प्रदेश में सबसे कम महिलाओं को टिकट देने वाली पार्टी बनी बसपा
उत्तर प्रदेश में पांच सबसे बड़ी पार्टियों में सबसे कम महिला उम्मीदवारों को टिकट देने वाली पार्टी बनी बसपा, सिर्फ 5 फीसदी उम्मीदवारों को मिला टिकट
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती खुद एक महिला हैं लेकिन आपको जानकर यह आश्चर्य होगा कि महिलाओं को टिकट देने के मामले में मायावती अन्य पार्टियों से सबसे पीछे हैं। यूपी विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं लेकिन मायावती ने अपनी पार्टी में सिर्फ 5 फीसदी महिलाओं उम्मीदवारों को टिकट दिए हैं। मायावती ने अन्य पार्टियों की तुलना में सबसे कम सिर्फ 21 महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है। यही नहीं बसपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में एक भी महिला सदस्य नहीं है, इसके अलावा बसपा में किसी भी महिला को जिला अध्यक्ष या कोऑर्डिनेटर नहीं बनाया गया है।

मायावती ने खत्म किया महिला मोर्चा
पार्टी सूत्रों का कहना है कि पार्टी के भीतर महिला मोर्चा की शुरुआत काशीराम ने की थी, लेकिन उसे मायावती ने खत्म कर दिया, मौजूदा विधानसभा में बसपा के सिर्फ तीन विधायक हैं, जिसमें से सिर्फ एक ही महिला विधायको पार्टी ने टिकट दिया है। मायावती ने इस बार रजनी तिवारी जोकि सवाजीपुर से विधायक हैं और हेमलता चौधरी जो बागपत से विधायक हैं को इस बार टिकट नहीं दिया गया है। जिसके चलते रजनी तिवारी ने भाजपा का दामन थाम लिया है। वहीं हेमलता चौधरी के पति प्रशांत चौधरी को गढ़ मुक्तेश्वर से टिकट दिया गया है। तीसरी महिला विधायक पूजा पाल जोकि इलाहाबाद पश्चिम से विधायक हैं को फिर से टिकट दिया गया है। लेकिन इनमे से कोई भी महिला दलित नहीं है। वहीं अगर मायावती को छोड़ दें को पिछली सरकार में उनके अलावा सिर्फ एक ही महिला को उन्होंने मंत्रीपद दिया था।

मायावती से मिलना काफी मुश्किल
राज्य खादी एवं ग्रामीण उद्योग मंत्री ओमवती देवी का कहना है कि मायावती से मिलना काफी मुश्किल था, पांच साल के कार्यकाल के दौरान मैं उनसे सिर्फ एक या दो बार ही मिल पाई, मैंने अपने विभाग का प्रोजेक्ट उन्हें दिया था लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और अधिकारियों ने मुझसे इसे जमा कराने को कहा। लेकिन जब मैं 2012 में चुनाव हार गई तो उन्होंने मुझे बिना वजह पार्टी से निष्कासित कर दिया। बिजनौर की नगीना सीट से वह चार बार की विधायक थीं जोकि दलित के लिए आरक्षित सीट थी। 2014 में उन्होंने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था।

सिर्फ अपनी जाति के लोगों से मिलती हैं मायावती
लखीमपुर खीरी की श्रीनगर सीट से दो बार की विधायक मायावती का कहना है कि उन्हें पार्टी की ओर से कभी मदद नहीं मिली, 1996 व 2002 में उन्हें मुश्किल से ही पार्टी की ओऱ से कोई मदद मिली थी फिर भी वह चुनाव जीती थी। 2009 के लोकसभा चुनाव के बाद मैंने पार्टी छोड़ दी क्योंकि मेरी बात को नहीं सुना जाता था, मैंने मायावती जी से मिलने की कोशिश की थी लेकिन वह मुझसे नहीं मिली, उन्होंने पार्टी कोऑर्डिनेटर की बात के आधार के पर ही अपने फैसले लिए, वह सिर्फ अपनी ही जाति के लोगों की बात को सुनती हैं। मायावती ने 2012 में कांग्रेस की सीट से चुनाव लड़ा लेकिन इसमें वह जीत हासिल नहीं कर सकीं।

दलित महिला उम्मीदवारों को मिलता है मायावती का साथ
वहीं दूसरी तरफ मीरा गौतम जोकि 2007 में फतेहपुर से चुनाव लड़ी और जीती, उनका कहना है कि मायावती ने उनका काफी साथ दिया और काफी मदद की। उन्होंने कहा कि वह बसपा के साथ 1995 से जुड़ी हैं, मैं समाजसेवा करना चाहती थी, लेकिन मेरे परिवार में कोई भी राजनीति में नहीं था, लेकिन मायावती ने मेरा साथ दिया, जिसके बाद मैंने लखनऊ में कैंट विधानसभा क्षेत्र में समाजसेवा का काम शुरु किया। उन्होंने 2007, 2012 और इस बार भी मुझसे चुनाव लड़ने को कहा। वहीं दूसरी दलित महिला और पूर्व विधायक विद्या चौधरी का कहना है कि उन्हें भी मायावती का साथ मिला। उन्होंने पहली बार 1996 में चुनाव लड़ा था लेकिन वह हार गई थीं। लेकिन 2002 व 2007 में जीत हासिल की थी और 2012 में वह चुनाव हार गाई थीं। उनका कहना है कि मैं लंबे समय से पार्टी में हूं और बहनजी ने मेरा बहुत साथ दिया। विद्या चौधरी ने बीएचयू से राजनीति शास्त्र में एमए किया और कुछ समय तक सिविल सेवा की तैयारी की थी।












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