Noida हिंसा का 'मास्टरमाइंड' चढ़ा पुलिस के हत्थे, मजदूरों को उकसाने वाले आदित्य की तमिलनाडु में गिरफ्तारी
उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और नोएडा पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। नोएडा में हुए श्रमिक उपद्रव (Noida labour violence) के मुख्य साजिशकर्ता आदित्य आनंद को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली से गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस से बचने के लिए आरोपी अपनी पहचान बदलकर रह रहा था।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तारी से बचने के लिए आदित्य आनंद ने अपना हुलिया पूरी तरह बदल लिया था। उसने अपनी दाढ़ी मुंडवा ली थी और बाल कटवा लिए थे। नोएडा पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर 1 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था।

नोएडा हिंसा का मास्टरमाइंड
पुलिस का मानना है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़काऊ भाषण देकर मजदूरों को हिंसा के लिए उकसाने में आदित्य की मुख्य भूमिका थी।
और कौन-कौन थे हिंसा के मुख्य आरोपी?
नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने इस पूरे मामले को एक 'दुर्भावनापूर्ण और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगठित गतिविधि' करार दिया है। उन्होंने बताया कि इस हिंसा को भड़काने में मनीषा चौहान, रूपेश राय और आदित्य आनंद के नाम मुख्य रूप से सामने आए हैं।
जांच में क्या क्या खुलासा हुआ?
- सुनियोजित साजिश: हिंसा से तीन दिन पहले ही इसकी तैयारियां शुरू कर दी गई थीं।
- डिजिटल नेटवर्क: डीसीपी शैव्या गोयल के अनुसार, विरोध प्रदर्शन से पहले 80 से अधिक व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए थे।
- भटकाने की रणनीति: इन ग्रुप्स में वेतन वृद्धि या मजदूरों की मांगों पर चर्चा करने के बजाय, फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ और भीड़ जुटाने की योजना साझा की जा रही थी।
कैसे भड़की हिंसा?
कमिश्नर के अनुसार, 31 मार्च और 1 अप्रैल को नोएडा के भीतर गतिविधियों का समन्वय किया गया। 11 अप्रैल को जब प्रशासन और मजदूरों के बीच शांतिपूर्ण समझौता हो गया था, तब इन आरोपियों ने फिर से भड़काऊ भाषण दिए। इसके बाद ही 13 अप्रैल को 'मदरसन' (Motherson) प्लांट के सामने भारी भीड़ जुटी और हिंसा भड़क गई।
इस हिंसा के दौरान उपद्रवियों ने पत्थरबाजी, आगजनी और निजी व सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया था। हालांकि, बाद में उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यूनतम वेतन में वृद्धि कर दी और भविष्य के संशोधन के लिए 'वेज बोर्ड' के गठन की घोषणा की।















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