'मंदिर में ताकत होती तो गोरी-गजनवी का काम होता तमाम', सपा नेता ने दिया विवादित बयान, भड़की भाजपा

UP Politics: वक्फ बिल को लेकर देश की राजनीति में पहले से ही आग लगी हुई ऐसे में समाजवादी पार्टी के नेताओं की विवादित टिप्पणी बंद होने का नाम ही नहीं ले रही है। पहले रामजीलाल सुमन और अब राष्ट्रीय महासचिव इंद्रजीत सरोज के विवादित बयान ने सियासी गलियारों में उबाल ला दिया है।

इससे पहले सपा सांसद रामजीलाल सुमन द्वारा की गई टिप्पणी पर बवाल अभी थमा भी नहीं था कि अब इंद्रजीत सरोज ने हिन्दू देवी-देवताओं और मंदिरों को लेकर ऐसा बयान दे दिया, जिससे देशभर में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। सरोज के शब्दों को भाजपा ने न सिर्फ अपमानजनक बताया, बल्कि इसे हिन्दू आस्थाओं पर सुनियोजित हमला करार दिया है।

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Indrajeet Saroj news: क्या बोले इंद्रजीत सरोज?

एक कार्यक्रम के दौरान सपा नेता इंद्रजीत सरोज ने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि जब विदेशी मुस्लिम आक्रांता भारत पर हमला कर लूटपाट कर रहे थे, तो हिन्दू देवी-देवता क्या कर रहे थे? उन्होंने कहा, "महमूद गजनवी 17 बार सोमनाथ मंदिर को लूटकर चला गया, मोहम्मद बिन तुगलक और मोहम्मद गौरी जैसे आक्रांता आए और देश को नुकसान पहुंचाया, लेकिन हमारे देवी-देवता चुप क्यों रहे? क्या उनमें इतनी शक्ति नहीं थी कि वे उन्हें श्राप देकर भस्म कर देते? अगर वे कुछ नहीं कर पाए, तो इसका मतलब यह है कि उनमें कोई न कोई कमी थी।"

इंद्रजीत सरोज यहीं नहीं रुके उन्होंने यह भी कहा कि, "हमारे देवी-देवता अगर लुटेरों को रोकने में सक्षम नहीं थे, तो हमें अपने भगवानों को लेकर पुनर्विचार करना चाहिए। दलित और पिछड़े वर्गों के लिए भगवान डॉ. भीमराव अंबेडकर हैं, और पीडीए वर्ग (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) को उन्हें ही पूज्य मानना चाहिए।"

अंबेडकर जयंती के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने यह भी कहा कि "राम का नाम लेने से कुछ नहीं होगा, असली ताकत सत्ता के मंदिर में है, और बाबा साहब अम्बेडकर वहां पहले से विराजमान हैं।"

Indrajeet Saroj के बयान को BJP ने कह, 'हिन्दू आस्था का अपमान'

इंद्रजीत सरोज के इन बयानों पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा प्रवक्ता मनीष शुक्ला ने इस बयान को हिन्दू देवी-देवताओं का सीधा अपमान बताया और आरोप लगाया कि यह सब समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के इशारे पर किया जा रहा है।

मनीष शुक्ला ने कहा, "यह कोई सामान्य बयान नहीं है, यह हिन्दू समाज की आस्था को ठेस पहुंचाने का सुनियोजित प्रयास है। गोस्वामी तुलसीदास जैसे संतों को जाति के आधार पर अपमानित करने की कोशिश की जा रही है। इस तरह की जहरीली बयानबाजी कर माहौल को विषाक्त करने की साजिश की जा रही है। यह वही सोच है जिसने बंगाल के मुर्शिदाबाद में हिन्दुओं की हत्याओं का रास्ता तैयार किया।"

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अखिलेश यादव के परिवार में पांच सांसद हैं, तो उन्हीं से इस तरह के बयान क्यों नहीं दिलवाए जा रहे? भाजपा नेता ने इशारा किया कि यह एक गहरी साजिश का हिस्सा हो सकता है, जिसमें समाज को जातिगत आधार पर बांटने की कोशिश की जा रही है।

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