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आतंकियों को हुई फांसी की सजा, पिस्टल चेक करने के लिए हत्या, माथे पर तिलक वाला शिकार किया था फाइनल

लखनऊ की NIA कोर्ट ने ISIS से जुड़े दो आतंकियों को फांसी की सजा सुनाई है। 7 साल पहले कानपुर में रिटायर्ड शिक्षक रमेश बाबू की हत्या के मामले में आतंकी आतिफ और फैसल को दोषी करार दिया है। इन आतंकियों ने ISIS द्वारा दिए गए हत्यारों की टेस्टिंग करने के लिए शिक्षक को मौत के घाट उतार दिया था। इन आतंकियों का हाथ भोपाल-उज्जैन पैसेंजर ट्रेन में हुए बम धमाकों में भी था।

7 साल पहले हुई थी टीचर की हत्या
बता दें कि 24 अक्टूबर 2016 को रिटायर्ड शिक्षक रमेश बाबू छुट्टी के बाद घर लौट रहे थे। स्कूल से करीब 500 मीटर दूर दो लड़कों ने पिस्टल से रमेश के सीने में एक के बाद एक दो गोलियां दाग दीं और फरार हो गए। उधर, गोली की आवाज सुनकर वहां मौजूद लोग रमेश की तरफ भागे। आनन-फानन में खून से लथपथ रमेश को कांशीराम हॉस्पिटल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

NIA court of Lucknow sentenced two terrorists to be hanged for killing school teacher in kanpur

आतंकी हमले से जुड़े कातिलों के तार
सरेआम हुई टीचर की हत्या के बाद पुलिस आरोपियों की तलाश में जुट गई। लेकिन 7 महीने तक पुलिस के हाथ कुछ भी नहीं लगा। इसी बीच 7 मार्च, 2017 को भोपाल-उज्जैन पैसेंजर ट्रेन में जबड़ी रेलवे स्टेशन के पास बम धमाके हो गए। यह एक आतंकी घटना थी जिससे पूरा देश हिल गया था। साथ ही इस आतंकी हमले के बाद एनआईए और केंद्रीय एजेंसियां भी सक्रिय हो गई।

ऐसे खुला टीचर रामबाबू शुक्ला की हत्या का राज
फिर 7 मार्च को ही एटीएस ने खुफिया इनपुट के बाद आतंकी सैफुल्लाह को लखनऊ के ठाकुरगंज इलाके में मार गिराया। साथ ही कानपुर के जाजमऊ के रहने वाले इस आतंकी के ठिकाने से मिले हथियारों और दस्तावेजों से ISIS के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हो गया। इसके बाद एटीएस ने मोहम्मद फैजल, गौस मोहम्मद खान, अजहर, आतिफ मुजफ्फर, मोहम्मद दानिश, सैयद मीर, हुसैन, आसिफ इकबाल उर्फ राकी व मोहम्मद आतिफ को गिरफ्तार करके पूछताछ शुरू कर दी।

असलाह की टेस्टिंग करने के लिए कर दी हत्या
पूछताछ के दौरान आतिफ मुजफ्फर और मोहम्मद फैसल खान ने एक हैरान करने वाला खुलासा किया। उसने बताया कि वे लोग गैर मुस्लिमों को दहशतजदा करके ISIS के प्रभाव को बढ़ाना चाहते थे। इसके लिए उन्हें असलहे भी मुहैया कराए गए थे। वो लोग उन्ही असलहों की टेस्टिंग करने के फिराक में थे। इसी दौरान 24 अक्टूबर, 2016 को आतिफ और फैसल को साइकिल से जाते हुए रामबाबू शुक्ला दिखाई दिए।

NIA court of Lucknow sentenced two terrorists to be hanged for killing school teacher in kanpur

माथे पर तिलक और कलाई पर कलावा देखकर मारी थी गोली
रामबाबू के माथे पर तिलक और कलाई पर कलावा देखकर यह दोनों आतंकी समझ गए कि रामबाबू गैर मुस्लिम हैं। फिर दोनों ने उनसे नाम पूछा। रामबाबू शुक्ला ने जैसे ही अपना नाम बताया तो दोनों ने उनपर ताबड़तोड़ गोलियां दाग दी। यही नहीं बल्कि कत्ल की वारदात का वीडियो बनाकर भी इन आतंकियों ने सीरिया में अपने आकाओं को भी भेजा था।

इस तरह कानपुर में रिटायर्ड टीचर रमेश बाबू शुक्ला की हत्या की वारदात पर पड़ा से पर्दा उठ गया। इस खुलासे के बाद गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) की धारा बढ़ाने के बाद सितंबर 2017 को आतंकी एंगल से जांच शुरू की गई थी। इसके दो माह बाद केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने जांच एनआईए को सौंपी । एनआईए ने हत्या में इस्तेमाल की गई पिस्टल को लखनऊ में आतंकियों हाइड हाउस से बरामद कर लिया। प्रिसिंपल रामबाबू शुक्ला को लगी गोली और पिस्टल की जांच एफएसएल चंडीगढ़ से कराई गई।

दफा 302 के तहत फांसी की सजा
वहीं इस मामले में 4 सितंबर 2023 को ATS/NIA की विशेष अदालत ने कानपुर में रिटायर्ड शिक्षक रमेश बाबू की हत्या के मामले में आतंकी आतिफ और फैसल को दोषी करार दिया था। गुरुवार को दोनों की वर्चुअली पेशी हुई। न्यायाधीश दिनेश चंद्र मिश्रा की कोर्ट ने दोनों पर 15-15 लाख का जुर्माना भी लगाया है। सरकारी वकील बृजेश कुमार यादव ने बताया कि तीन अलग-अलग धाराओं 302 में फांसी, 120बी में फांसी, 16 UAPA में फांसी और चौथे 18 UAPA में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।

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