आजम खां को सजा के बाद वेस्ट यूपी में इमरान मसूद-मायावती बना सकते हैं नए समीकरण
Samajwadi Party Leader Azam Khan: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और मुस्लिम फेस आजम खान को अदालत ने हेट स्पीच के एक मामले में तीन साल की सजा सुनाई है। आजम की सजा के बाद यूपी के राजनीतिक समीकरण किस कदर बदलेंगे इसका अंदाजा अभी से लगाया जाने लगा है। आजम खां को सपा का एक बड़ा मुस्लिम चेहरा माना जाता है। कुछ दिनों पहले ही वो जमानत पर छूटे थे। लेकिन एक बार फिर उनको सजा होना न केवल आजम परिवार बल्कि अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के लिए भी एक बड़ा झटका माना जा रहा है। आजम के जेल जाने के बाद सपा छोड़कर Bahujan Samaj Party में शामिल हुए इमरान मसूद को बसपा अब एक मुस्लिम चेहरे के तौर पर प्रोजेक्ट करेगी जिसकी काट अखिलेश को समय रहते तलाशनी होगी।

सपा का बड़ा मुस्लिम चेहरा हैं आजम खां
आजम खां को सपा का एक बड़ा मुस्लिम चेहरा माना जाता है। यही वजह है कि जब आजम खां जेल में बंद थे इस बात को लेकर सवाल उठे थे कि अखिलेश ने जेल में जाकर उनसे मुलाकात नहीं की थी। जेल से बाहर आने के बाद आजम ने कई ऐसे बयान भी दिए जिससे लगा कि वो सपा छोड़कर अलग रास्ता अख्तियार कर सकते हैं लेकिन अंत में अखिलेश आजम को मनाने में सफल रहे। मेदांता जाकर अखिलेश ने आजम और उनके परिवार से मिलकर यही संदेश देने का प्रयास किया था कि समाजवादी पार्टी आज भी आजम का उतना ही सम्मान करती है जितना मुलायम सिंह यादव किया करते थे।

राज्यसभा और एमएलसी के चुनाव में आजम की चली थी
जेल से बाहर आने के बाद अखिलेश आजम को मनाने में तो कामयाब हो गए लेकिन राज्यसभा, रामपुर लोकसभा उपचुनाव और एमएलसी के चुनाव में आजम ने जिस तरह से अपनी बात मनवायी उससे एक बार फिर साबित हो गया था कि आजम का सपा में कद कितना बड़ा है। आजम के कहने पर अखिलेश ने इन तीनों चुनावों में कई ऐसे लोगों को टिकट दिया जिसको वो नहीं देना चाहते थे। दरअसल अखिलेश यादव को इस बात का एहसास था कि आजम खान के सपा में न रहने से यूपी में एक बड़ा संदेश जाएगा और मुस्लिम वोट बैंक मायावती या कांग्रेस की तरफ जा सकता है।
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आजम की सजा के बाद इमरान बढ़ाएंगे अखिलेश की टेंशन
विधानसभा चुनाव में सपा की सीटों में तो इजाफा हो गया लेकिन सरकार नहीं बन सकी। उसके बाद अखिलेश के साथी भी एक एक कर छोड़ने लगे। इसी बीच कुछ दिनों पहले ही इमरान मसूद ने सपा छोड़कर बसपा का दामन थाम लिया था। इमरान का बसपा में जाना महज इत्तेफाक नहीं है। यूपी में होने वाले नगर निकाय चुनाव से पहले अखिलेश के लिए यह भी किसी बड़े झटके से कम नहीं था। अब इमरान मसूद मायावती के साथ मिलकर पश्चिम में सपा की जड़ें काटने का काम करेंगे। इमरान मसूद को पश्चिम में यूपी का एक मुस्लिम चेहरा माना जाता है। इमरान मसूद आजम की जगह मुस्लिम चेहरा बन पाएंगे या नहीं यह देखने वाली बात होगी।

आजम खान का विकल्प बनना इमरान के लिए इतना आसान भी नहीं
इमरान मसूद हालांकि पश्चिमी यूपी में एक बड़ा नाम है लेकिन आजम खां को पूरे यूपी में पश्चिम से लेकर पूरब तक मुसलमानों का भरोसा प्राप्त था। मुसलिम समाज उनको अपना नेता मानता था। वह स्वीकार्यता इमरान की नहीं है। इमरान मसूद पश्चिम के ही दर्जन भर जिलों में मुस्लिम के बीच लोकप्रिय हैं। यह कहना सही होगा कि इमरान पश्चिम में आजम की सजा के बाद जो जगह बनेगी उसको भरने में कामयाब होंगे और खुद को एक बड़े मुस्लिम नेता के तौर पर स्थापित करने की कोशिश करेंगे।

मायावती- इमरान मिलकर पश्चिमी यूपी में बना सकते हैं नया समीकरण
प्रभावशाली पश्चिमी उत्तर प्रदेश के नेता इमरान मसूद के समाजवादी पार्टी (सपा) छोड़ने और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में शामिल होने का प्रभाव एक से अधिक तरीकों से देखा जा रहा है। यूपी में मायावती पहले भी मुस्लिम-दलित समीकरण के साथ आगे बढ़ चुकी हैं। लेकिन आजम को सजा होने के बाद अब मायावती और इमरान मसूद मिलकर पश्चिम में अपनी जड़े जमाने की कोशिश करेंगे। आने वाले नगर निकाय चुनाव में इमरान मसूद की पहली परीक्षा होगी। इमरान के उपर इस चुनाव में बसपा को हराने का दारोमदार होगा।












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