कमल नौका यात्रा: यूपी में चुनावी बेड़ा पार करने की भाजपा की नई रणनीति के बारे में जानिए
लखनऊ, 11 नवंबर: उत्तर प्रदेश के चुनाव में निषाद समाज के बीच संपर्क बढ़ाने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने 'कमल नौका यात्रा' शुरू की है। प्रदेश में पिछले लोकसभा चुनाव से ही बीजेपी का निषाद पार्टी से तालमेल है, ऐसे में भाजपा की ओर से शुरू हुई इस यात्रा का खास मकसद है। वह सिर्फ निषाद पार्टी के भरोसे नहीं रहना चाहती है, उसकी सहायता से इस समाज की विभिन्न जातियों के बीच खुद अपनी भी पैठ बनाना चाहती है। फिलहाल प्रदेश में इस तरह की पांच यात्राओं की योजना है, जिसमें दो कानपुर और प्रयागराज में गंगा यात्रा से शुरू भी हो चुकी है।

'कमल नौका यात्रा' का लक्ष्य
2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में निषाद समाज का समर्थन जुटाने के लिए बीजेपी ने 'कमल नौका यात्रा' के नाम से एक अभियान शुरू किया है। बता दें कि यूपी में निषाद समाज में नदियों पर निर्भर 22 प्रमुख उप-जातियां हैं, जिसमें निषाद, कश्यप और केवट जैसी जातियां प्रमुख हैं। इन जातियों की आजीविका मुख्य रूप से नदियों पर विभिन्न तरीकों से निर्भर रही है। 'कमल नौका यात्रा' से भारतीय जनता पार्टी प्रदेश में नदियों के किनारे बसे इस समाज तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। भाजपा के प्रदेश महासचिव अश्विनी त्यागी ने कहा है कि इन यात्राओं का लक्ष्य उन लोगों से संपर्क बनाना है जो ' नदियों से अपनी आजीविका चलाते हैं।'

प्रयागराज और कानपुर से शुरू हुई यात्रा
'कमल नौका यात्रा' के दौरान मछुआरे और केवट समाज के सदस्य नावों के जरिए नदि मार्ग से यात्रा करेंगे और नदियों के किनारे बसे राजनीतिक तौर पर सजग इस समाज तक पार्टी की ओर से उनके लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देंगे। कुल मिलाकर पांच जगहों से यह यात्रा आयोजित होगी। इनमें से दो यात्राएं तो पहले ही शुरू भी हो चुकी हैं। ये यात्राएं फिलहाल प्रयागराज और कानपुर में गंगा घाटों से रवाना हुई हैं। तीन यात्राएं और शुरू होनी हैं, जिनमें बदायूं में कछला नदी में और वाराणसी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गढ़ मुक्तेश्वर से गंगा नदी में। त्यागी के मुताबिक 'वर्षों से बीजेपी सरकार ने इस समाज के लिए कई तरह के पहल शुरू किए हैं और स्वाभाविक तौर पर इस आइडिया के पीछे इस समाज को उनके लिए उठाए गए कदमों के प्रति जागरूक करना है।'

निषाद समाज के बीच खुद की मौजूदगी चाहती है भाजपा
गौरतलब है कि बीजेपी ने प्रदेश में संजय निषाद की निषाद पार्टी के साथ गठबंधन किया है और उन्हें हाल ही विधान परिषद की सदस्यता मिली है। उनके बेटे प्रवीण निषाद मौजूदा लोकसभा में संत कबीर नगर से भाजपा के टिकट पर चुने हुए सांसद हैं। लेकिन, संजय निषाद का अगला सियासी दांव क्या होगा, इसको लेकर बीजेपी निश्चिंत नहीं है। हाल ही में उन्होंने भगवान राम के जन्म को लेकर एक आपत्तिजनक बयान देकर विपक्ष को भाजपा के खिलाफ बोलने का मौका दे दिया है। शायद यही वजह है कि पार्टी 'कमल नौका यात्रा' के जरिए निषाद समाज के बीच अपना प्रभाव बनाए रखना चाहती है।

यूपी में निषादों का किन इलाकों में है प्रभाव ?
उत्तर प्रदेश के पूरे पूर्वांचल इलाके में निषादों का प्रभाव माना जाता है। जौनपुर से लेकर योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर तक और बलिया से लेकर पीएम मोदी के चुनाव क्षेत्र वाराणसी तक उनकी अच्छी-खासी आबादी है। यही नहीं यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भगवान राम और निषादराज (इस समुदाय के प्राचीन राजा) के गले मिलने वाली 51 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित करने की दिशा में भी काम शुरू कर दिया है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक भगवान राम जब माता सीता और लक्ष्मण के साथ वनवास जा रहे थे तो निषादराज ने ही उन्हें नदी पार करने में सहायता की थी। (पहली तस्वीर सौजन्य-यूपी के मंत्री महेंद्र सिंह और दूसरी बीजेपी यूपी के ट्विटर हैंडल से)












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