मुख्तार अंसारी कितना बड़ा अपराधी है अगर भूल गए हैं तो जरूर पढ़ें
लखनऊ। आपने अक्सर फिल्मों में देखा होगा कि कुख्यात अपराधी बंदूक की नोक पर अपने इलाके में लोगों के बीच खौफ का व्यापार करता है और लोगों के सामने वह लोगों को मौत के घाट उतार देता है, यही नहीं वहां मौजूद लोग उसके खिलाफ गवाही देने की भी हिमाकत नहीं करते हैं, और जो हिम्मत करके गवाही देने के लिए आगे आता है उसे मौत के घाट उतार दिया जाता है।

कुछ यही फिल्मी दुनिया मुख्तार अंसारी उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में चला रहा था और हत्या, फिरौती, गुंडा टैक्स, अपरहरण सहित तमाम ऐसे काले धंधे करता था जिसकी कानून इजाजत नहीं देता था।
समाजवादी पार्टी अब कौमी एकता दल के सपा में विलय के साथ समाजवाद की नया इतिहास शुरु करने जा रही है। शिवपाल यादव ने खुद इस बात का आधिकारिक ऐलान कर दिया है कि नेताजी की अनुमति से मुख्तार अंसारी की पार्टी का सपा में विलय हो चुका है।
मुख्तार अंसारी और उनके भाई अफजाल अंसारी को बाहुबली नेता के तौर पर जाना जाता है। मुख्तार अंसारी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं और वह मौजूदा समय में आगरा की जेल में बंद हैं।
दादा थे वरिष्ठ कांग्रेसी नेता
मुख्तार अंसारी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मुख्तार अहमद अंसारी के पोते हैं, अहमद अंसारी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे हैं।
मखनू गैंग के सदस्य से गुंडा टैक्स की वसूली का सफर
मुख्तार अंसारी मुख्य रूप से मखनू सिंह गैंग के सदस्य थे जिसकी 1980 से साहिब सिंह के गैंग से जमीन को लेकर काफी बार खूनी भिड़ंत हो चुकी है।
साहिब सिंह गैंग का सरगना बृजेश सिंह था जिसने बाद में खुद अपना गैंग बनाया और गाजीपुर में 1990 में कॉट्रैक्ट माफिया बनकर उभरा। अंसारी की सीधी भिड़ंत बृजेश सिंह से रहती थी। दोनों ही गैंग कोयला, खनन, रेलवे कॉट्रैक्ट, शराब सहित तमाम धंधे करते थे। ये दोनों ही गैंग गुंडा टैक्स और फिरौती लेने का रैकेट भी चलाती थी।
पूर्वांचल में अपराध की दुनिया का बादशाह
अपराध की दुनिया के बेताज बादशाह मुख्तार अंसारी मऊ, गाजीपुर, वाराणसी, जौनपुर में कुख्तार अपराधी के तौर पर जाने जाते थे। लेकिन अपराध की दुनिया के साथ ही उन्होंने 1995 में राजनीति की दुनिया में भी कदम रखा और 1996 मे विधायक बनें।
बृजेश सिंह से खूनी जंग
लेकिन इस दौरान भी अंसारी और बृजेश सिंह की आपसी तकरार बनी रही, अंसारी की एक रैली पर बृजेश सिंह धावा भी बोल दिया था। इस दौरान गोलीबारी में अंसारी के तीन लोगों की मौत हो गई थी, बृजेश सिंह बुरी तरह से घायल हो गया था और माना जा रहा था कि उसकी मौत हो गई है।
अंसारी की राजनैतिक दावेदारी के प्रभाव को कम करने के लिए बृजेश सिंह ने भाजपा के कृष्णानंद राय का प्रचार करना शुरु कर दिया। राय ने अंसारी के भाई अफजाल जोकि पांच बार के विधायक थे को मोहम्मदाबाद से हरा दिया।
मुख्तार अंसारी ने राय पर आरोप लगाया कि बतौर विधायक उन्होंने बृजेश सिंह को कई ठेके दिए और दोनों ने मिलकर उनका सफाया करने का भी षड़यंत्र रचा था।
मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति शुरु की
राजनीति में अपनी पैठ को मजबूत करने के लिए अंसारी ने एक बार फिर से दांव चलना शुरु किया और मुस्लिम वोट बैंक पर अपनी दावेदारी शुरु कर दी। गाजीपुर-मऊ एक तरफ जहां अंसारी के विरोधी हिंदू वोट बैंक साध रहे थे तो अंसारी ने मुस्लिम वोट बैंक को साधना शुरु कर दिया। जिसके चलते इस क्षेत्र में कई दंगे और हिंसात्मक घटनाएं भी हुई, जिसके बाद अंसारी को दंगे कराने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था।
कई हत्याओं का मास्टरमाइंड अंसारी
