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'सबको माफ करते हुए जाओ,' बेड पर पड़े हरीश राणा ने आखिरी बार झपकाईं पलकें, सामने आया अंतिम विदाई का VIDEO

Harish Rana Last Video: नियति की क्रूरता और एक बेबस परिवार के संघर्ष की इससे अधिक मार्मिक तस्वीर शायद ही कोई हो। 13 साल बिस्तर पर मौत से जंग लड़ने वाले 32 वर्षीय हरीश राणा की आखिरकार इस दुनिया से अंतिम विदाई हो गई। शनिवार सुबह गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन की एम्पायर सोसाइटी के फ्लैट नंबर 1301 में एक ऐसी खामोशी पसरी थी, जिसे शब्दों में बयां करना नामुमकिन है। वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं और दिल भारी था, क्योंकि वहां एक मां अपने जीवित बेटे को 'अंतिम विदाई' दे रही थी।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा 22 सेकेंड का वह वीडियो पत्थर दिल इंसान को भी रुला देने के लिए काफी है। वीडियो में बेड पर पड़े हरीश राणा को ब्रह्मकुमारी केंद्र की एक महिला चंदन का तिलक लगा रही हैं। हरीश के चेहरे पर 13 सालों का असहनीय दर्द साफ झलकता है।

Harish Rana Last Video

महिला बड़े प्यार से उसके सिर पर हाथ सहलाते हुए रुंधे गले से कहती है- 'सबको माफ करते हुए...सबसे माफी मांगते हुए अब जाओ।' यह शब्द उस मां-बाप की बेबसी की पराकाष्ठा हैं, जिन्होंने अपने हाथों से पाल-पोसकर बड़ा किए बेटे के लिए खुद मौत मांगी।

13 साल पहले टूटे थे सपने: एक मेधावी छात्र की दास्तान

हरीश राणा कभी एक महत्वाकांक्षी इंजीनियर बनने का सपना देखता था। साल 2012 में उसने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया था। वह अपनी क्लास के टॉप 5 छात्रों में शुमार था। माता-पिता की आंखों में चमक थी कि बेटा बुढ़ापे की लाठी बनेगा। लेकिन 20 अगस्त 2013 की उस काली रात ने सब कुछ बदल दिया। रक्षाबंधन की शाम बहन से फोन पर बात करने के महज एक घंटे बाद खबर आई कि हरीश पीजी की चौथी मंजिल से नीचे गिर गया है।

चौथी मंजिल से गिरने के कारण हरीश के सिर और रीढ़ की हड्डी में ऐसी चोटें आईं कि वह 'परमानेंट वेजिटेटिव स्टेट' (PVS) में चला गया। यानी शरीर का 100 प्रतिशत हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया। वह देख सकता था, सांस ले सकता था, लेकिन न बोल सकता था और न ही हिल सकता था। 13 सालों तक वह सिर्फ एक पाइप (PEG ट्यूब) के जरिए मिल रहे पोषण के सहारे जिंदा रहा। डॉक्टरों ने साफ कह दिया था कि उसके ठीक होने की कोई उम्मीद नहीं है।


Harish Rana के लिए 'पैसिव यूथेनेशिया' की अनुमति के बाद मां का बुरा हाल! पिता ने जो कहा सुनकर फट जाएगा कलेजा

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला और 'इच्छामृत्यु'

जब उम्मीद की हर किरण बुझ गई, तो थक-हारकर माता-पिता ने अपने बेटे को इस असहनीय दर्द से मुक्ति दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट और परिवार की सहमति के आधार पर 'पैसिव यूथेनेशिया' (इच्छामृत्यु) की अनुमति दी। कोर्ट ने माना कि गरिमा के साथ मरना भी जीवन के अधिकार का हिस्सा है।

अंतिम विदाई: एम्बुलेंस की ओर बढ़ते कदम

शनिवार को जब एम्स की टीम हरीश को लेने पहुंची, तो मंजर देख हर कोई फफक पड़ा। पिता अशोक राणा ने नम आंखों से अपने बेटे के सिर को सहलाया, वहीं मां निर्मला देवी ने बेटे के माथे को चूमकर उसे अंतिम विदाई दी। अब हरीश एम्स दिल्ली के पेलिएटिव केयर विभाग में भर्ती है, जहां उसे धीरे-धीरे जीवन रक्षक प्रणालियों से अलग किया जाएगा, ताकि वह इस दुनिया से शांति और सम्मान के साथ विदा ले सके।

Harish Rana: कौन हैं हरीश राणा, जिन्हें मिली इच्छा मृत्यु की इजाजत, 13 साल कोमा में रहने के बाद अब होगी मौत?

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