भारत बंदः बीमार पिता को कंधे पर उठाकर अस्पताल पहुंचा बेटा तब तक थम चुकी थी सांसें
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बिजनौर। अनुसूचित जाति-जनजाति कानून में बदलाव के विरोध में सोमवार को बुलाया गया 'भारत बंद' हिंसक हो गया। इस हिंसा में जहां प्रदर्शन के दौरान कई लोगों की जान गई वहीं समय पर इलाज ना मिल पाने के कारण कई मरीजों की मौत हो गई। दलित आंदोलन का सबसे अधिक असर पश्चिम यूपी में देखने को मिला। बिजनौर में हो रहे हिंसक प्रदर्शन में समय पर इलाज ना मिल पाने के कारण एक वृद्ध व्यक्ति की मौत हो गई। पिता की जान बचाने के लिए बेटा पिता को कंधों पर लादकर एक किमी तक पैदल अस्पताल लेकर गया। तब तक 60 वर्षीय लोकमण ने दम तोड़ दिया।

परिजन करीब 20 मिनट तक प्रदर्शनकारियों के आगे गिड़गिड़ाते रहे
बिजनौर के गांव बरूकी निवासी लोकमण अस्थमा से पीड़ित थे और जिला अस्पताल में भर्ती थे। सोमवार को हालत बिगड़ने पर चिकित्सकों ने उन्हें रेफर कर दिया। परिजन उन्हें शास्त्री चौक पर एक निजी चिकित्सक के यहां लेकर आ रहे थे। लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उनकी एंबुलेंस को रोक लिया। परिजन करीब 20 मिनट तक प्रदर्शनकारियों के आगे गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन उन्होंने एंबुलेंस को नहीं निकलने दिया।

कंधे पर उठाकर अस्पताल पहुंचा बेटा
करीब दो घंटे तक जाम में फंसे रहने के बाद हालत बिगड़ती देखकर उनका मंझला बेटा राजू उनको कंधे पर उठाकर अस्पताल के लिए चल दिया। परिजनों का आरोप है कि राजू को धकेलकर जमीन पर गिरा दिया। जैसे-तैसे भीड़ के आक्रोश से बचाकर परिजन लोकमण को लेकर निजी अस्पताल पहुंचे। लेकिन तब तक लोकमान की सांसे थम चुकी थीं। लोकमान की पत्नी विमला देवी प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंची और फूट फूटकर रोईं लेकिन दंगाईयों ने उनकी एक ना सुनी।

अगर आज जाम नहीं होता तो मेरी पति की जान बच जाती
विमला देवी ने कहा कि प्रदर्शनकारियों की वजह से उनके पति की मौत हुई है। किसी के साथ कोई संवेदना नहीं दिखाई। अगर आज जाम नहीं होता तो मेरी पति की जान बच जाती। आज मैं अगर मेरे माथे का सिंदूर उजड़ा है, तो उसका जिम्मेदार है यह जाम।
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