लखनऊ के आसपास के जिलों में अपने समुदाय में इनकी खासी पकड़ मानी जाती है।

    अजय मिश्रा का इस्तेमाल ब्राह्मण चेहरे के तौर पर

    अजय मिश्रा का इस्तेमाल ब्राह्मण चेहरे के तौर पर

    केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी भी 16 अगस्त की सुबह चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट लखनऊ पहुंचे फिर संडीला हरदोई से अपनी जन आशीर्वाद यात्रा का शुभारंभ किया। इनकी यात्रा हरदोई, लखीमपुर, बहराइच, गोंडा, अयोध्या होते हुए 19 अगस्त को अम्बेडकर नगर में समापन होगा। बेहद साफ सुथरी छवि की वजह से ये मोदी कैबिनेट में जगह बनाने में कामयाब हुए थे। बताया जाता है कि इनका संघ में भी अच्छी पैठ है और पार्टी इन्हें ब्राहमण चेहरे के तौर पर इस्तेमाल कर रही है। दरअसल लखीमपुर-खीरी, शाहजहांपुर, पीलीभीत, सीतापुर, बहराइच जैसे जिलों में ब्राह्मण वोटर अच्छी-खासी तादाद में हैं और टेनी को केंद्रीय मंत्री बनाने का फायदा 2022 के विधानसभा चुनाव में मिल सकता है।

    पूर्वांचल में पटेलों में काफी लोकप्रिय हैं अनुप्रिया

    पूर्वांचल में पटेलों में काफी लोकप्रिय हैं अनुप्रिया

    मिर्जापुर की सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल 18 अगस्त को प्रयागराज से अपनी जन आशीर्वाद यात्रा शुरू करेंगी और यात्रा का समापन 19 अगस्त को मिर्जापुर में होगा। अनुप्रिया पटेल मोदी के पहले कार्यकाल में भी मंत्री बनने में कामयाब हुई थीं। वह कुर्मी समाज से आती हैं और इलाहाबाद, मिर्जापुर और बनारस समेत पूर्वांचल के लगभग एक दर्जन जिलों में इस समुदाय की अच्छी खासी जनसंख्या है। पिछड़े मतदाताओं में यादव वोट के बाद कुर्मी वोट ही है जिसमें अनुप्रिया का अच्छा प्रभाव है। प्रदेश में कुर्मियों की 9 प्रतिशत आबादी के साथ विधानसभा की 100 सीटों पर प्रभाव है। इसका अंदाजा बीजेपी को है।

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