ज्ञानवापी मस्जिद: 'शिवलिंग' वाले स्थान पर वजू क्यों किया ? CJM कोर्ट पहुंचा मामला

वाराणसी, 23 मई: ज्ञानवापी मस्जिद केस में सोमवार को सीजेएम कोर्ट में भी एक याचिका दायर हो गई है। एक वकील ने अदालत से गुहार लगाई है कि जिस किसी ने भी शिवलिंग मिलने वाले स्थान वर वजू की प्रक्रिया की है, उसके खिलाफ आईपीसी की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई होनी चाहिए। गौरतलब है कि पिछले हफ्ते ही अदालत ने शिवलिंग मिलने के दावे के बाद उस जगह को सील करने का आदेश दिया था, जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने भी मुहर लगाई थी। अगर याचिकाकर्ता का आरोप सही साबित होता है, तो यह विवाद और भी गंभीर शक्ल अख्तियार कर सकता है।

शिवलिंग मिलने वाली जगह पर वजू का मामला

शिवलिंग मिलने वाली जगह पर वजू का मामला

ज्ञानवापी मस्जिद विवाद पर सुनवाई को लेकर जिला अदालत ने अपना फैसला मंगलवार तक के लिए सुरक्षित रख लिया है, लेकिन इस बीच इस मामले को लेकर एक और मुद्दा सामने आ गया है। टाइम्स नाउ की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक वकील ने वाराणसी को चीफ जुडिशल मजिस्ट्रेट की अदालत में एक याचिका डालकर वजू खाने में वजू करने वाले लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। गौरतलब है कि ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में वजू खाने से शिवलिंग मिलने का दावा किया गया है। याचिका में उन लोगों के खिलाफ एफआईआर की मांग की गई है, जिन्होंने 16 मई से लेकर 19 मई के बीच कथित रूप से उस जगह पर वजू किया है। सवाल इसलिए गंभीर है कि इससे पहले कोर्ट ने शिवलिंग मिलने वाले स्थान को सील करने का आदेश दिया था।

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    आईपीसी की धारा 153ए(2) और 505 (3) के तहत कार्रवाई की मांग

    आईपीसी की धारा 153ए(2) और 505 (3) के तहत कार्रवाई की मांग

    रिपोर्ट के मुताबिक वकील ने सीजेएम की अदालत में शिवलिंग वाले स्थान पर कथित रूप से वजू करने वालों के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत कार्रवाई करने की मांग को लेकर याचिका डाली है और उन लोगों पर (जिन लोगों ने कथित रूप से उन तारीखों के दौरान अब विवादित हो चुके वजू खाने में वजू की प्रक्रिया दोहराई है) आईपीसी की धारा 153ए(2) और 505 (3) के तहत एफआईआर दर्ज करने की गुहार लगाई है।

    शिवलिंग मिलने को लेकर हिंदू और मुस्लिम पक्ष के अलग हैं दावे

    शिवलिंग मिलने को लेकर हिंदू और मुस्लिम पक्ष के अलग हैं दावे

    भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153ए(2) दो समूहों में धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास, भाषा, आदि के आधार पर दुश्मनी पैदा करने से जुड़ा है। जबकि, 505 (3) 'पूजा के स्थान या धार्मिक पूजा में शामिल या धार्मिक समारोहों' में किए गए अपराध से जुड़ा है, जिसमें 5 साल तक की सजा का प्रावधान है। गौरतलब है कि कोर्ट के आदेश पर ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में कराए गए सर्वे के दौरान हिंदू पक्ष के वकीलों ने वजू खाने में शिवलिंग मिलने का दावा किया था। हालांकि, मुस्लिम पक्ष के वकीलों का दावा है कि वह शिवलिंग नहीं, फव्वारा है।

     शिवलिंग वाला स्थान सील करने का दिया था आदेश

    शिवलिंग वाला स्थान सील करने का दिया था आदेश

    हालांकि, ज्ञानवापी के वजू खाने में शिवलिंग मिलने के दावे के बाद उस समय मुकदमे की सुनवाई कर रहे वाराणसी के सीनियर डिविजन के जज रवि कुमार दिवाकर ने जिला प्रशासन, पुलिस, सीआरपीएफ को उस स्थान को सील करने का आदेश देते हुए, उसकी सुरक्षा की व्यक्तिगत जिम्मेदारी सौंप दी थी। बाद में जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो वहां पर भी जजों ने सीनियर डिविजन जज के आदेश को बरकरार रखा था और शिवलिंग वाले स्थान की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया था।

    क्या होता है वजू खाना ?

    क्या होता है वजू खाना ?

    वजू खाना मस्जिदों के भीतर एक छोटी सी तलाबनुमा (या शरीर को पानी से शुद्ध करने की बाकी तरह की व्यवस्था) जगह होती है, जहां नमाज से पहले मुसलमान हाथ-पैर धोते हैं। इस्लाम में शरीर को शुद्ध करने की धार्मिक प्रक्रिया को वजू कहते हैं। इस दौरान नमाजी मुंह, पैर, सिर के साथ ही हाथों को कुहनियों तक वजू खाने के पानी से अच्छी तरह से धोकर अपने शरीर को स्वच्छ करते हैं। इस्लाम के जानकारों का कहना है कि नमाज से पहले की यह प्रक्रिया बहुत ही अहम है। जानकारों के मुताबिक वजू का जिक्र पवित्र कुरान में भी किया गया है।

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