इलाहाबादी होली: 30 किलो के हथौड़े को दूल्हा बनाकर बारातियों ने शहर में घुमाया

इलाहाबाद। सैकड़ों वर्षों से चल रही परंपरा के अनुसार इलाहाबादी होली की शुरुआत हथौड़ा बारात के साथ हो चुकी है। पूरी शानो-शौकत के साथ निकली हथौड़ा बरात में हजारों लोग शामिल हुए और इसमें मुख्य आकर्षण का केंद्र 30 किलो का 3 फीट लंबा हथौड़ा रहा जो दूल्हा बना रहा। फिलहाल होली की मस्ती में शहर को डुबोने की पहल देर रात हथौड़ा बारात के साथ शुरू हुई, जिसमें घोड़े की करतबबाजी, ढोल, बैंड बाजा, डीजे, लाइट के साथ बारात चौक इलाके से गुजरी।

30 किलो का हथौड़ा दूल्हा

30 किलो का हथौड़ा दूल्हा

इस बारात का मुख्य आकर्षण लकड़ी को तराशकर तैयार किया गया 30 किलो और 3 फीट का हथौड़ा रहा जिसे फूल मालाओं से दूल्हे की तरह सजाया गया था और केसर विद्यापीठ इंटर कॉलेज से यह हथौड़ा बारात निकली। बारात खोवा मंडी, जीरो रोड, घंटाघर, लाल डिग्गी, लोकनाथ होते हुए वापस केसर विद्यापीठ पहुंची जहां पर भव्य बारात स्वागत का आयोजन किया गया।

कंधे पर खूब टहला दूल्हा हथौड़ा

कंधे पर खूब टहला दूल्हा हथौड़ा

इलाहाबादी बारात रस्म कंधाचढ़ी के तहत हथौड़े को कंधे पर बैठाकर टहलाया गया। दूल्हा बने हथौड़े की बारात कंधे पर बैठा कर शुरू हुई और पूरी यात्रा के दौरान हर कोई कंधा बदल-बदल कर दूल्हे को लेकर चलता रहा। पूरे रास्ते जमकर लोगों ने डांस किया और अबीर गुलाल उड़ाए। केसर विद्यापीठ में कद्दू भजन के साथ हथौड़े को काजल लगाकर नजर उतारने, लालटेन से आरती उतारी, बलैयां लेवाई, लोढा नचावन की रस्में भी पूरी की गई।

सामाजिक कुरीतियों का पुतला फूंका

सामाजिक कुरीतियों का पुतला फूंका

कार्यक्रम समापन स्थल पर बारातियों का भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान सबसे आकर्षक मुद्रा में रहे राजेंद्र तिवारी उर्फ दुकान जी ने बारात को हर साल की तरह चार चांद लगा दिए और हथौड़े के साथ दूल्हा बने रहे। बारात का समापन सामाजिक कुरीतियों का पुतला दहन करते हुये किया गया।

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