अगर समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़े मुख्तार अंसारी तो अखिलेश को कितना होगा नफा नुकसान
लखनऊ, 26 अक्टूबर: उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव से पहले नए नए समीकरण बन रहे हैं। कुछ दिनों पहले ही सुभासपा के चीफ ओम प्रकाश राजभर ने मुख्तार अंसारी से मुलाकात की थी। इसके बाद अब मुख्तार के भाई और पूर्व विधायक सिबगतुल्लाह अंसारी का बयान कि मुख्तार अंसारी सपा से ही चुनाव लड़ेंगे, एक नए समीकरण की ओर इशारा करता है। आने वाले दिनों में यदि वाकई मुख्तार अंसारी सपा से चुनाव लड़ते हैं तो पूर्वांचल में इसका कितना असर पड़ेगा क्योंकि अंसारी बंधुओं की कौमी एकता दल के साथ पहले ही सपा का गठबंधन हो चुका है।

पूर्वांचल के बाहुबली विधायक गैंगस्टर से नेता बने मुख्तार अंसारी के साथ सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) प्रमुख ओमप्रकाश राजभर की बांदा जेल में हुई मुलाकात से राजनीतिक हड़कंप मच गया है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक अखिलेश यादव ने एसबीएसपी के साथ गठबंधन कर राजभर के मतदाताओं के बीच पैठ बनाने की बहुआयामी रणनीति अपनाई है। वहीं अखिलेश भी मुस्लिम वोटरों को रिझाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। पूर्वांचल में मुख्तार अंसारी के परिवार का मुस्लिम समुदाय के साथ-साथ ऊंची जातियों पर भी खासा प्रभाव पड़ा है। अंसारी मऊ से लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं।
दर्जनभर विधानसभा सीटों पर दस से 11 फीसदी मुस्लिम आबादी
उनके भाई अफजल अंसारी गाजीपुर से बसपा सांसद हैं जबकि भाई सिबगतुल्लाह अंसारी गाजीपुर के मोहम्मदाबाद निर्वाचन क्षेत्र से पूर्व विधायक हैं। पूर्वांचल की कुछ विधानसभा सीटों पर 10 से 11 फीसदी आबादी वाले मुस्लिम समुदाय का खासा असर है। उनका झुकाव सपा की ओर रहा है। लेकिन माना जा रहा है कि मुख्तार अंसारी की वजह से अल्पसंख्यक मतदाताओं के एक बड़े हिस्से पर बसपा का दावा और मजबूत हुआ है। अब सपा इस आधार वोट को अपने पक्ष में करना चाहती है।
अखिलेश ने 2016 में अंसारी बंधुओं को सपा में शामिल करने का विरोध किया था। हाल ही में चाचा शिवपाल ने अपने भतीजे अखिलेश को माफिया तत्वों के लिए एसपी के दरवाजे नहीं खोलने की सलाह दी है। लेकिन अब सपा 2012 की चुनावी सफलता को दोहराने के लिए कड़ी मशक्कत कर रही है। जिसके लिए पार्टी को अपने वोट आधार का विस्तार करने की सख्त जरूरत है और अंसारी परिवार इस संदर्भ में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। इसलिए बैकडोर चैनलों की रणनीति पर काम किया जा रहा है।

राजभर की पार्टी से उम्मीदवार हो सकते हैं मुख्तार अंसारी
सूत्रों के मुताबिक अगर सब कुछ ठीक रहा तो मुख्तार राजभर की पार्टी के टिकट से एसपी-एसबीएसपी गठबंधन के उम्मीदवार हो सकते हैं। राजभर की मुलाकात को इसी नजरिए से देखा जा रहा है। हालांकि इस मुद्दे को लेकर बीजेपी आक्रामक मुद्रा में है। किसी ठोस मुद्दे के अभाव में अखिलेश तुष्टीकरण की राजनीति कर रहे हैं, मुख्तार, अतीक के साथ गठजोड़ करने की कोशिश कर रहे हैं या जिन्ना की तारीफ कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जहां योगी सरकार माफियाओं पर सख्ती से नकेल कस कर आम जनता की रक्षा के अभियान पर काम कर रही है, वहीं माफिया तत्वों से सपा का लगाव हमेशा से ही दिखाई देता रहा है।
गाजीपुर की सियासत होगी दिलचस्प
वहीं, मोहम्मदाबाद विधानसभा से दो बार विधायक रहे चुके मुख्तार के बड़े भाई सिबगतुल्लाह अंसारी गाजीपुर की मोहम्मदाबाद सीट से विधायक रह चुके हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की अलका राय से उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। अब एक बार फिर वो सपा का दामन थाम रहे हैं, ऐसे में लगभग तय है कि उन्हें या उनके बेट को 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा वहां से टिकट देगी। ऐसे में गाजीपुर की सियासत एक बार फिर से दिलचस्प होने जा रही है।
दो महीने पहले ही सपा में आए थे सिबगतुल्लाह अंसारी
पूर्व सीएम और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सभी को लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय पर सदस्यता दिलाई थी। मऊ से बीएसपी विधायक मुख्तार अंसारी के भाई पूर्व विधायक सिबगतुल्लाह अंसारी आज समाजवादी पार्टी में शामिल हुए थे। उनके साथ उनके बेटे मुन्नू अंसारी भी थे। तो वहीं, अंबिका चौधरी ने कहा कि मेरे लिए आज का दिन मेरे पुनर्जन्म की तरह है। आज मेरे पास शब्दों का अभाव हो गया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष आभार व्यक्त करना चाहता हूं कि मुझे और मेरे बेटे आनंद के साथ सब को पार्टी में जगह दी।












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