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यूपी में सपा ने मिलाया कांग्रेस से हाथ, अब कहां जाएगा बसपा का वोटर? भाजपा ने बदल दिया प्लान

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीटें फाइनल होने के बाद नया समीकरण बनने की संभावना पैदा भी हुई है। कांग्रेस की ओर से अबतक बार-बार बसपा के साथ भी तालमेल के संकेत मिल रहे थे। लेकिन, अब यह साफ हो चुका है कि मायावती की घोषणा के मुताबिक बीएसपी प्रदेश में किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं रहेगी।

भारतीय जनता पार्टी को इन परिस्थितियों में अपने लिए एक बड़ा अवसर दिख रहा है। दलित वोट बैंक का मजबूत साथ पाने की जिस योजना पर वह पहले से ही काम कर रही थी, अब उसे इसका एक नया आधार मिल गया है।

up bsp voter

भाजपा को बढ़ी दलित वोटरों से उम्मीद
80 लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश में बीजेपी इस बार सभी सीटें जीतने का लक्ष्य लेकर चल रही है। बहुत हद तक यह तभी संभव है, जब 20% दलित वोट बैंक का बड़ा हिस्सा उसकी तरफ झुक जाए। परंपरागत रूप से यूपी में दलित वोटर बहुजन समाज पार्टी के समर्थक रहे हैं।

ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी को आंतरिक गुना गणित के आधार पर लगता है कि गठबंधन के अभाव में बीएसपी के ज्यादातर वोटरों को विकल्प की तलाश रहेगी और उसके लिए भाजपा खुद को सबसे ज्यादा उपयुक्त समझ रही है।

पिछले चुनावों में बीएसपी का घटा है जनाधार
वैसे यूपी में बसपा के जनाधार में पिछले दो चुनावों में भारी गिरावट देखी गई है और इसी से यह बात सामने आ रही है कि उसके वोटर अब नया विकल्प भी खोज सकते हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में बीएसपी का वोट शेयर 19.43% था और 2022 के विधानसभा चुनाव में यह सिर्फ 13% रह गया।

मोदी सरकार की योजनाओं पर भाजपा को वोट मिलने का भरोसा
भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष लाल सिंह आर्या के मुताबिक, 'अनुसूचित जाति को मोदी सरकार की योजनाओं से अधिकतम लाभ मिला है। सरकार की नीतियां अनुसूचित जाति के लोगों के कल्याण को दिमाग में रखकर तैयार की गई हैं।'

उन्होंने कहा, 'अगर आप हालिया विधानसभा चुनावों (एमपी,राजस्थान और छत्तीसगढ़) को देखेंगे तो अनुसूचित जाति के लोगों ने बीजेपी को बड़ी संख्या में वोट दिए हैं। अब हमारा काम है कि हम अनुसूचित जाति के मतदाताओं को विश्वास दिलाएं कि बीजेपी उनकी स्वाभाविक और पहली पसंद होनी चाहिए।'

'बस्ती संपर्क अभियान' चलाएगी बीजेपी
इसके लिए भाजपा का अगला प्लान तैयार है। 23 फरवरी को संत रविदास जयंती से भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा राज्य के विभिन्न हिस्सों में 'बस्ती संपर्क अभियान' शुरू करने जा रहा है।

23 तारीख को खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी पहुंचने का कार्यक्रम है, जहां वह संत रविदास जयंती पर आयोजित समारोह में शामिल होंगे।

'बस्ती संपर्क अभियान' के तहत भाजपा नेता आसपास की दलित आबादी वाले इलाकों में जाएंगे और मोदी सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की चर्चा करेंगे और उनके क्षेत्र के विकास के लिए आगे का रोडमैप बताएंगे।

आगरा में राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करेगी भाजपा
मार्च में आगरा में बीजेपी अनुसूचित जाति मोर्चा एक राष्ट्रीय सम्मलेन आयोजित करने जा रहा है, जिसमें विभिन्न राज्यों से पार्टी के दलित नेताओं समेत केंद्रीय मंत्री हिस्सा लेंगे। इस सम्मेलन में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी भाग लेंगे।

आगरा को चुने जाने के पीछे भी खास वजह है। पश्चिमी यूपी के इस क्षेत्र में दलित आबादी बहुतायत में है और 2019 के लोकसभा चुनाव में बीएसपी उम्मीदवार को इस सुरक्षित सीट पर 38% वोट भी मिले थे।

2019 में 10 सीटें जीती थी बीएसपी
बता दें कि बसपा सुप्रीमो मायावती ने स्पष्ट किया है कि वह न तो विपक्षी इंडिया ब्लॉक में शामिल होंगी और न ही सत्ताधारी एनडीए गठबंधन के साथ जुड़ेंगी।

पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी ने सपा के साथ गठबंधन किया था और 10 सीटें जीत गई थी। लेकिन, 2014 में गठबंधन के बगैर पार्टी को एक भी सीट पर सफलता नहीं मिल सकी थी।

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