Net Worth: बिना चुनाव लड़े मंत्री बने दीपक प्रकाश के पास कैश की कमी, पत्नी की तिजोरी में Gold ही Gold
Deepak Prakash Net Worth: बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल का विस्तार गुरुवार को संपन्न हो गया। इस नई कैबिनेट में कुल 35 मंत्रियों को जगह दी गई है, जिसमें सबसे चर्चित नाम दीपक प्रकाश का है। आरएलएम (RLM) चीफ उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश ने एक बार फिर बिना किसी सदन (विधानसभा या विधान परिषद) का सदस्य रहे मंत्री पद की शपथ ली है।
राजनीतिक गलियारों में उनके दोबारा मंत्री बनने को लेकर जितनी चर्चा है, उतनी ही चर्चा उनकी 'करोड़पति' नेटवर्थ की भी हो रही है। आइए जानतें हैं मंत्री (दीपक प्रकाश) के पास कितनी धन-दौलत है?

हलफनामे में करोड़ों की संपत्ति का खुलासा
25 दिसंबर 2025 को दाखिल किए गए आधिकारिक हलफनामे के अनुसार, दीपक प्रकाश करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं। वैशाली जिले के मूल निवासी दीपक प्रकाश की कुल अचल संपत्ति 4 करोड़ रुपए से अधिक आंकी गई है। उनकी संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा उनके गृह जिले वैशाली में है, जिसमें जंदाहा स्थित 3 करोड़ मूल्य की गैर-कृषि भूमि और एक तीन मंजिला (B+G+2) इमारत शामिल है, जिसकी कीमत करीब 1 करोड़ रुपए है।
दीपक प्रकाश के निवेश पोर्टफोलियो में सबसे चौंकाने वाली बात उनके और उनकी पत्नी साक्षी मिश्रा के पास मौजूद आभूषण हैं। हलफनामे के मुताबिक:
- सोना (Gold): दीपक प्रकाश के पास 15 ग्राम सोना है, जबकि उनकी पत्नी के पास 500 ग्राम (आधा किलो) सोना है, जिसकी बाजार कीमत लगभग 60 लाख रुपए है।
- चांदी (Silver): साक्षी मिश्रा के पास 5 किलो चांदी भी है, जिसका मूल्य करीब 10 लाख रुपए बताया गया है।
- नकदी और बैंक बैलेंस (Cash and Bank Balance): कैश के मामले में दोनों के पास मात्र 10-10 हजार रुपए हैं, लेकिन अलग-अलग बैंक खातों में दीपक के पास करीब 6.94 लाख और उनकी पत्नी के पास 1.58 लाख रुपए जमा हैं।

दीपक प्रकाश की लग्जरी लाइफस्टाइल
लग्जरी लाइफस्टाइल की बात करें तो मंत्री जी के पास 2019 मॉडल की फोर्ड फ्रीस्टाइल कार और 2021 मॉडल की बजाज मोटरसाइकिल है। इसके अलावा, उन्होंने और उनकी पत्नी ने एलआईसी (LIC) की पॉलिसियों में भी निवेश किया है, जिसकी कुल वैल्यू लगभग 8.6 लाख रुपए से अधिक है।
दीपक के सामने संवैधानिक चुनौती
दीपक प्रकाश की यह नियुक्ति जितनी प्रभावशाली है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी। चूंकि वह अभी किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं, इसलिए उन्हें 6 महीने के भीतर विधायक या विधान पार्षद बनना अनिवार्य होगा। अगर वह 6 महीने में सदन के सदस्य नहीं बनते हैं, तो उनका मंत्री पद तो जाएगा ही, साथ ही उन्हें भविष्य में मिलने वाली पेंशन और अन्य सरकारी सुविधाओं से भी हाथ धोना पड़ सकता है।
इससे पहले भी वह नवंबर 2025 में मंत्री बने थे, लेकिन सरकार बदलने के कारण 4 महीने में ही पद चला गया था। इस बार उनके पास खुद को साबित करने और सदन की सदस्यता हासिल करने की बड़ी चुनौती होगी।
कितने पढ़े-लिखें हैं दीपक प्रकाश?
राजनीति में कदम रखने से पहले दीपक प्रकाश ने तकनीकी क्षेत्र में अपना करियर बनाया था। उन्होंने साल 2011 में 'मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी' से कंप्यूटर साइंस में बी.टेक (B.Tech) की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने लगभग चार साल तक आईटी (IT) सेक्टर में काम किया। राजनीति में एक्टिव होने से पहले वह विदेश में भी रहे और इसके बाद उन्होंने भारत लौटकर अपने पिता उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी 'आरएलएम' (RLM) में जिम्मेदारियां संभालनी शुरू कीं।














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