Magh Mela Dispute: 'केशव प्रसाद को CM होना चाहिए', माघ मेला विवाद के बीच अविमुक्तेश्वरानंद ने सरकार को घेरा
Magh Mela Avimukteshwaranand Dispute: संगम नगरी प्रयागराज में मौनी अमावस्या के अवसर पर शुरू हुआ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन का विवाद शांत होने के बजाय और गहराता जा रहा है। अपनी मांगों और प्रशासन के व्यवहार के विरोध में शंकराचार्य अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठे हैं।
ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला प्रशासन के बीच उपजा विवाद अब सियासी मोड़ ले चुका है। शंकराचार्य ने न केवल प्रशासन के खिलाफ अपना मोर्चा जारी रखा है, बल्कि डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की तारीफ करते हुए उन्हें मुख्यमंत्री पद के लिए अधिक योग्य बताकर नई चर्चा छेड़ दी है।

Avimukteshwaranand vs Administration: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने क्या कहा?
हाल ही में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा था कि शंकराचार्य को स्नान कर लेना चाहिए और परंपराओं का सम्मान होना चाहिए। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- केशव प्रसाद मौर्य एक बेहद समझदार व्यक्ति हैं। उन्होंने जो बयान दिया, वह उनकी परिपक्वता को दर्शाता है। वे मानते हैं कि उनके अधिकारियों से कहीं न कहीं गलती हुई है।
भाजपा को केशव मौर्य जैसे समझदार व्यक्ति को ही मुख्यमंत्री बनाना चाहिए था, अगर ऐसा होता तो प्रदेश का भला होता। शंकराचार्य के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि इसे सीधे तौर पर वर्तमान नेतृत्व से जोड़कर देखा जा रहा है।
वसंत पंचमी पर भी नहीं किया स्नान
प्रशासन के अड़ियल रवैये के विरोध में शंकराचार्य ने मौनी अमावस्या के बाद अब चौथे प्रमुख स्नान पर्व बसंत पंचमी पर भी गंगा स्नान नहीं किया। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक प्रशासन ससम्मान उन्हें गंगा स्नान नहीं कराता और भविष्य के लिए लिखित या औपचारिक घोषणा नहीं करता, उनका यह मौन विरोध और धरना जारी रहेगा।
इस विवाद पर पुरी स्थित गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अविमुक्तेश्वरानंद का पक्ष लेते हुए कहा कि, शंकराचार्य की इच्छा पर कोई अंकुश नहीं लगा सकता। प्रशासन यह तय नहीं कर सकता कि शंकराचार्य पालकी से उतरकर पैदल जाएं या पालकी पर चढ़कर। उन्होंने साफ किया कि धर्मगुरुओं की अपनी मर्यादा और परंपरा होती है, जिसका सम्मान करना प्रशासन का दायित्व है।
स्वास्थ्य को लेकर चिंता, लेकिन संकल्प अडिग
कड़ाके की ठंड और खुले में बैठने के कारण शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के स्वास्थ्य को लेकर भी सवाल उठे। इस पर उन्होंने कहा, "पूरब की सर्द हवाओं के कारण शरीर में थोड़ी थकान और शिथिलता आई थी, लेकिन कंबल ओढ़कर मैंने स्वयं को बचा लिया। अब मैं स्वस्थ हूं और मेरा संकल्प पहले की तरह ही दृढ़ है।"
विवाद की शुरुआत मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान हुई थी, जब प्रशासन ने सुरक्षा और रूट का हवाला देकर शंकराचार्य के काफिले या पालकी को लेकर कुछ प्रतिबंध लगाए थे। शंकराचार्य का आरोप है कि प्रशासन ने परंपराओं का उल्लंघन किया और उन्हें उचित सम्मान नहीं दिया।












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