Himalayan Vulture Kanpur में मिलने से उत्साह, 10 दिन के अंदर दूसरा मामला, जानिए खास बात
उत्तर प्रदेश के कानपुर में हिमालयन ग्रिफॉन गिद्ध पाया गया है। 10 दिनों में दूसरी बार दुर्लभ गिद्ध की प्रजाति पाई गई है। दोनों गिद्धों को कानपुर के चिड़ियाघर में रखा गया है। जानिए खास बातें-

Himalayan Vulture Kanpur में मिलने से उत्साह का माहौल है। पहला दुर्लभ गिद्ध कानपुर के कब्रिस्तान से पकड़ा गया था। इसके बाद वनविभाग के अधिकारियों ने कायमगंज के जंगलों में सफेद गिद्ध को पकड़ा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पहली बार सात जनवरी को पकड़ा गया हिमालयी ग्रिफॉन गिद्ध कानपुर चिड़ियाघर में रखा गया। 17 जनवरी को पकड़े गए दुर्लभ गिद्ध के दूसरे साथी को भी वनविभाग ने बगल के पिंजरे में रखा है।

अलग माहौल के कारण में तनाव में हैं गिद्ध
हिमालयन गिद्ध के कानपुर में मिलने पर यूपी तक की रिपोर्ट में कहा गया, चिड़ियाघर में डॉक्टर अनुराग सिंह दोनों गिद्धों की देखभाल कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 15 दिनों के लिए दोनों गिद्धों को क्वारंटाइन किया गया है। डॉ अनुराग ने कहा, हम हिमालयन गिद्ध को तनाव कम करने की दवाई के साथ-साथ विटामिन दे रहे हैं। उन्होंने कहा, गिद्ध के जोड़े को अलग रखा गया है, क्योंकि दोनों काफी दिनों तक अलग रहे हैं और दोनों दुर्लभ हिमालयी ग्रिफॉन गिद्ध तनाव में है।

गिद्ध ईदगाह कब्रिस्तान में पकड़ा गया
इस खबर के मुताबिक दोनों गिद्ध नर हैं या मादा इसकी पुष्टि थोड़ी मुश्किल है, लेकिन जब डीएनए टेस्ट होगा तभी लिंग की जानकारी मिलेगी। फिलहाल दोनों गिद्धों को पिंजरे में रखा जाएगा, इसके बाद नियमानुसार फैसला लिया जाएगा। बता दें कि सात जनवरी को पहली बार जो दुर्लभ गिद्ध पकड़ा गया उसे कानपुर के कर्नलगंज के ईदगाह कब्रिस्तान में पाया गया। स्थानीय लोगों ने गिद्ध को पकड़ने के बाद वन विभाग को सौंप दिया था।
नीचे देखें पकड़े गए गिद्ध की फोटो- (साभार-यूपी तक)

हिमालयी ग्रिफॉन गिद्ध अब लगभग खतरे में
दुर्लभ हिमालयन ग्रिफॉन गिद्ध को पकड़ने के बाद स्थानीय लोगों को फोटो क्लिक कराते देखा गया। ANI की रिपोर्ट में कहा गया, विशेषज्ञों के अनुसार, '6-फीट' से अधिक लंबे पंखों वाला ग्रिफॉन गिद्ध हिमालय में पाई जाने वाली सबसे बड़ी पक्षी प्रजातियों में से एक है। भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी प्रवीण कस्वां ने पिछले साल एक दुर्लभ पक्षी का पुनर्वास करते हुए ट्वीट किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक हिमालयी ग्रिफॉन गिद्ध अब लगभग खतरे में हैं। उन्हें पारिस्थितिकी तंत्र इंजीनियर कहा जाता है।

गिद्ध की आयु 40-45 वर्ष
IFS अधिकारी प्रवीण कस्वां ने पुष्टि की, "यह हिमालयी ग्रिफ़ॉन गिद्ध की तरह दिखता है। उप-वयस्क प्रवासी होते हैं, वयस्क अधिक ऊंचाई पर रहते हैं। गिद्ध की ये प्रजाति 40-45 वर्ष की आयु तक जीवित रह सकते हैं।"

हिमालयी ग्रिफॉन गिद्ध क्यों दुर्लभ
बड़े पंखों के कारण इन गिद्धों को आसमान में ऊंची उड़ान और जमीन पर शवों की तलाश में मदद मिलती है। बता दें कि गिद्ध शवों को खाकर बीमारियों को मनुष्यों में फैलने से रोकते हैं। हमले की मुद्रा में रहने वाले हिमालयी ग्रिफॉन गिद्ध देखने लायक होते हैं। गिद्ध "शानदार गरुड़" रूप में पंखों को ऊपर उठाते हैं।

गिद्ध वन विभाग को सौंपा गया
हिमालयन ग्रिफॉन गिद्ध के बारे में विशेषज्ञों ने कहा, सर्दियों में तराई और आसपास के क्षेत्रों में हिमालयी ग्रिफॉन गिद्ध देखे जाते हैं। कानपुर में पाए गए दुर्लभ गिद्ध के बारे में स्थानीय निवासी मो. सफीक ने कहा, आखिरकार हम उस गिद्ध को पकड़ने में कामयाब रहे, जो एक हफ्ते से यहां था। एक अन्य युवा ने कहा, उन्होंने अक्सर सुना है कि अब देश में गिद्धों की संख्या कम हो गई है और आश्चर्य होता है कि क्या गिद्धों को पकड़ने के लिए पुरस्कार राशि की घोषणा की गई है ? मो. सफीक ने कहा, 'हमने पुलिस की मौजूदगी में गिद्ध को वन विभाग को सौंप दिया।'
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