Mahakumbh 2025: अग्निकांड के 10 दिन बाद महाकुंभ फिर हादसे का शिकार, शाही स्नान में भगदड़ से 15 की मौत! कई घायल
Mahakumbh Mauni Amavasya Stampede: प्रयागराज के दूसरे अमृत स्नान मौनी अमावस्या के मौके पर महाकुंभ में भारी भीड़ उमड़ी, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। इस घटना में दर्जनों श्रद्धालु घायल हो गए और कई परिवार एक-दूसरे से बिछड़ गए। पुलिस और प्रशासन ने तुरंत हालात संभालने की कोशिश की, लेकिन भीड़ का दबाव इतना ज्यादा था कि लोगों को संभालना मुश्किल हो गया।
हिंदुस्तान टाइम्स (एचटी) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भगदड़ में 15 लोगों की मौत खबर सामने आ रही है। हालांकि, अभी तक अधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मौनी अमावस्या के दिन संगम में 10 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु पवित्र स्नान करने पहुंचे। त्रिवेणी संगम पर स्नान के दौरान अचानक भीड़ अनियंत्रित हो गई, जिससे श्रद्धालुओं के बीच अफरा-तफरी मच गई। इस भगदड़ में कई लोग घायल हो गए, जबकि कुछ अपने परिवार से बिछड़ गए। यह हादसा उस वक्त हुआ जब महाकुंभ में हाल ही में 19 जनवरी 2025 को सिलेंडर ब्लास्ट से आग लगने की घटना सामने आई थी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, संगम नोज के पोल नंबर 11 और 17 के बीच यह घटना हुई। भगदड़ की खबर मिलते ही मौके पर एंबुलेंस पहुंची और घायलों को सेक्टर-2 में बने अस्थायी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
अखाड़ा परिषद ने लिया बड़ा फैसला
इस अप्रिय घटना के बाद अखाड़ा परिषद ने मौनी अमावस्या पर होने वाले 'अमृत (शाही) स्नान' में भाग न लेने का फैसला किया है। प्रशासन लगातार श्रद्धालुओं से अपील कर रहा है कि स्नान के बाद जल्द से जल्द घाटों को खाली करें ताकि भीड़ नियंत्रित की जा सके।
प्रत्यक्षदर्शियों ने क्या बताया?
कर्नाटक से आईं श्रद्धालु सरोजिनी ने बताया कि वे 60 लोगों के एक समूह के साथ आई थीं। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि धक्का-मुक्की शुरू हो गई और उनका समूह फंस गया। उन्होंने बताया कि कई लोग गिर पड़े, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। हालांकि, प्रशासन ने अभी तक घायलों की सही संख्या की पुष्टि नहीं की है, लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार 30 से 40 लोग घायल हुए हैं।
प्रशासन ने किए कड़े इंतजाम, फिर भी क्यों हुई भगदड़?
उत्तर प्रदेश सरकार ने पहले ही भीड़ नियंत्रण के लिए कड़े नियम लागू किए थे। नो-व्हीकल ज़ोन और सेक्टर-वार प्रतिबंध लगाए गए थे, ताकि श्रद्धालुओं की आवाजाही सुचारू रूप से हो। लेकिन उम्मीद से ज्यादा लोगों के आने और श्रद्धालुओं की अधीरता के कारण यह स्थिति बन गई।
मौनी अमावस्या का धार्मिक महत्व
मौनी अमावस्या हिंदू धर्म में बेहद पवित्र मानी जाती है। इसे आत्मशुद्धि और मोक्ष प्राप्ति का विशेष दिन माना जाता है। इस दिन त्रिवेणी संगम में स्नान करने से पुण्य मिलता है और पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।
जगतगुरु साईं मां लक्ष्मी देवी ने इस दिन को आध्यात्मिक विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस दिन मौन व्रत रखने और ध्यान करने से आत्मा की शुद्धि होती है।
क्या आगे हालात सुधरेंगे?
प्रशासन ने अब भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बढ़ा दी है और लगातार लोगों से संयम बनाए रखने की अपील कर रहा है। अगले कुछ घंटों में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है।












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