IPS Avinash Pandey कौन हैं? वैन में घुसकर वकील को पीटा, Akhilesh Yadav के VIDEO शेयर करते ही सियासत गरमाई

Meerut SSP Avinash Pandey Video Viral: 16 मई को हुई एक छात्रा की हत्या के बाद शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन 22वें दिन यानी बुधवार (8 जुलाई) को मेरठ की सड़कों पर उस वक्त बेकाबू हो गया, जब पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच आमना-सामना हो गया। कुछ ही देर में लाठीचार्ज हुआ, दर्जनों लोगों को हिरासत में लिया गया और फिर एक ऐसा वीडियो सामने आया, जिसने पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति गरमा दी।

वीडियो में मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अविनाश पांडेय पुलिस वैन के अंदर एक व्यक्ति को थप्पड़ मारते नजर आए। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व CM अखिलेश यादव ने यही वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर कर यूपी सरकार और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए। दूसरी ओर, पुलिस का दावा है कि जिस व्यक्ति के साथ कार्रवाई हुई, वह प्रदर्शन की आड़ में माहौल बिगाड़ने आया था और उसका आपराधिक रिकॉर्ड भी है। आइए विस्तार से जानते हैं कि IPS अविनाश पांडेय कौन हैं? क्यों एक वकील को वैन में घुसकर पीटने को मजबूर हुए?

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Who Is IPS Avinash Pandey: कौन हैं मेरठ के SSP अविनाश पांडेय?

मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अविनाश पांडेय 2015 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। उनका मूल निवास उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में है। 3 फरवरी 1988 को जन्मे अविनाश पांडेय ने बीएससी तक की पढ़ाई की और 4 सितंबर 2015 को भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में शामिल हुए।

7 सितंबर 2018 को उन्हें एसपी (SP) रैंक की पुष्टि मिली। इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण से जुड़े अहम दायित्व निभाए। 4 फरवरी 2026 को उन्हें मेरठ का वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) नियुक्त किया गया। मेरठ जैसे संवेदनशील जिले में उनकी तैनाती के दौरान कई बड़े अपराधों के खुलासे और कानून-व्यवस्था से जुड़ी कार्रवाइयों को लेकर वह चर्चा में रहे हैं।

सेवा के दौरान बेहतर कार्य के लिए उन्हें दो बार पुलिस महानिदेशक (DGP) का कमेंडेशन डिस्क भी मिल चुका है। 15 अगस्त 2022 को उन्हें DG Commendation Disc Silver और 26 जनवरी 2025 को DG Commendation Disc Gold से सम्मानित किया गया। हालांकि, हाल ही में मेरठ में दलित छात्रा हत्याकांड को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और एक वायरल वीडियो के बाद अविनाश पांडेय सुर्खियों में आ गए।

Lalita Gautam Murder Case: आखिर ललिता गौतम हत्याकांड क्या है?

मेरठ में बीए की छात्रा ललिता गौतम की 16 मई को हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस मुख्य आरोपी समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। लेकिन पीड़ित परिवार और दलित संगठनों का आरोप है कि इस हत्याकांड में शामिल सभी लोगों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। इसी मांग को लेकर बुधवार (8 जुलाई) को कलेक्ट्रेट पर दलित महापंचायत बुलाई गई थी। कांग्रेस नेता हेमंत प्रधान, दलित समाज के प्रतिनिधि और कई सामाजिक संगठनों के लोग बड़ी संख्या में वहां पहुंचे। प्रशासन ने केवल ज्ञापन देने की अनुमति दी थी, लेकिन मेरठ के अलावा नोएडा, गाजियाबाद, हापुड़ और आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंच गए।

Meerut Crime News: कैसे बिगड़ा माहौल?

भीड़ बढ़ने पर पुलिस ने कलेक्ट्रेट का मुख्य गेट बंद कर दिया। इससे नाराज प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए और धरना शुरू कर दिया। देखते ही देखते सड़क पर लंबा जाम लग गया। करीब तीन घंटे तक पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद एसएसपी अविनाश पांडेय अतिरिक्त पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। यहीं से विवाद शुरू हुआ।

वायरल VIDEO में क्या दिखा?

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एसएसपी अविनाश पांडेय पुलिस वैन के अंदर जाते दिखाई देते हैं। इसके बाद वह हिरासत में बैठे एक व्यक्ति को थप्पड़ मारते नजर आते हैं। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि यह व्यक्ति नोएडा से आए अधिवक्ता रवि गौतम हैं। वीडियो सामने आने के बाद विपक्ष ने पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए।

Akhilesh Yadav ने क्यों शेयर किया VIDEO?

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने यह वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए और इसे लोकतांत्रिक विरोध की आवाज दबाने का उदाहरण बताया। वीडियो वायरल होने के बाद मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया।

वकील ने पुलिस पर क्या आरोप लगाए?

रवि गौतम का आरोप है कि हिरासत में लेने के बाद पुलिस वैन के अंदर उनके साथ मारपीट की गई। उनका कहना है कि एसएसपी स्वयं वैन में आए और उनके साथ हाथापाई की। इसी दौरान पुलिस वैन के अंदर रवि गौतम ने अपने गमछे का फंदा बनाकर आत्महत्या का प्रयास भी किया। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसके बाद पूरे घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया।

पुलिस का पक्ष क्या है?

मेरठ पुलिस का दावा है कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण नहीं था। एसएसपी अविनाश पांडेय के अनुसार कुछ बाहरी लोग प्रदर्शन में शामिल होकर माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस का कहना है कि नोएडा निवासी रवि गौतम (Ravi Gautam Advocate) और अमरोहा के जिला बदर अपराधी दिग्विजय सिंह भाटी भीड़ को उकसा रहे थे।

पुलिस के मुताबिक, रवि गौतम के खिलाफ पहले से हत्या समेत चार आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, जबकि दिग्विजय सिंह भाटी का भी आपराधिक इतिहास है। पुलिस का कहना है कि दोनों के खिलाफ इस मामले में भी नई एफआईआर दर्ज की जा रही है।

Meerut Police ने लाठीचार्ज क्यों किया?

पुलिस के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने मुख्य सड़क जाम कर दी थी, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी हो रही थी। कई दौर की बातचीत के बाद भी जब प्रदर्शनकारी नहीं हटे, तब कानून-व्यवस्था और यातायात बहाल करने के लिए बल प्रयोग किया गया। पुलिस ने करीब 50 से 60 लोगों को हिरासत में लिया, जिनमें लगभग 20 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है।

प्रदर्शनकारियों की क्या मांग थी?

प्रदर्शनकारी चार प्रमुख मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। उनकी मांग थी कि ललिता गौतम हत्याकांड के सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए, मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो, दोषियों को फांसी की सजा मिले और पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता के साथ सरकारी नौकरी दी जाए।

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