कैसे अलीगढ़ को राजा महेंद्र प्रताप सिंह यूनिवर्सिटी देकर यूपी में भाजपा ने साधे 6 समीकरण ? जानिए
अलीगढ़, 14 सितंबर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक तरह से आज 2022 के यूपी विधानसभा चुनावों का बिगुल बजा दिया है। अलीगढ़ में राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर राज्य विश्वविद्यालय के शिलान्यास का कार्यक्रम तो सरकारी था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने जिस अंदाज से आजादी के आंदोलन में उनके योगदान से लेकर अपने गृहराज्य गुजरात और उत्तर प्रदेश के कुछ और महान स्वतंत्रता सेनानियों के नाम को जोड़ा, उससे उन्होंने विपक्ष खासकर कांग्रेस और उसके सहयोगियों को लपेटने की भरपूर कोशिश की है। यही नहीं, इस कार्यक्रम के जरिए उन्होंने किसान आंदोलन की भी तथ्यों के आधार पर हवा निकालने की भरपूर कोशिश की है और साथ ही हिंदुत्व पर भाजपा के एजेंडे को बरकरार रखने का भी संकेत दिया है।

जाट समाज को साधने की कोशिश
करीब एक साल से जारी किसान आंदोलन के चलते ऐसी अटकलें हैं कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट समाज भाजपा से नाराज है। लेकिन, एक स्थानीय रिसायत के जाट राजा रहे महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर अलीगढ़ में राज्य विश्वविद्यालय का शिलान्यास करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ संदेश देने की कोशिश की है कि जिस स्वतंत्रता सेनानी को पहले कभी उचित सम्मान नहीं मिला, वह देने का काम भाजपा कर रही है। वे बोले "राजा महेंद्र प्रताप सिंह जिस तरह से एक लक्ष्य, एकनिष्ठ होकर भारत की आजादी को लेकर जुटे रहे, वह आज भी हमें प्रेरता देते है।" इस मौके पर उन्होंने कहा कि "देश के पीएम होने के नाते मुझे सौभाग्य मिला है कि महेंद्र प्रताप सिंह के नाम बन रही यूनिवर्सिटी का शिलान्यास कर रहा हूं। यह मेरा सौभाग्य है।" इस मौके पर वे यह जिक्र करना भी नहीं भूले कि उन्होंने किस तरह से अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के लिए भी बहुत जमीन दी थी।
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स्वतंत्रता आंदोलन में कांग्रेस की भूमिका पर सवाल
पीएम मोदी ने इस बात का भी जिक्र किया कि कैसे राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने पहले विश्व युद्ध के दौरान ही अफगानिस्तान से भारत की पहली निर्वासित सरकार बनाई थी। गौरतलब है कि राजा महेंद्र प्रताप सिंह कांग्रेसी नहीं थे, लेकिन उन्होंने देश की आजादी के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस की तरह ही बहुत बड़ा योगदान दिया था। आजादी के बाद 1957 में वह मथुरा से कांग्रेस उम्मीदवार को हराकर चुनाव भी जीते थे। बिना किसी का नाम लिए पीएम मोदी ने ऐसे नायकों को पहले भुलाए रखने का जिक्र किया और कहा कि 20वीं सदी की गलतियों को 21 वी सदी में सुधारा जा रहा है। उन्होंने कहा कि आजादी के "कई नायकों का (पहले)परिचय नहीं कराया गया।"

यूपी के कई और समाज को साधने की पहल
यह यूनिवर्सिटी अलीगढ़ में बन रही है तो पीएम मोदी ने इस मौके पर भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का जिक्र करके प्रदेश के एक और बड़े तबके को यह संदेश दिया है कि उनके नेता भाजपा के लिए कितने आदरणीय हैं। प्रधानमंत्री बोले कि "कल्याण सिंह जी की अनुपस्थिति बहुत ज्यादा महसूस कर रहा हूं। कल्याण सिंह जी आज अगर साथ होते तो विकास कार्यों को देखकर...राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय के रूप में अलीगढ़ की नई पहचान देखकर बहुत खुश हुए होते...और उनकी आत्मा जहां भी होगी हमें आशीर्वाद देती होगी।" लगे हाथ उन्होंने महाराजा सुहेलदेव, दिनबंधू छोटू राम का भी हवाला दिया और कहा कि राजा महेंद्र प्रताप सिंह जी समेत इन तमाम हस्तियों से नई पीढ़ी को परिचित कराने का प्रयास हो रहा है।

