UP में यदि 'बैक टू बैक' बनी BJP की सरकार तो एकसाथ टूटेंगे कई सारे मिथक , जानिए
लखनऊ, 8 मार्च: उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव सम्पन्न हो चुके हैं और बीजेपी और सपा की ओर से सरकार बनाने के दावे किए जा रहे हैं। बीजेपी का दावा इस मामले में भी महत्वपूर्ण है कि पिछले तीन दशकों में यूपी में ऐसी कोई सरकार नहीं बनी जिसकी बैक टु बैक सत्ता में वापसी हुई हो। मायावती हों या अखिलेश सबको जनता ने एक बार पुर्ण बहुमत के साथ मौका दिया लेकिन दोनों जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाए। इसके पीछे यूपी के कुछ मिथक भी हैं जिनकी चर्चा करनी जरूरी है। इस बार चुनाव के बाद एक्जिट पोल में यूपी में दोबारा योगी की सरकार बनती दिखायी दे रही है। तो क्या इस बार पिछले तीन दशकों का रिकॉर्ड और यूपी के मिथक टूटेंगे ?

योगी ने अंधविश्वास को किया दरकिनार
दरअसल यूपी में जब मायावती और अखिलेश की सरकार बनी तो एक मिथक बना दिया गया था कि जो सीएम नोएडा का दौरा करता है उसकी सत्ता में वापसी नहीं होती है। इन सारे दावों को दरकिनार करते हुए योगी की नोएडा औद्योगिक केंद्र में पहली यात्रा 23 सितंबर, 2017 को हुई थी। उन्होंने बॉटनिकल गार्डन-कालकाजी मैजेंटा मेट्रो लाइन के उद्घाटन के लिए पीएम मोदी की यात्रा से पहले व्यवस्था की जांच करने के लिए शहर का दौरा किया था। दो दिन बाद 25 सितंबर को वह पीएम मोदी के साथ मेट्रो लाइन का उद्घाटन करने पहुंचे थे।

योगी ने वादा किया था- नोएडा आता रहूंगा
योगी ने शहर के विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ कई बैठकें भी की थीं. 2018 में, वह पीएम की यात्रा की व्यवस्था की निगरानी के लिए 8 जुलाई को नोएडा पहुंचे। एक दिन बाद वह नोएडा में सैमसंग की दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल फैक्ट्री के उद्घाटन के मौके पर शहर पहुंचे। अंधविश्वास के बारे में बात करते हुए, सीएम योगी ने कहा था, "मैं अब नोएडा का दौरा करता रहूंगा। मैं ऐसे झंझटों में विश्वास नहीं करता। और लोग हमें वोट देना जारी रखेंगे ताकि हम नोएडा आते रहें।"

1988 के बाद कोई सीएम नहीं गया था नोएडा
1988 के बाद से यूपी का कोई भी मुख्यमंत्री अपना मुख्यमंत्री पद गंवाने के डर से नोएडा नहीं गया है। जाहिर है, पूर्व सीएम मायावती, मुलायम सिंह यादव और कल्याण सिंह नोएडा के अभिशाप से डरे हुए थे। इसके बावजूद अब यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ नोएडा में पीएम मोदी के साथ मिलकर दिल्ली मेट्रो की मैजेंटा लाइन का उद्घाटन कर इस अंधविश्वास को चुनौती दी और तीन दशक पुराने "नोएडा के मिथक" को तोड़ने का दावा किया था?

क्या है नोएडा न जाने का अंधविश्वास ?
कहा जाता है कि कोई भी मुख्यमंत्री जो नोएडा का दौरा करता है, उसके तुरंत बाद अपना मुख्यमंत्री का पद गांव देता है। यूपी के राजनीतिक इतिहास पर गौर करें तो 1988 में वीर बहादुर सिंह ने नोएडा का दौरा करने के कुछ दिनों बाद सत्ता खो दी। इसके बाद, उनके उत्तराधिकारियों, एनडी तिवारी, यादव, मायावती और कल्याण सिंह को भी इसी तरह की परिस्थिति का सामना करना पड़ा। 2011 में, डर को दूर रखते हुए, मायावती ने राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल का उद्घाटन करने के लिए नोएडा का दौरा किया, लेकिन 2012 में उन्होंने सत्ता खो दी।

5 साल नोएडा नहीं गए सीएम अखिलेश!
यूपी को आधुनिक बनाने का दावा करने वाले इंजीनियर अखिलेश ने इस मिथक को गंभीरता से लिया। सीएम के रूप में अपने पांच वर्षों में, उन्होंने एक बार भी नोएडा का दौरा नहीं किया। वास्तव में, उन्होंने क्रमशः लखनऊ और दिल्ली से ग्रेटर नोएडा विकास परियोजनाओं और नैसकॉम के नोएडा मुख्यालय का उद्घाटन किया। दादरी लिंचिंग मामले के बाद, वह मृतक मोहम्मद इखलाक के परिवार से भी मिलने नहीं गए थे। इसके बजाय, उन्होंने उन्हें लखनऊ लाने के लिए कहा।












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