ELECTION SPECIAL: क्या मोदी बनारस में मध्यावधि चुनाव लड़ रहे हैं?

प्रधानमंत्री के लंबे समय तक वाराणसी में रुकने का मतलब निकालने में जुटे हैं लोग.

वाराणसी में मोदी
AFP
वाराणसी में मोदी

बनारस में परंपरा है कि वहां जो भी अधिकारी आता है वो कालभैरव मंदिर में दर्शन के बाद काम संभालता है. काल भैरव शिव के रूद्र अवतार हैं और उन्हें काशी का कोतवाल कहा गया है.

कालभैरव मंदिर और बाबा विश्वनाथ मंदिर शहर की दक्षिण विधानसभा सीट में आते हैं. वहां से सात बार चुने हुए विधायक को भाजपा ने टिकट नहीं दिया. वो नाराज़ हो गए. इलाके में टिकट को लेकर कार्यकर्ताओं में असंतोष है.

मोदी ने जब वाराणसी में रैली की तब बारिश हो गई. इतनी बारिश हुई कि मंच टूट गया, सभा धुल गई.

मोदी भांप पाएंगे नोटबंदी पर बनारस का ये मिज़ाज?

वाराणसी में बीजेपी दिग्गजों का जमावड़ा क्यों?

वाराणसी
vineet khare
वाराणसी

काशी में कई लोगों का मानना है कि कालभैरव के मंदिर नहीं जाने के कारण ही मोदी इतनी परेशानियों से घिरे थे और शनिवार की मोदी की मंदिर यात्रा का मक़सद था पार्टी के अच्छे दिनों को बुलाना.

बीजेपी की चिंता

शनिवार और रविवार के बाद सोमवार को भी प्रधानमंत्री मोदी वाराणसी की सड़क पर उतरेंगे.

वाराणसी शहर में तीन विधानसभा सीटें हैं, शहर उत्तरी, शहर दक्षिणी और कैंट.

भारत के प्रधानमंत्री की विधानसभा चुनाव में भारी कैंपेनिंग क्या बीजेपी की भारी चिंता को दर्शाती है?

'गंदे पानी में खड़े हैं मोदी पर कैसे भरोसा करें'

'मुझे गंगा मइया की सौगंध खाने की ज़रूरत है?'

वाराणसी में मोदी
vineet khare
वाराणसी में मोदी

क्या देश के प्रधानमंत्री को शोभा देता है कि वो विधानसभा में इतना ज़ोर लगाकर प्रचार करें? यहां ये याद रखना ज़रूरी है कि नरेंद्र मोदी वाराणसी से सांसद भी हैं.

वाराणसी में वरिष्ठ पत्रकार विश्वनाथ गोकर्ण कहते हैं, "ये दिखाता है कि प्रधानमंत्री असहज हैं. सीटों के बंटवारे से उभरे असंतोष और भीतरघात का मैसेज उन्हें मिल चुका है. वो बनारस की आठों सीटें जीतना चाहते हैं. किसी भी प्रधानमंत्री के लिए अपनी इज़्जत को दांव पर लगाना अच्छी बात नहीं है. ये चुनाव अगले लोकसभा चुनाव के लिए भी खाका तैयार करता है. इसके लिए ज़रूरी है कि विधानसभा का चुनाव बीजेपी जीते. इसलिए उनका जीतना अनिवार्य है."

नज़रिया: क्या यूपी चुनाव में बीजेपी वाकई फ़ायदे में है?

विश्वनाथ गोकर्ण
Vineet khare
विश्वनाथ गोकर्ण

उधर एक अन्य वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ भट्टाचार्य कहते हैं कि एक सांसद का अपने क्षेत्र में आने को शक़ की निगाह से नहीं देखा जाना चाहिए.

बनारस में विकास

वो कहते हैं, "मैं उनके यहां आने, रुकने को ऐसे नहीं देखता कि भाजपा मान चुकी है कि पार्टी मुश्किलों से घिरी हुई है और मोदी जीतोड़ परिश्रम कर रहे हैं. ऐसा नहीं है."

अमिताभ के अनुसार मोदी के कार्यकाल में बनारस में विकास हुआ है, शहर में बना नया रेलवे स्टेशन बेहद आधुनिक है, वहां एलईडी बल्ब बंटने के बाद बिजली की खपत घटी है.

