UP Politics: 2024 में मुलायम परिवार के 6 सदस्य लड़ सकते हैं चुनाव, जानिए कहां से कौन लड़ेगा?

यूपी में बीजेपी चाहे समाजवादी पार्टी पर परिवारवाद और वंशवाद के कितने भी आरोप लगाए, लेकिन लगता है कि सपा पर उससे कोई असर नहीं पड़ने वाला। क्योंकि, पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव ने लगता है कि तय कर लिया है कि उनकी फैमिली अगर पार्टी की फर्स्ट फैमिली है तो इसी आधार पर चुनावों में दावेदारी करने में क्यों संकोच होना चाहिए?

एचटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक समाजवादी पार्टी की फर्स्ट फैमिल यानी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के परिवार के कम से कम 6 सदस्य 2024 में यूपी से लोकसभा का चुनाव लड़ सकते हैं। इनमें से 4 के लिए सीटें भी लगभग तय कर ली गई हैं और बाकी दो की तलाश की जा रही है।

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2014 के लोकसभा चुनाव से प्रेरणा?
2014 के लोकसभा में मोदी लहर के दौरान यूपी से मुलायम की पार्टी से 5 उम्मीदवार चुनाव जीते थे और वे सभी उन्हीं के परिवार के लोग थे। इनमें खुद दिवंगत मुलायम सिंह यादव, उनकी बहू डिंपल यादव, भतीजे धर्मेंद्र यादव और अक्षय यादव और पोते (भाई के पोते) तेज प्रताप सिंह यादव शामिल थे।

दिलचस्प बात ये है कि उस चुनाव में राज्य की 80 में से 73 सीटें एनडीए को मिली थी। 7 सीटों पर ही विपक्ष जीता था। इनमें से 5 पर सपा की फर्स्ट फैमिली के सदस्य और अमेठी और रायबरेली में कांग्रेस की फर्स्ट फैमिली के सदस्यों यानी सोनिया गांधी और राहुल गांधी को कामयाबी मिली थी।

यादव परिवार के लिए 6 में से 4 सीटें तय?
लगता है कि उसी बार के चुनाव से प्रेरित होकर इस बार सपा प्रमुख अखिलेश यादव खुद कन्नौज से चुनाव लड़ सकते हैं। उनकी पत्नी डिंपल यादव फिर से मैनपुरी से ही भाग्य आजमाएंगी। अखिलेश के चाचा शिवपाल आजमगढ़ से चुनाव लड़ सकते हैं। वहीं अक्षय यादव पर एक बार फिर से फिरोजाबाद में दांव आजमाया जा सकता है।

यादव परिवार के लिए दो आसान सीटों की तलाश
2019 के लोकसभा चुनावों में भी यूपी में सपा को 5 ही सीटें ही मिली थी, लेकिन तब यादव परिवार के सिर्फ 2 ही लोग चुनाव जीत पाए थे। तब परिवार में विवाद भी गहराया हुआ था। सपा में अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों की कवायद की जानकारी रखने वालों के मुताबिक परिवार अभी बदायूं के पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव और मैनपुरी के पूर्व सांसद तेज प्रताप सिंह यादव के लिए कोई सुरक्षित सीट की तलाश कर रहा है।

अखिलेश कन्नौज से लड़ने का दे चुके हैं संकेत- सपा नेता
धर्मेंद्र यादव के लिए बदायूं से अलग सीट इसलिए खोजी जा रही है, क्योंकि वहां से अभी बीजेपी की संघमित्रा मौर्य सांसद हैं, जो सपा के महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी हैं। सपा के कन्नौज जिलाध्यक्ष सलीम खान के मुताबिक, 'इम इस सोच के साथ काम कर रहे हैं कि वे (अखिलेश) कन्नौज से लड़ेंगे। अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन उन्होंने एक नहीं, कई बार यहां से चुनाव लड़ने का संकेत दिया है।'

उन्होंने कहा कि 'वे तब से (2022 के विधानसभा चुनाव) आधा दर्जन से ज्यादा बार कन्नौज आ चुके हैं।' सपा चीफ ने 2000 में पहली बार यहीं से उपचुनाव जीता था और उसके बाद यहां से दो बार आम चुनाव जीत चुके हैं।

इसी तरह से उन्होंने आजमगढ़ से शिवपाल यादव के चुनाव लड़ने का भी संकेत दिया है। जहां तक डिंपल की बात है तो उन्हें मैनपुरी सीट पर ससुर के निधन के बाद 2022 के दिसंबर में उपचुनाव में जीत मिली है, इसलिए वह वहीं से चुनाव लड़ेंगी।

परिवार के पक्ष में दी जा रही है तरह-तरह की दलील
सपा की फर्स्ट फैमिली से अभी तक जिन 6 नामों की चर्चा लोकसभा चुनावों को लेकर की गई है, वे या तो अभी सांसद या विधायक हैं या पहले जनप्रतिनिधि रह चुके हैं। इसी आधार पर सपा के एक वरिष्ठ नेता की दलील है कि 'किसी पूर्व विधायक या विधायक के लिए अगला चुनाव लड़ना स्वाभाविक है, है कि नहीं? दिक्कत कहां है?'

वहीं पार्टी सचिव राजेंद्र चौधरी कहते हैं, 'सबसे बड़ा 'परिवारवाद' बीजेपी में है।' अखिलेश यादव भी जनसभाओं से लेकर सोशल मीडिया तक पर कहते रहे हैं कि बीजेपी सबसे बड़ी 'परिवारवादी' पार्टी है।

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