अखिलेश चुने गए विधायक दल के नेता, खफा मुलायम ने रद्द की दावत
बता दें कि मुलायम सिंह यादव जनवरी तक पार्टी के अध्यक्ष थे, लेकिन पार्टी में अन्य गुट बन जाने के बाद ज्यादातर विधायक अखिलेश यादव के खेमे में चले गए, जिसके बाद साइकिल के निशान को लेकर काफी गहमागहमी हुई।
लखनऊ। चुनाव में मिली करार हार के बाद भी समाजवादी पार्टी में कुछ ठीक नहीं चल रहा है। इसका ताजा उदाहरण बुधवार को देखने को मिला जब सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने उस मीटिंग और डिनर को रद्द कर दिया जिसमें उन्होंने विधानसभा चुनावों में चुने गए 47 पार्टी विधायकों को न्योता दिया था। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक मुलायम सिंह ने यह फैसला उस वक्त लिया जब पार्टी के विधायकों ने एक बैठक में मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को विधानसभा और विधान परिषद् में नेतृत्व करने के लिए चुन लिया।

जानकारी के मुताबिक उस बैठक में विधायक और सपा के वरिष्ठ नेता ललाई सिंह ने प्रस्ताव रखा कि पार्टी के दोनों सदनों से नेता सिर्फ उन्हीं बैठक में जाएं, जिसका न्योता राष्ट्रीय अध्यक्ष ने दिया हो। हालांकि इसमें मुलायम सिंह की बुधवार की बैठक का कोई जिक्र नहीं था। बता दें कि मुलायम सिंह यादव जनवरी तक पार्टी के अध्यक्ष थे, लेकिन पार्टी में अन्य गुट बन जाने के बाद ज्यादातर विधायक अखिलेश यादव के खेमे में चले गए, जिसके बाद साइकिल के निशान को लेकर काफी गहमागहमी हुई। जरूर पढ़ें- कौन हैं रामगोविंद चौधरी जिन्हें अखिलेश ने बनाया विपक्ष का नेता
चुनाव आयोग को इसमें दखल देना पड़ा और बाद में यह चुनावी चिन्ह अखिलेश यादव के गुट को दे दिया गया। इसके बाद अखिलेश पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बन गए थे। गौर करने वाली बात ये है कि मंगलवार को जिस बैठक में अखिलेश यादव को नेता चुना जाना था उस बैठक में शिवपाल भी नहीं पहुंचे थे। वहीं आजम खां भी इस बैठक से नदारत दिखे। सूत्रों ने यह भी बताया कि शिवपाल को न्योता ही नहीं दिया गया था, जबकि आजम खान इस बात से नाराज थे कि उन्हें विधानसभा में नेता विपक्ष क्यों नहीं बनाया गया।












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