गुजरात-यूपी में ऐतिहासिक कनेक्शन जोड़ने की कोशिश
पीएम मोदी राजनीति में इतने माहिर हैं कि हर मंच का इस्तेमाल बहुत ही आसानी से इस तरह से करते हैं कि बिना ज्यादा कुछ कहे उन्हें जो भी संदेश देना होता है, दे देते हैं। जैसे जब बात राजा महेंद्र प्रताप सिंह की हो रही थी तो पीएम मोदी ने उनका आजादी में योगदान का जिक्र करने के लिए वह कहानी बताई कि कैसे वे लाला हरदयाल के साथ गुजरात के सपूत श्यामजी कृष्ण वर्मा से मिलने यूरोप गए थे और वहीं पर अफगानिस्तान से भारत की पहली निर्वासित सरकार बनाने की रणनीति तय हुई थी। इस मौके पर पीएम ने कहा कि उन्हें गुजरात के सीएम रहते हुए 73 साल बाद श्यामजी कृष्ण वर्मा की अस्थियां स्वदेश लाने का मौका मिला और आज भी उनकी अस्थि कलश कच्छ में मौजूद है। इसी दौरान उन्होंने अलीगढ़ के उस मुस्लिम ताला कारोबारी की भी कहानी सुनाई, जो कारोबार के सिलसिले में उनके गांव जाते थे और जितने दिन वहां रुकते थे अपनी कमाई पीएम मोदी के पिता के पास ही हिफाजत के लिए रख देते थे।

किसान आंदोलन की हवा निकालने की कोशिश
पीएम मोदी के अलीगढ़ कार्यक्रम में सबसे खास में से एक बात ये रही कि उन्होंने किसान नेता और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के योगदान की भी जमकर सराहना की। चरण सिंह जाट भी थे और किसान नेता भी। पीएम मोदी ने कहा है कि "(ग्रामीण अर्थव्यवस्था में तेजी से) बदलाव के साथ कैसे तालमेल बिठाना पड़ता है..इसका रास्ता स्वयं चौधरी चरण सिंह ने दशकों पहले देश को दिखाया है।" दरअसल, पीएम मोदी का कहना था कि चौधरी साहब को भी छोटे किसानों की चिंता थी, जिसके साथ मौजूदा सरकार भी खड़ी है। वे बोले कि "देश में 80 फीसदी से ज्यादा छोटे किसान हैं.....केंद्र सरकार इन्हीं को ताकत देने की कोशिश कर रही है।" उन्होंने इनके लिए चल रही विभिन्न योजनाओं का जिक्र कर बताया कि कैसे कोरोना के दौरान छोटे किसानों के खाते में सरकार ने 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा सीधे ट्रांसफर किए हैं, जिनमें 25 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा सिर्फ यूपी के छोटे किसानों को मिले हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना काल में यूपी में एमएसपी पर रिकॉर्ड खरीद हुई है। गन्ना किसानों की परेशानियों कम की गई हैं। यूपी में चार साल में 1.40 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा भुगतान गन्ना किसानों को किया गया है और भविष्य में गन्ना किसानों को इथेनॉल का भी लाभ मिलेगा।

भाजपा का हिंदुत्व कार्ड कायम
पीएम मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत ही राधाष्टमी की बधाई देकर की। उन्होंने कहा है कि "ब्रजभूमि के कण-कण में राधा ही राधा हैं।" और विकास कार्यों की शुरुआत इस पवित्र दिन से हो रही है। वहीं पीएम मोदी ने 2017 से पहले यूपी के खराब कानून-व्यवस्था का जिक्र कर पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए बिना नाम लिए पश्चिमी यूपी से पलायन और पुश्तैनी घर छोड़कर जाने की घटनाओं का जिक्र किया, जिनके चलते आज भी मुजफ्फरनगर और उससे सटा पश्चिमी यूपी का इलाका संवेदनशील माना जाता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज अपराधी वैसे अपराध करने से पहले 100 बार सोचता है।












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