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नसीमुद्दीन को मायावती ने हाथी से पटका, जानिए बाहर करने की अंदरूनी वजहें

यूपी विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच नसीमुद्दीन सिद्दीकी को लेकर काफी विरोध हुआ था।

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने पार्टी के कद्दावर नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी को पार्टी से बाहर निकाल दिया है। बसपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सतीश चंद मिश्रा ने इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने के कारण नसीमुद्दीन सिद्दीकी और उनके बेटे अफजाल सिद्दीकी को पार्टी से बाहर कर दिया गया है।

कार्यकर्ताओं में था भारी विरोध

कार्यकर्ताओं में था भारी विरोध

यूपी विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद से ही नसीमु्द्दीन की कार्यशैली को लेकर बसपा कार्यकर्ताओं में विरोध था। कार्यकर्ताओं का आरोप था कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी कार्यकर्ताओं की बात ना तो सुनते हैं और ना उनकी बात मायावती तक पहुंचाते हैं। इस मुद्दे को लेकर पिछले दिनों यूपी के कई जिलों में बसपा कार्यकर्ताओं ने नसीमुद्दीन के पुतले भी जलाए।

टिकट बांटने में गड़बड़ी के आरोप

टिकट बांटने में गड़बड़ी के आरोप

नसीमुद्दीन पर यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट बांटने में गड़बड़ी करने के भी आरोप लगे। कई विधानसभा सीटों पर चार-चार बार प्रत्याशी बदले गए। कार्यकर्ताओं का कहना था कि ऐसा नसीमुद्दीन सिद्दीकी के इशारे पर किया गया, जिसका खामियाजा बसपा को विधानसभा चुनाव में हार के रूप में भुगतना पड़ा।

बेटे को आगे बढ़ाने की कोशिश

बेटे को आगे बढ़ाने की कोशिश

नसीमुद्दीन सिद्दीकी के बेटे अफजाल सिद्दीकी को लेकर भी पार्टी में विरोध था। कार्यकर्ताओं का आरोप था कि नसीमुद्दीन अपने बेटे को आगे बढ़ाने के लिए पुराने कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर रहे हैं। कार्यकर्ताओं का कहना था कि अफजाल सिद्दीकी का पार्टी में कोई योगदान नहीं है, फिर भी उन्हें आगे बढ़ाया जा रहा है। ये भी पढ़ें- तो ये है असली वजह जिसके चलते सपा से गठबंधन को तैयार हैं मायावती

कार्यकर्ताओं को बांधे रखने का प्रयास

कार्यकर्ताओं को बांधे रखने का प्रयास

यूपी विधानसभा चुनाव में हार के बाद मायावती ने पार्टी में कई बड़े फेरबदल किए हैं। पार्टी के पुराने नेताओं को फिर से बसपा में लाया गया है। निकाय चुनाव में भी एक बड़ी रणनीति के तहत बसपा लंबे समय बाद पार्टी के चुनाव चिन्ह पर मैदान में उतर रही है। नसीमुद्दीन को भी इसी रणनीति के तहत पार्टी से निकाला गया है ताकि नाराज कार्यकर्ताओं को पार्टी से जोड़ा जा सके।

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