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Kairana Bypoll Result: जाटों ने क्‍यों निकाला बीजेपी पर गुस्‍सा, पढ़ें 3 कारण

By Yogender Kumar
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    कैराना। राष्‍ट्रीय लोकदल प्रत्‍याशी और महागठबंधन का समर्थन लेकर कैराना उपचुनाव में उतरी तबस्‍सुम हसन ने बीजेपी की उम्‍मीदवार मृगांका सिंह बड़े अंतर से हरा दिया है। यूपी में फूलपुर, गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में हार के बाद कैराना में योगी आदित्‍यनाथ की तीसरी अग्निपरीक्षा थी, जिसमें वह फेल हो गए। कैराना में योगी और बीजेपी की हार में सबसे बड़ा फैक्‍टर साबित हुए जाट। 2014 में भाजपा उम्मीदवार हुकुम सिंह को 5.65 लाख वोट मिले थे। वहीं, सपा, बसपा और रालोद के उम्मीदवारों को क्रमश: 3.29 लाख, 1.60 लाख और 42 हजार वोट मिले थे। मुजफ्फरनगर दंगों के बाद कैराना समेत पूरी पश्चिमी यूपी में जाट बीजेपी के पाले में चले गए थे। लेकिन हुकुम सिंह की मौत के बाद 2018 में हुए कैराना उपचुनाव में जाट बीजेपी से छिटक गए। डालिए उन कारणों पर एक नजर, जिनकी वजह से बीजेपी को झेलना पड़ा जाटों का गुस्‍सा।

    Kairana Bypoll Result: जाटों ने क्‍यों निकाला बीजेपी पर गुस्‍सा, पढ़ें 3 कारण

    जाटों को रास नहीं आया आरक्षण के मुद्दे पर बीजेपी का मौन

    2014 में चुनाव से ऐन पहले ने एक दांव खेला था- जाटों को आरक्षण देने का। लेकिन आरक्षण देने वाली यूपीए सरकार 2014 लोकसभा चुनाव के बाद केंद्र की सत्‍ता में नहीं लौटी। बीजेपी पूर्ण बहुमत के साथ केंद्र की सत्‍ता में आई और नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। उधर, सुप्रीम कोर्ट ने जाटों को आरक्षण देने पर रोक लगा दी। 2014 लोकसभा चुनाव के बाद जाट बहुल राज्‍यों- हरियाणा, उत्‍तर प्रदेश और राजस्‍थान में भी बीजेपी ने जीत का परचम लहराया। यूपी में तो जाटों ने आंख मूंदकर बीजेपी को वोट दिया, लेकिन 4 साल बीत जाने के बाद बीजेपी जाट आरक्षण को लेकर गोल-मोल बातें कर रही। हरियाणा में तो जाट आरक्षण का ऐसा तूफान आया कि हजारों करोड़ की संपत्ति जलकर खाक हो गई। जैसे-तैसे सीएम मनोहर लाल खट्टर की कुर्सी बची। कैराना लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी को इसकी कीमत चुकानी पड़ी है। संभव है कि बीजेपी को 2019 में भी जाटों के गुस्‍से का सामना करना पड़े।

    गन्‍ने के बकाया ने जाटों को किया बीजेपी से दूर

    कैराना लोकसभा उपचुनाव से पहले गन्‍ना और जिन्‍ना की जोरदार चर्चा हुई। कैराना में उपचुनाव के लिए मतदान से ऐन पहले पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्‍यनाथ ने एक के बाद अपने संबोधन में गन्‍ना किसानों पर जमकर डोरे डाले थे। पीएम और सीएम ने गन्‍ना किसानों के भुगतान को लेकर कई वादे भी किए, लेकिन कैराना में सरकार के वादे से ज्‍यादा विपक्ष के सवाल जनता को ज्‍यादा पसंद आ गए। गन्‍ना किसानों का यूपी सरकार पर करीब 13000 करोड़ रुपये का बकाया है। चूंकि, पश्चिमी यूपी में ज्‍यादा हिंदू जाट-मुस्लिम मूले जाटों का मुख्‍य रोजगार कृषि है और पश्चिमी यूपी में ज्‍यादातर किसान गन्‍ना की पैदा करते हैं। ऐसे में गन्‍ना बकाया कैराना लोकसभा चुनाव में बड़ा मुद्दा बन गया और जाट बीजेपी से दूर होते चले गए।

    चौधरी चरण को भारत रत्‍न के नाम पर बीजेपी साधे रही चुप्‍पी

    चौधरी चरण सिंह को भारत रत्‍न देने की मांग पर बीजेपी लगभग गोल कर गई। हालांकि, चरण सिंह की पुण्‍यतिथि पर जरूर बीजेपी ने पश्चिमी यूपी में कार्यक्रम आयोजित कराए, लेकिन वह ऐसा कोई कदम नहीं उठा सकी, जिससे चौधरी चरण सिंह के पारंपरिक वोटर को गर्व महसूस हो। खास बात यह है कि 2014 लोकसभा और 2017 यूपी विधानसभा चुनाव में जाटों ने बीजेपी को बंपर वोट दिया, लेकिन जाटों के नायक को भारत रत्‍न की मांग पर मोदी सरकार की ओर से कोई सकारात्‍मक जवाब नहीं आया।

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    English summary
    Kairana Bypoll Result: 3 reasons why Jats snubbed BJP.

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