'कमंडल पर भारी मंडल': यूपी में सियासी उलटफेर की असल कहानी
BJP lost in Uttat Pradesh biggest reason: उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने इस बार अबतक का सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है। 2004 में यह सबसे ज्यादा 35 सीटें जीती थी। इस बार उसके खाते में 37 सीटें आई हैं।
2019 के लोकसभा चुनाव और 2022 के विधानसभा चुनावों की नाकामी के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने राज्य में पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) के नाम से नई सोशल इंजीनियरिंग की कोशिश की। इससे भाजपा के तमाम सारे जातिगत समीकरण हवा हो गए।

पीडीए वाली सोशल इंजीनियरिंग ने सपा को पहुंचाया फायदा
सपा के जितने उम्मीदवार चुनाव जीते हैं, उनमें से 86% से अधिक ओबीसी, दलित और मुसलमान हैं। समाजवादी पार्टी से 20 ओबीसी, 8 दलित और 4 मुसलमान सांसद चुने गए हैं। ब्राह्मण, भूमिहार और वैश्य समाज से एक-एक और 2 ठाकुरों को भी साइकिल की सवारी करने का आनंद मिल गया है।
राम मंदिर के निर्माण का यूपी में बीजेपी को नहीं मिला पूरा फायदा
सपा की पीडीए रणनीति इतनी कारगर रही कि बीजेपी के राम मंदिर निर्माण का जोश भले ही एमपी, बिहार और ओडिशा से लेकर दक्षिण तक में काम किया हो, लेकिन उत्तर प्रदेश में यह कम से कम घटकर आधा तो हो ही गया है। यह समाजवादी पार्टी ही थी कि फैजाबाद और मेरठ जैसी सामान्य सीटों पर दलित प्रत्याशियों पर दांव लगा दिया और वह काम भी कर गया।
फैजाबाद (अयोध्या) में सपा की जीत के तरह-तरह से विश्लेषण किए जा रहे हैं तो मेरठ में टीवी के 'राम' अरुण गोविल को भी 'कमल' खिलाने में पसीने छूट गए। भाजपा को हराने के लिए अखिलेश ने ऐसा जातीय गणित बिठाया कि कांग्रेस को भी 6 सीटें आसानी से मिल गईं।
'संविधान बचाना है' ने यूपी में भाजपा के साथ 'खेल' कर दिया
लेकिन, अखिलेश की यह रणनीति कितनी कारगर हो पाती अगर इंडिया ब्लॉक 'संविधान बचाना है' वाला नरेटिव उत्तर प्रदेश के दलित गांवों तक नहीं पहुंचा पाता, कह पाना बहुत मुश्किल है। कांग्रेस और सपा के इस नरेटिव की वजह से 'भाजपा आरक्षण खत्म कर देगी' वाला ऐसा डर पैदा किया गया कि उत्तर प्रदेश में पहली बार दलितों को यादवों के साथ मतदान करने की 'मजबूरी' दिखी!
इस नरेटिव ने बीजेपी और एनडीए के खिलाफ ऐसा माहौल तैयार किया कि 'कमंडल' की राजनीति पर 'मंडल' वाला वाला दांव सिर चढ़कर बोल उठा। फैजाबाद की सीट पर जहां अयोध्या है, वहां के ग्रामीण क्षेत्रों इस बार 'ना मथुरा, ना काशी, अयोध्या में पासी' जैसे नारे सुनाई पड़े। फैजाबाद से सपा के सांसद चुने गए अवधेश प्रसाद पासी (दलित) समाज से ताल्लुक रखते हैं।
इससे बीजेपी के खिलाफ ग्रामीण क्षेत्रों में एक ऐसा माहौल बन गया कि अबतक 5 किलो राशन लेने वाले गरीब लाभार्थियों की भी उम्मीदों का स्तर आसमान छूना शुरू कर दिया।
इनमें खासकर महिला वोटरों में हर महीने 8,500 रुपए सीधे खाते में डाले जाने के कांग्रेस की गारंटी ने एक तरह से नई चुनावी ऊर्जा का संचार कर दिया। 'राशन नहीं, रोजगार' के नारे सुनाई पड़ने लगे। युवाओं को इंडिया ब्लॉक की सरकार बनते ही सरकारी नौकरी की गारंटी नजर आने लगी।












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