क्या तय हो चुका है राष्ट्रपति पद के लिए आडवाणी का नाम, जानिए चयन का पूरा गणित
भारत में राष्ट्रपति के चुनाव की पूरी प्रक्रिया, क्या होती है सांसदों और विधायकों की भूमिका, लाल कृष्ण आडवाणी का नाम लगभग तय
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में प्रचंड बहुमत के बाद भारतीय जानता राष्ट्रपति पद के लिए होने वाले चुनाव में अपने उम्मीदवार को मैदान में उतारने की पूरी तैयारी कर रही है। भाजपा एआईएडीएमके और बीजेडी का समर्थन मिलने के बाद भाजपा अपनी पसंद का राष्ट्रपति चुन सकती है। जुलाई माह में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के कार्यकाल खत्म हो रहा है लिहाजा नए राष्ट्रपति का चुनाव इससे पहले हो जाएगा, लेकिन जो सबसे बड़ा सवाल है वह यह कि क्या लाल कृष्ण आडवाणी भाजपा के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार हैं।

तकरीबन तय हो चुका है लाल कृष्ण आडवाणी का नाम
भाजपा का राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार कौन होगा इसपर अभी तक कोई निर्णायक फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन मीडिया के हवाले से जो खबरें आ रही हैं उसके अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद लाल कृष्ण आडवाणी का नाम देश के राष्ट्रपति पद के तौर पर आगे किया है, उन्होंने गुजरात में हाल ही में हुई बैठक में आडवाणी के नाम को आगे किया। हालांकि पीएम के इस प्रस्ताव का अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

जून में शुरु होगी चुनाव प्रक्रिया
सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रपति के उम्मीदवार के नाम पर फैसला लिया जा चुका है, इसके लिए कई नामों पर चर्चा हो रही थी, लेकिन इस मंथन में तमाम नामों पर उस वक्त विराम लग गया जब खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आडवाणी के नाम का प्रस्ताव रखा। हालांकि इसपर अंतिम फैसला जून माह में लिया जाएगा जब राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव की प्रक्रिया शुरु होगी।

भाजपा को जरूरत है एआईएडीएमके व बीजेडी की
यूपी और उत्तराखंड में प्रचंड जीत के बाद भाजपा और उसके सहयोगी दलों के पास कुल 5.32 लाख निर्वाचक मंडल का समर्थन प्राप्त है, यह आंकड़ा सिर्फ 17500 से दूर है, ऐसे में अगर भाजपा को बीजेडी और एआईएडीएमके का समर्थन प्राप्त होता है तो भाजपा के पास कुल 628195 विधायिकाओं का समर्थन प्राप्त हो जाएगा जोकि राष्ट्रपति के चयन के लिए पर्याप्त है। राष्ट्रपति के चयन के लिए कुल 549442 निर्वाचक मंडल की आवश्यकता होती है।

राष्ट्रपति के चुनाव में अहम किरदार
निर्वाचक मंडल में कुल 4896 विधायक होते हैं, जिसमें लोकसभा व राज्यसभा के कुल 776 सदस्य और 4120 विधायक शामिल होते हैं, वहीं राष्ट्रपति के चुनाव में राज्य के एमएलसी की कोई भूमिका नहीं होती है और इन्हें वोट करने का अधिकार नहीं होता है।

क्या कीमत होती है सांसदों व विधायकों के वोट की
लोकसभा और राज्यसभा के हर सदस्य के वोट की कुल कीमत 708 होती है, वहीं विधायकों के मत की कीमत उनके प्रदेश की आबादी पर निर्भर करती है, विधायक के वोट की अधिकतम कीमत 1000 हो सकती है, लेकिन यूपी में विधायकों के वोट की कीमत 209 होती है, सिक्किम के विधायकों के वोट की कीमत सबसे कम 7 होती है।

क्या है भाजपा का गणित
मौजूदा समय में भाजपा व उसके समर्थकों के कुल वोट की कीमत 5,31,954 है, ऐसे में भाजपा को इसके अलावा 17,488 और वोटों की जरूरत पड़ेगी, जिसमें अहम भूमिका बीजेडी और एआईएडीएमके निभा सकते हैं। एआईएडीएमके के 134 विधायकों के वोट की कुल कीमत 23,584 है, जबकि एआईएडीएमके के कुल 50 सांसदों के वोट की कीमत 35400 है, वहीं बीजेडी के कुल 28 विधायकों की कीमत 17,433 है जबकि सांसदों के वोट की कीमत 19,824 है।












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