ब्राह्मण वोटरों की लड़ाई में 'नहले पे दहला' मारने में जुटीं प्रियंका, CM और 3 डिप्टी सीएम का फॉर्मूला लगभग तय
लखनऊ, 10 सितंबर: उत्तर प्रदेश में आने वाले विधानसभा चुनाव लेकर सारी पार्टियां अपनी तैयारियों में जुटी हुई हैं। चुनावी तैयारियो में जुटी कांग्रेस ने सपा, बसपा और भाजपा के प्रबुद्ध सम्मेलनों और ओबीसी सम्मेलनों की काट तैयार कर ली है। कांग्रेस सूत्रों का दावा है कि पार्टी अपनी रणनीति पर विचार कर रही है कि चुनाव से पहले सीएम के चेहरे को प्रोजेक्ट किया जाए और यह भी तय है की वो चेहरा भी ब्राह्मण ही होगा। हालांकि पार्टी इस बात पर भी मंथन कर रही है की सीएम के साथ ही 3 डिप्टी सीएम का फार्मूला भी रखा जाए जो दलित, मुस्लिम और ओबीसी समाज से होगा। पार्टी के नेताओं का दावा है कि इस रणनीति पर पिछले दो तीन महीनों से कांग्रेस में चर्चा चल रही है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो कांग्रेस का यह फार्मूला भी उनका रिवाइवल कर पाएगा यह मुश्किल है।

पार्टी के एक राष्ट्रीय पदाधिकारी ने बताया कि, ''ये आज की बात नहीं है। पिछले 2 महीने से इस बात पर मंथन चल रहा है कि कोई ऐसा फॉर्मूला निकाला जाए जिससे समाज में एक सोसल इंजीनियरिंग का मेसेज जाए और विरोधी पार्टियों का जवाब भी दिया जाए। बीजेपी और बीएसपी की तरफ से ब्राह्मणों को रिझाने के लिए पूरे प्रदेश में प्रबुद्ध सम्मेलन कर रही है। लेकिन कांग्रेस की सोच अलग है। पार्टी का मानना है की सीएम के चेहरे के साथ ही चुनाव में जाना सही होगा। इसके साथ 3 डिप्टी सीएम का फार्मूला भी तय हो सकता है।''
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तीन डिप्टी सीएम के फार्मूले पर मंथन
कांग्रेस के नेता का दावा है कि पार्टी इस बात पर मंथन कर रही है कि 3 डिप्टी सीएम का फार्मूला अपनाया जाय जो दलित, मुस्लिम और ओबीसी से जुड़ा होगा। पार्टी ब्राह्मण चेहरा प्रोजेक्ट करके उसके साथ तीन डिप्टी सीएम का फार्मूला अपने घोषणा पत्र में दे सकती है। पार्टी के एक पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कहते हैं कि, पार्टी के पास वैसे भी खोने के लिए कुछ नहीं है लिहाजा इस समीकरण पर आगे बढ़ा जा सकता है। इस फैसले के अच्छे परिणाम मिल सकते हैं लेकिन अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व को लेना है। हमे उम्मीद है कि इस पर जल्द ही कोई ठोस फैसला लिया जा सकता है।

प्रमोद तिवारी तिवारी खेमा इसी फार्मूले को लागू करवाने में जुटा
पार्टी से जुड़े सूत्रों की माने तो कांग्रेस ब्राह्मण चेहरे के तौर पर प्रमोद तिवारी पर दांव लगा सकती है। प्रमोद पर सहमति नहीं बनी तो उनकी बेटी और चार बार की विधायक अराधना मिस्र को ये जिम्मेदारी दे सकती है। अराधना को प्रियंका का काफी कर8भी भी माना जाता है। जितिन प्रसाद और रीता बहुगुणा जोशी के बीजेपी में ज्जाने के बाद प्रमोद तिवारी ही कांग्रेस में ब्राह्मण के चेहरे के तौर पर सबसे उपायुक्त होंगें। उन्हें राजनीति का माहिर खिलाड़ी माना जाता है और लगभग सभी पार्टियों में उनकी अच्छी पकड़ भी है।
दलित , मुस्लिम और दलित के रूप के तीन डिप्टी सीएम बना सकती है पार्टी
विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस यूपी में तीन डिप्टी सीएम बनाने का दाव भी खेल सकती है। कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि ऐसा कदम उठाकर पार्टी एकसाथ कई निशाने साध सकती है। बीएसपी और बीजेपी के बीच बढ़ते दलित, ओबीसी प्रेम को देखते हुए ये फैसला अहम हो सकता है। कांग्रेस में ओबीसी के चेहरे के तौर पर प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू , दलित चेहरे के तौर पर राज्य सभा सांसद पी एल पुनिया और मुस्लिम चेहरे के तौर पर नदीमुदिन सिद्दीकी, इमरान प्रतापगढ़ी और इमरान मसूद और सलमान खुर्शीद जैसे चेहरों पर पार्टी डॉ लगा सकती है। तीन डिप्टी सीएम बनाए जाने का एलान कर कांग्रेस एक साथ बीजेपी और बीएसपी के सभी समीकरणों का तोड़ निकल सकती है।

विद्यांत कॉलेज के अर्थशास्त्र के प्रोफेसर मनीष हिंदवी कहते हैं कि,
''अगर ऐसा है तो कांग्रेस बहुत बड़ी गलती करने जा रही है। एक समय था जब कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने सपा के चीफ अखिलेश यादव के साथ मिलकर यूपी में गठबबंधन किया था। याद करिए कि उस गठबंधन में युवा सोच और जोश का नारा दिया गया था लेकिन गठबंधन का फायदा अखिलेश यादव को मिल गया कांग्रेस उसका फायदा नहीं उठा पाई। रही बात सीएम चेहरे और तीन डिप्टी सीएम की तो चेहरा दे देने भर से ब्राह्मण वोटर इनके साथ जुड़ जाएगा यह कहना कठिन है क्योंकि ब्राह्मण हमेशा उस पाले में जाता है जो सत्ता के ज्यादा करीब होती है। अगर किसी ब्राह्मण चेहरे को सीएम प्रोजेक्ट कर भी देंगे तो क्या आपको लगता है कि कांग्रेस उतनी सीट पाएगी जितनी सरकार के बनाने के लिए जरूरी होती है। शायद नहीं। तो फिर ब्राह्मण कांग्रेस को वोट क्यों देगा। इनसे बेहतर तो वो सपा और बसपा के साथ चला जाएगा।''












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