यहां मोदी मैजिक हुआ फेल, हर बार हारने वाले सपा के उज्जवल जीते
इलाहाबाद में एक सीट पर चौंकानेवाला रिजल्ट आया। यहां मोदी की लहर का असर नहीं दिखा। दो बार हार झेल चुके सपा प्रत्याशी उज्जवल जीत गए।
इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद की करछना विधानसभा सीट सपा के खाते में गई और यह इलाहाबाद की एकलौती ऐसी सीट है जहां सपा ने अपना खाता खोला है। सपा प्रत्याशी उज्ज्वल रमण सिंह यहां से चुनाव जीतने में सफल रहे। सबसे आश्चर्य की बात यह है कि करछना में मोदी मैजिक का असर ठीक उल्टा दिखा। बार-बार चुनाव हारने वाले उज्जवल मोदी लहर में भी जीत गये जबकि सपा लहर में उज्जवल खाता नहीं खोल पाते थे। सपा की लाज बचाने वाले उज्जवल ने इसी सीट पर लगातार दो चुनावों में पराजय झेलने के बाद जीते हैं।
मजेदार बात यह है कि उज्जवल को हार के बाद भी बार-बार टिकट दिया जाता रहा और आखिरकार इस सीट से समाजवादी पार्टी के उज्जवल रमण सिंह चुनाव जीतने में सफल रहे। उज्जवल ने कुल 80806 मत हासिल किये। जबकि दूसरे स्थान पर रहे भाजपा के पीयूष रंजन निषाद को 65782 मत मिले। उज्जवल ने पीयूष को 14808 मतों से पटखनी दी जबकि पिछले चुनाव में उज्जवल को हराने वाले दीपक 40998 मत के साथ तीसरे स्थान पर चले गए।

उज्जवल दुबारा बने विधायक
राजघराने के उज्जवल रमण सिंह की छवि आम जनता में सीधे एवं सर्वसुलभ नेता की है। 2005 में पहली बार विधायक बने। इसके बाद 2007 में कलेक्टर पांडेय ने उज्जवल रमण सिंह को लगातार दूसरी जीते दर्ज करने से रोक दिया । इस हार के बाद जब अगला चुनाव 2012 में हुआ तो सपा ने फिर से उज्जवल पर भरोसा जताया । लेकिन इस बार बसपा के दीपक पटेल ने उज्जवल को धूल चटा दी। उज्जवल की हार की हैट्रिक मोदी की सुनामी में तय मानी जा रही थी। लेकिन उज्जवल ने इस आंधी में अपना दीप जलाये रखा और न सिर्फ दीपक पटेल से हार का बदला ले लिया बल्कि भाजपा प्रत्याशी को हराकर झटका दिया।

उज्जवल को विरासत में मिली है सीट
करछना विधानसभा से उज्जवल रमण के पिता व सपा के कद्दावर नेता रेवती रमण सिंह सात बार विधायक रहे जबकि इलाहाबाद से दो बार सांसद भी चुने गये। 2005 में रेवती के सांसद चुने जाने के बाद रेवती ने अपने बेटे उज्जवल को इस विधानसभा सीट से मैदान में उतारा। रेवती के असर से उज्जवल जीत गये और कलेक्टर पांडेय को हराकर विधायक बने।
फिर शुरू हुआ हार का सिलसिला
रेवती लोकल राजनीति से दूर होते गये और करछना सीट पर उनका जादू खत्म होता गया। जिसका असर यह हुआ की उज्जवल के हार का सिलसिला शुरू हो गया जो बदस्तूर दो चुनाव तक चलता रहा। पहले कलेक्टर पाण्डेय ने और फिर दीपक पटेल ने उज्जवल को करारी शिकस्त दी ।

लालबत्ती भी मिली थी उज्जवल को
सपा के कद्दावर नेता रेवती के बेटे उज्जवल 2012 में चुनाव जीतते तो अखिलेश कैबिनेट में बड़े पद के दावेदार होते लेकिन उज्जवल चुनाव हार गये। रेवती के कद ने उज्जवल को मंत्री का दर्जा दिलवाकर लालबत्ती दिला दी । लेकिन अबकी चुनाव में जब सपा पूरे प्रदेश में साफ सी हो गई तो उज्जवल रमण सिंह ने जीत हासिल कर सबको चौंका दिया।
कैसे साधा आंकड़ा
करछना विधानसभा में आंकड़े के लिहाज से 50 हजार पटेल, 30 हजार यादव , 20 हजार भूमिहार, 40 हजार मुस्लिम, 40 हजार ब्राह्मण और 40 हजार अन्य जातियों के मतदाता हैं। उज्जवल के साथ इस बार रेवती ने भी चुनाव जिताने के लिये पूरी ताकत झोंक दी थी और खुद प्रचार करने मैदान में पहुंच गये थे। जिसका असर साफ देखने को मिला। पिता-पुत्र ने हर जातियों को पुराने दिनों की याद दिलाई और सबको साधकर जीत हासिल कर ली ।
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