Gyanvapi Shringar Gauri case: एक मुख्य हिंदू वादी ने की मुकदमे से हटने की घोषणा, उत्पीड़न का लगाया आरोप

Gyanvapi Shringar Gauri case: वाराणसी के महत्वपूर्ण मुकदमे से हिंदू पक्ष के एक मुख्य वादी ने इस मामले से खुद को अलग कर लिया है। उन्होंने उत्पीड़न का आरोप लगाया है।

Gyanvapi Shringar Gauri case

वाराणसी के ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी केस के एक मुख्य हिंदू याचिकाकर्ता जितेंद्र सिंह विसेन ने अपने और अपने परिवार की ओर से इस मुकदमे से हटने की घोषणा की है। इसके लिए उन्होंने कथित 'उत्पीड़न' का आरोप लगाया है। उनके वकील शिवम गौर इस मामले से पहले ही खुद को अलग कर चुके हैं।

एक मुख्य हिंदू वादी ने केस से खुद को अलग किया
वाराणसी के ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी केस में हिंदू पक्ष के एक मुख्य वादी जितेंद्र सिंह विसेन ने इस मामले से खुद को अलग करने की घोषणा को लेकर शनिवार को एक बयान जारी किया। इस बयान में उन्होंने कहा, 'मैं और मेरा परिवार (पत्नी किरण सिंह और भतीजी राखी सिंह) ज्ञानवापी से संबंधित सभी मुकदमों से अलग हो रहे हैं, जो कि हमने देश और और धर्म के हित में कई अदालतों में दायर किए थे।'

कथित उत्पीड़न का आरोप लगाया
विसेन विश्व वैदिक सनातन संघ के प्रमुख भी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उन लोगों को हिंदू पक्ष समेत विभिन्न तरफ से 'उत्पीड़न' का सामना करना पड़ रहा है और इससे वे अपमानित महसूस कर रहे हैं। उनके मुताबिक, 'ऐसी स्थिति में सीमित सामर्थ्य और संसाधनों की वजह से, मैं 'धर्म' की लड़ाई और नहीं लड़ सकता और इसलिए मैं इसे छोड़ रहा हूं।'

यह 'धर्मयुद्ध' मेरे जीवन की सबसे बड़ी गलती- जितेंद्र सिंह विसेन
उनका कहना है, 'शायद मेरे जीवन की यह सबसे बड़ी गलती मैंने की है कि मैंने यह 'धर्मयुद्ध' शुरू किया था। ये समाज सिर्फ धर्म के नाम पर नौटंकी कर गुमराह करने वाले लोगों का है।' इससे पहले विसेन के वकील ने बयान जारी कर केस छोड़ने की वजह याचिकाकर्ता से संवादहीनता को कारण बताया था।

फीस नहीं मिलने पर वकील ने छोड़ा था केस
उन्होंने तब कहा था कि वह खुद को ज्ञानवापी केस जो कि 2021 से लड़ रहे हैं और कृष्ण जन्मभूमि केस जो कि 2022 से लड़ रहे हैं, दोनों से खुद को अलग कर रहे हैं। उनका दावा था कि मई 2022 से उन्हें मुकदमा लड़ने के लिए कोई फीस नहीं मिली है।

पांच महिला वादियों में राखी सिंह भी शामिल थीं
2021 के अगस्त में वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में मां शृंगार गौरी और अन्य देवताओं की रोजाना पूजा की अनुमति लेने के लिए जो मूल शृंगार गौरी केस दर्ज हुआ था, उसकी पांच महिला याचिकाकर्ताओं में विसेन की भतीजी राखी सिंह भी मुख्य थीं।

विसेन से पहले से शुरू हो गए थे मतभेद
हालांकि, राखी सिंह ने मई 2022 में अन्य महिलाओं से खुद को अलग कर लिया था और विसेन के हरि शंकर जैन और विष्णु जैन समेत चार अन्य याचिकाकर्ताओं के वकीलों के बीच मतभेद उभर आए थे।

इसके बाद विसेन ने जैन की हिंद साम्राज्य पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और राष्ट्रीय महासचिव के पद से इस्तीफे की घोषणा कर दी थी। वे ज्ञानवापी केस के अलावा मथुरा के ईदगाह केस और ताजमहल से जुड़े हाई-प्रोफाइल मामलों से भी जुड़े रहे हैं। विसेन ने जो एक और अहम केस दर्ज किया था, उसमें ज्ञानवापी परिसर में मुसलमानों के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग शामिल है। (इनपुट-पीटीआई)

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