जिस वक्त अंसारी जेल में था उस वक्त कृष्णानंद राय और उसके छह सहयोगियों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। हमलावरों ने एके 47 से 400 राउंड गोलियां चलाई थी। सात शव से 67 गोलियां मिली थी। इस मामले में मुख्य गवाह शशिकांत राय की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। हालांकि पुलिस ने इसे आत्महत्या मानने से इनकार कर दिया। इस हत्याकांड के बाद बृजेश सिंह फरार हो गया।
गवाहों को जान से मरवा देता था अंसारी
बृजेश सिंह को 2008 में ओड़िशा से गिरफ्तार किया गया था, बाद में उसने प्रगतिशील मानव समाज पार्टी की ओर से राजनीति में कदम रखा। 2008 में मुख्तार अंसारी के खिलाफ धर्मेंद्र सिंह पर हमला कराने का मामला दर्ज किया गया। धर्मेंद्र सिंह हत्या का चश्मदीद था। हालांकि बाद में धर्मेंद्र सिंह के परिजनों ने अंसारी के खिलाफ मामला वापस लेने की अर्जी दे दी थी।
2009 में पुलिस ने अंसारी का नाम चार्जशीट में कपिल देव सिंह की हत्या के मामले में दर्ज किया। पुलिस ने अपनी चार्जशीट में अंसारी को अजय प्रकाश सिंह की ह्ताय का भी आरोपी माना। 2010 में अंसारी राम सिंह मौर्या की हत्या के मामले में बुक किए गए। यहां गौर करने वाली बात यह है कि मौर्या भी मन्नत सिंह की हत्या का गवाह था। मन्नत सिंह स्थानीय ठेकेदार था और उसकी अंसारी के गैंग के लोगों ने हत्या कर दी थी।
मायावती ने बताया था गरीबों का मसीहा
मुख्तार अंसारी 2007 में पहली बार बसपा विधायक बने, अंसारी ने खुद को तमाम मामलों में निर्दोष बताया जिसके बाद मायावती ने उन्हें गरीबों का मसीहा बताया। यह वही दौर था जब अंसारी की छवि रॉबिन हुड के तौर पर स्थापित हुई थी।
अंसारी ने 2009 में लोकसभा चुनाव लड़ा, उस वक्त भी वह जेल में थे, लेकिन वह भाजपा के मुरली मनोहर जोशी के खिलाफ हार गया।
2010 में बनाई अपनी पार्टी
2010 में बसपा ने मुख्तार अंसारी और अफजाल अंसारी को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। जिसके बाद मुख्तार, अफजाल और सिबकतिल्लाह ने कौमी एकता दल का 2010 में गठन किया। 2014 में अंसारी ने नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने का ऐलान किया था लेकिन बाद में उसने अपनी दावेदारी वापस ले ली थी।
पारिवारिक पृष्ठभूमि
मुख्तार अंसारी की छवि कुख्यात आरोपी के तौर पर हैं और उनके पास अकूत संपत्ति भी है। उनकी पत्नी के पास तकरीबन 12 करोड़ रुपए की संपत्ति है। यही नहीं उनका बड़ा बेटा अंतर्राष्ट्रीय स्तर का शूटर है।
अंसारी के पास कुल 2 करोड़ 54 लाख 38 हजार करोड़ रुपए की चल संपत्ति है। जबकि उनके पास 2 करोड़ रुपए की जमीन और आवास है। उनके पास एक लाख 90 हजार रुपए की एलआईसी भी है। अंसारी ने 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान जो एफिडेविट भरा था उसके अनुसार उनके पास ढाई करोड़ रुपए हैं जबकि उनकी पत्नी आफशा के पास 12 करोड़ रुपए की संपत्ति है।
पत्नी के पास है रिवाल्वर
अपने एफिडेविट में अंसारी ने उनके उपर दर्जनभर से अधिक आपराधिक मामलों का जिक्र किया है। जो जानकारी उन्होंने मुहैया कराई है उसके अनुसार उनकी शैक्षिक योग्यता स्नातक है।
अंसारी की पत्नी आफशा के नाम 12 करोड़ 34 लाख 30 हजार रुपए की चल संपत्ति भी है। उनके पास 50 लाख रुपए के जवाहरात हैं। इसके अलावा 10 करोड़ 59 लाख व 850 रुपए का भवन है। आफशा के पास एक लाइसेंसी रिवाल्वर भी है।
अंसारी के दोनों बेटे हैं करोड़पति
मुख्तार अंसारी के दो बेटे हैं और दोनों ही करोड़पति हैं। दोनों बेटों के नाम 3 करोड़ 69 लाख रुपए की संपत्ति है। बेटे अब्बास के पास 2 करोड़ 20 लाख और दूसरे बेटे उमर के पास 1 करोड़ 45 लाख रुपए की जमीन है। अब्बास एक अंतर्राष्ट्रीय शूटर है और कई अंतर्राष्ट्रीय लेवल की शूटिंग प्रतिस्पर्धा में भी हिस्सा ले चुके हैं और कई खिताब भी अपने नाम किए हैं।












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