कौन हैं रामगोविंद चौधरी जिन्हें अखिलेश ने बनाया विपक्ष का नेता

कौन हैं सपा नेता राम गोविंद चौधरी जिन्हें अखिलेश यादव ने विपक्ष का नेता नियुक्त किया है, आठ बार रह चुके हैं विधायक

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के विधायक राम गोविंद चौधरी को अखिलेश यादव ने यूपी विधानसभा में विपक्ष का नेता नियुक्त किया है। राम गोविंद चौधरी को अखिलेश यादव ने आजम खान और शिवपाल यादव की अनदेखी करते हुए विपक्षा का नेता नियुक्त किया है। सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि अखिलेश यादव ने राम गोविंद चौधरी को सपा विधायक दल का नेता चुना है और वह विपक्षे के नेता भी होंगे।

आजम-शिवपाल पर पड़े भारी

आजम-शिवपाल पर पड़े भारी

राम गोविंद चौधरी आठ बार के विधायक हैं और उन्हें अखिलेश यादव का करीबी माना जाता है, अखिलेश सरकार में वह बेसिक शिक्षा मंत्री थे, इसके अलावा वह बाल विकास मंत्री भी रहे। आजम खान अखिलेश सरकार में संसदीय कार्य मंत्री थे, ऐसे में उनके साथ शिवपाल यादव के नाम पर भी चर्चा हो रही थी कि उन्हें विपक्ष का नेता बनाया जा सकता है। जिस वक्त मायावती की सरकार थी उस वक्त शिवपाल यादव विपक्ष के नेता था।

राजनाथ सिंह के साथ पहली बार 1977 में जीता चुनाव

राजनाथ सिंह के साथ पहली बार 1977 में जीता चुनाव

राम गोविंद चौधरी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी और पहली बार वह 1977 में चिलकहर विधानसभा सीट से जीतकर आए थे। इस बार वह बलिया के बंसदीह सीट से जीतकर आए हैं। जयप्रकाश नारायण और चंद्रशेखर के साथ इनके पास काम करने का अनुभव है। आपात काल में राम गोविंद चौधरी 1977 में जेल भी गए थे। मौजूदा समय में राम गोविंद चौधरी से ज्यादा किसी भी विधायक के पास अनुभव नहीं है। 1977 में राम गोविंद चौधरी, राजेंद्र चौधरी और राजनाथ सिंह पहली बार चुनकर आए थे। राम गोविंद चौधरी को उनके बागी और अख्खड़ स्वभाव के लिए जाना जाता है, ऐसे में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती है तीन चौथाई बहुमत वाली भाजपा के सामने मजबूत विपक्ष के नेता की भूमिका निभाना। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि वह कैसे इतने बड़े बहुमत के सामने अपनी उपयोगिता साबित कर पाते हैं।

जेपी आंदोलन में गए जेल

जेपी आंदोलन में गए जेल

1971-72 में बलिया के मुरली मनोहर टाउन महाविद्यालय से पढ़ाई के दौरान वह महामंत्री चुने गए और इसके बाद वह अध्यक्ष भी बने। छात्र राजनीति के बाद उन्होंने जेपी आंदोलन में अपनी भूमिका दी और छात्रों के लिए वह इस आंदोलन में कूद गए। 1975 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और 19 महीने तक उन्हें जेल में रहना पड़ा। लेकिन जेल से छूटने के बाद वह चुनावी मैदान में कूदे और पहली बार चिलकहर से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे, उस समय वह चंद्रशेखर की जनता पार्टी के सदस्य थे। चंद्रशेखर को ही वह अपना राजनीतिक गुरु भी मानते हैं।

2002 में थामा मुलायम सिंह का हाथ

2002 में थामा मुलायम सिंह का हाथ

लेकिन 2002 में जब वह समाजवादी जनता पार्टी से विधायक चुने गए तो उन्होंने मुलायम सिंह का दामन थामा और उनके साथ लंबे समय तक अपनी सियासी पारी को आगे बढ़ाया। बांसडीह से भी वह तीन बार विधायक रहे। विपक्ष का नेता चुने जाने पर राम गोविंद चौधरी कहते हैं कि हम सदन में सकारात्मक भूमिका निभाएंगे। हम जनहित के मुद्दों को सकारात्मक तरीके से उठाएंगे और सरकार से जनता से जुड़े हर सवाल पूछे जाएंगे। फिलहाल हम सरकार के फैसलों का इंतजार कर रहे हैं।

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