नोटबंदी से बंद तो नहीं होगी 'बीजेपी की दुकान'

अमिताभ भट्टाचार्य
Vineet Khare
अमिताभ भट्टाचार्य

शहर के भाजपा समर्थक भी इसमें कोई समस्या नहीं देखते. लेकिन अन्य विश्लेषक मोदी के यहां इतना लंबा वक्त गुज़ारने पर लगातार सवाल खड़ा कर रहे हैं.

हिंदुस्तान टाइम्स के विनोद शर्मा ने अपने फ़ेसबुक पन्ने पर लिखा, 'ऐसा लगता है कि नरेंद्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र में मध्यावधि चुनाव लड़ रहे हैं.'

मोदी का चेहरा

राजनीतिक विश्लेषक मोहन गुरुस्वामी ने इसे भाजपा की मायूसी बताया है.

पूरे वाराणसी में भारी कटआउट में सिर्फ़ मोदी का चेहरा है. उनकी पार्टी गुंडाराज और भ्रष्टाचार को खत्म करने के नाम पर वोट मांग रही है.

रविवार को उनके रोड शो में भारी भीड़ जुटी. छोटे, बड़े, बच्चे, बूढ़े सभी सड़कों पर भाजपा की टोपियां पहने, हाथों में पार्टी का झंडा लिए मोदी के समर्थन में नारे लगा रहे थे.

चंदौलीः मौजूद हैं राजनाथ, याद आते हैं कमलापति

वाराणसी में मोदी
vineet khare
वाराणसी में मोदी

गलियों, मंदिरों और संस्कृति के शहर वाराणसी में पार्टियां हर हथकंडे अपना रही हैं. नरेंद्र मोदी की रैली में समर्थक जय श्रीराम, हर-हर महादेव के नारे लगाते मिले.

लुका-छिपी का खेल

एक समर्थक ने कहा, "मुसलमान कभी भी भाजपा के लिए वोट नहीं देंगे." एक अन्य ने कहा, "चुनाव आयोग में भी एक मियां बैठा है, वो छोटी-सी बात पर भी भाजपा के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर सकता है."

'गंदे पानी में खड़े हैं मोदी पर कैसे भरोसा करें'

मुस्लिम इलाकों में समाजवादी पार्टी की स्क्रीन वाली गाड़ियां लगी थीं जिन पर अखिलेश यादव का गुणगान हो रहा था.

गोकर्ण कहते हैं, "राजनीतिक दलों की कोशिश है सेंटिमेंट को भड़काना ताकि वोटिंग के वक्त उनकी सोच भड़के."

उनके मुताबिक अखिलेश यादव और नरेंद्र मोदी के बीच जैसे लुका-छिपी का खेल चल रहा है.

वो बताते हैं, "जिस रास्ते पर मोदी चार मार्च से गुज़रे, उसी रास्ते से राहुल और अखिलेश छह मार्च को गुज़रेंगे. मोदी ने मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा का माल्यार्पण किया था. अखिलेश और राहुल भी वही करेंगे. दोनों पक्ष एक-दूसरे के दांव को काटने की कोशिश कर रहे हैं. ये पैंतरेबाज़ी है."

वाराणसी में मोदी
vineet khare
वाराणसी में मोदी

पिछले कई सालों से शहर के तीनों विधायक भाजपा के रहे हैं, इसके बावजूद भाजपा विकास के नाम पर वोट मांग रही है.

क्या मुझे गंगा मइया की सौगंध खाने की ज़रूरत है?: नरेंद्र मोदी

गोकर्ण कहते हैं, "सालों से सांसद और मेयर भी भाजपा के रहे. उसके बाद भी शहर में सड़कों, नालों, सफ़ाई की हालत बेहाल है. जगह-जगह कचरा बिखरा है, गंदगी का वास है, गंगा को साफ़ करने में कितना काम हुआ, उसका जायज़ा आप गंगा के किनार खड़े होकर ले सकते हैं."

बनारसी मस्त मिज़ाज हैं. वो सारी चीज़ों को बहुत मौज के साथ देख रहे हैं. वो सोच रहे है कि इस द्वंद्व में शायद उनका कुछ भला हो जाए.

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+