पटना के गांधी मैदान से ओम प्रकाश राजभर इन 5 मुद्दों को लेकर फूकेंगे नीतीश के खिलाफ बिगुल

लखनऊ, 22 अगस्त: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के बाद अब यहां के राजनीतिक हालात पूरी तरह से बदल गए हैं। जो राजनीतिक दल पहले बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोले हुए थे अब वो सपा के चीफ अखिलेश यादव से अलग होकर अब बीजेपी के नजदीक आ गए हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के चीफ ओम प्रकाश राजभर की। ओम प्रकाश राजभर ने विधानसभा चुनाव के बाद से ही अखिलेश को लेकर कई बयान दिए जिससे गठबंधन टूट गया। अखिलेश से अलग होने के बाद अब ओम प्रकाश राजभर ने अपनी नजरें बिहार पर गड़ा दी हैं। बिहार में वह यूपी के सीमावर्ती जिलों पर फोकस कर लोगों को नीतीश सरकार के खिलाफ जागरूक करने के लिए सावाान यात्रा निकालेंगे।

बिहार के कोर मुद्दों पर सावधान यात्रा में होगा फोकस

बिहार के कोर मुद्दों पर सावधान यात्रा में होगा फोकस

यूपी के पूर्वांचल में अपनी जड़ें जमाने के बाद अब ओम प्रकाश राजभर ने बिहार का रुख कर लिया है। बिहार में अगले साल चुनाव भी होने हैं। इस लिहाज से राजभर अब वहां अपनी सावधान यात्रा निकालकर लोगों को जागरुक करेंगे। सुभासपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अरुण राजभर ने वनइंडिया हिन्दी को बताया कि बिहार के कोर मुद्दों पर फोकस किया जाएगा। इसमें जातिवार जनगणना, सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट, एक समान एवं अनिवार्य शिक्षाा, तकनीकी एवं रोजगार परक शिक्षा के साथ ही गरीबों को फ्री इलाज और पुरानी पेंशन का मुद्दा शामिल रहेगा। अरुण ने बताया कि 27 अक्टूबर को पटना गांधी मैदान में सावधान महारैली आयोजित की जाएगी।

पुरानी पेंशन बहाली और गरीबों को मिले फ्री इलाज

पुरानी पेंशन बहाली और गरीबों को मिले फ्री इलाज

ओम प्रकाश राजभर की पार्टी चुनाव से पहले पटना के गांधी मैदान में इन जिन पांच मुद्दों को लेकर इसमें सबसे अहम मुद्दा बिहार में पुरानी पेंशन की बहाली का है। राजभर ये मांग करेंगे कि बिहार में पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू किया जाए। दरअसल कांग्रेस की ओर से कुछ राज्यों में पुरानी पेंशन को बहाल कर दिया गया है। इसको लेकर यूपी के विधानसभा चुनाव में भी राजभर ने अखिलेश के साथ मिलकर ये मुद्दा उठाया था। यूपी में पुरानी पेंशन की बहाली एक बड़ा मुद्दा है जिसको सपा ने उठाया था। हालांकि अब सपा से अलग हो चुके राजभर इस मुद्दे को नीतिश के खिलाफ हथियार के तौर इस्तेमाल करेंगे।

यूपी में अखिलेश से अलग हो चुके हैं राजभर

यूपी में अखिलेश से अलग हो चुके हैं राजभर

यूपी में विधानसभा का चुनाव सम्पन्न हुए पांच महीने बीत चुके हैं। पांच महीने के भीतर यूपी की राजनीतिक परिस्थितियों में काफी बदलाव आया है। ओम प्रकाश राजभर चुनाव से पहले अखिलेश के साथ मिलकर यूपी में बीजेपी को घेरने में जुटे हुए थे। तब राजभर ने बीजेपी को घेरने के लिए कई मुद्दे उठाए थे लेकिन चुनाव में जनता ने इसको नकार दिया और यूपी में बीजेपी की पूर्णबहुमत की सरकार बन गई। चुनाव में हारने के बाद राजभर ने अखिलेश से नाता तोड़ लिया और अब वह बिहार की राजनीति में अपनी किस्मत आजमाना चाहते हैं।

राष्ट्रपति चुनाव में अखिलेश से की थी बगावत

राष्ट्रपति चुनाव में अखिलेश से की थी बगावत

अखिलेश और ओम प्रकाश राजभर के रिश्तों में खटास उस समय आयी जब राजभर ने राष्ट्रपति चुनाव में अखिलेश से बगावत करके एनडीए की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में मतदान कर दिया था। इसके बाद अखिलेश ने राजभर को सीधा जवाब दे दिया था कि वह गठबंधन से अलग होने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र हैं। इसके बाद राजभर ने अखिलेश से नाता तोड़ लिया था। अखिलेश से अलग होते ही बीजेपी ने राजभर को वाई श्रेणी की सुरक्षा मुहैया करा दी जिससे यह संदेश गया कि राजभर बीजेपी के खेमे में जाने वाले हैं लेकिन बीजेपी ने राजभर पार्टी में शामिल कराने की बजाए उनका इस्तेमाल करना ही बेहतर समझा।

बिहार की राजनीति में आ चुका है बदलाव

बिहार की राजनीति में आ चुका है बदलाव

दरअसल बिहार में चुनाव से पहले बड़ा सत्ता परिवर्तन हो चुका है। नीतीश कुमार ने बीजेपी के गठबंधन से अलग होने का फैसला कर लिया था। बीजेपी के साथ गठबंधन टूटते ही नीतीश ने तेजस्वी से हाथ मिलाकर वहां सरकार बना ली। अब बिहार में नीतीश के साथ तेजस्वी यादव डिप्टी सीएम के तौर पर काम कर रहे हैं। हालांकि नीतीश-तेजस्वी का गठबंधन बिहार चुनाव तक टिकेगा या नहीं यह देखना दिलचस्प होगा। हालांकि बीजेपी अब चुनाव में अकेले ही उतरने की तैयारी करने में जुट गई है।

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