कल्याण की सियासी इमेज भुनाने में जुटी सरकार, UP चुनाव से पहले प्रदेश में श्रद्धांजलि यात्रा निकालने की तैयारी
लखनऊ, 23 अगस्त: उत्तर प्रदेश में राम मंदिर के नायक और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का तो निधन हो गया लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए वो सियासी तौर पर बहुत कुछ छोड़कर गए हैं। संगठन और सरकार से जुड़े सूत्रों की माने तो राम मंदिर के दौरान उनकी भूमिका, कुशल प्रशासक वाली इमेज को लेकर वह जनता के बीच एक श्रद्धांजलि यात्रा निकालने की तैयारी में जुटी हुई है। विधानसभा चुनाव से पहले पूरे प्रदेश में उनसे जुड़ी एक श्रद्धांजलि यात्रा निकालने पर मंथन चल रहा है। इस यात्रा के दौरान राम मंदिर आंदोलन के दौरान दिए गए भाषणों को भी एलईडी स्क्रीन पर लोगों को दोबारा सुनाने की तैयारी की जा रही है। सूत्र बताते हैं कि आने वाले दिनों में सरकार कल्याण सिंह को लेकर कुछ और भी फैसले कर सकती है जो राजनीतिक संदेश देने वाले होंगे।

भाजपा से जुड़े सूत्रों के अनुसार भाजपा और सरकार मिलकर कल्याण सिंह की इमेज को जनता के बीच लेकर जाने का प्लान तैयार कर रहे हें। योजना यह है कि कल्याण सिंह को एक कुशल प्रशासक की छवि के साथ ही राम मंदिर के नायक के तौर पर पेश किया जाता है। राम मंदिर के दौरान कल्याण सिंह के जोशिले और हिन्दुत्व से जुड़े भाषणों का संग्रह किया जाएगा। उन भाषणों को जहां योगी सरकार विधानसभा की गैलरी में लगवाने पर विचार कर रही है वहीं दूसरी ओर संगठन इन भाषणों को दोबारा जनता के बीच लेकर जाने का प्लान तैयार कर रहा है।
पूरे प्रदेश में निकल सकती है कल्याण सिंह की श्रद्धांजलि यात्रा
हिन्दुत्व के चेहरे कल्याण सिंह का अवसान हो गया है। उनका आज अंतिम संस्कार कर दिया जाएगा। हालांकि भाजपा पूरे प्रदेश में कल्याण सिंह की एक श्रद्धांजलि यात्रा निकालने पर विचार कर रही है। यह यात्रा पूरी तरह से चुनावी और हिन्दुत्व को धार देने वाली होगी। इसमें कल्याण सिंह के उन भाषणों को बड़ी स्क्रीन पर प्रसारित कर लोगों को सुनाया जाएगा जो मंदिर आंदोलन के दौरान दिए थे। इस यात्रा की पटकथा लिखी जा रही है लेकिन इसको अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है। बताया जा रहा है कि श्रद्धांजलि यात्रा निकालने का एक मकसद यह भी है कि पूरे प्रदेश में उनके समर्थक हैं और जो लोग उनको श्रद्धांजलि देने से वंचित रह गए उन्हें अपने जिले या गांव में ही श्रद्धांजलि देने का मौका आसानी से मिल सकता है।

कल्याण सिंह को लेकर कई अहम कदम उठा सकती है सरकार
भाजपा की सरकारों में हमेशा ही कल्याण सिंह सरकार के कुशल प्रशासन को बताया जाता है। खुद विपक्ष ने यह भी यह स्वीकार किया है कि कल्याण सिंह एक कुशल प्रशासक के तौर पर याद किए जाएंगे। अब सरकार कल्याण की इसी छवि को लेकर उनको और विस्तार रुप देने पर विचार कर रही है। इसकी शुरुआत केशव मौर्य ने हालांकि कर दी है। राज्य के उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य ने कहा है कि अयोध्या में रामजन्मभूमि मार्ग का नाम कल्याण सिंह के नाम पर रखा जाएगा। इसी तरह योगी सरकार कल्याण के महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक भाषणों को विधानसभा की गैलरी में भी लगाया जाएगा।
यूपी के लोक निर्माण मंत्री और डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने कहा कि,
''बाबू जी का जन्म अलीगढ़ में हुआ लिहाजा अलीगढ़ की एक सड़क का नाम बाबू जी के नाम पर होगी। एटा और बुलंदशहर उनकी कर्मभूमि रही है। यहां से वो चुनाव भी लड़े है, आर आज भी लोगों की स्मृतियों में है। ये फैसला उनकी याद को संजोये रखने की कोशिश है। प्रयागराज में सड़क का नाम इसलिए उनके नाम पर होगा क्योंकि जब प्रयागराज से चित्रकूट जा रहे थे तब उन्हें गिरफ्तार किया गया था। लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी है, इसलिए एक सड़क लखनऊ में भी उनके नाम पर होगी। जबकि अयोध्या में मार्ग का नाम कल्याण मार्ग करने की पीछे वजह है, की हम चाहते है कि जब तक राम मंदिर रहेगा तब तक देश और दुनिया के राम भक्त बाबूजी को याद करेंगे। यह मेरी तरफ से बाबूजी को पुष्पांजलि है।''
यूपी के अयोध्या, लखनऊ, प्रयागराज, एटा, अलीगढ़ और बुलंदशहर जिले की एक-एक मार्ग का नाम कल्याण सिंह के नाम पर रखा जाएगा। इन मार्गो को कल्याण मार्ग कहा जायेगा। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव मौर्या ने कहा है कि अयोध्या में मुख्य सड़क से राम मंदिर की ओर जाने वाली सड़क का नाम कल्याण सिंह मार्ग रखा जा सकता है।

चेहरों को भुनाने में महिर है बीजेपी, आठ प्रतिशत लोध वोटरों और 100 विधानसभा सीटों पर नजर
केशव मौर्य भले ही यह दावा करें कि वो कल्याण सिंह की स्मृतियों को जेहन में रखने के लिए ये फैसला ले रहे हैं लेकिन इसके सियासी मायने भी हैं। कल्याण सिंह जिस लोध बिरादरी से आते थे वो यूपी में करीब आठ प्रतिशत है और यूपी की 25 से 30 लोकसभा क्षेत्रों और करीब 100 विधानसभा सीटों पर हार जीत में उनकी अहम भूमिका है। पश्चिमी उप्र हो या सेंट्रल यूपी या बुंदेलखंड हर जगह लोध मतदाताओं की अच्छी खासी संख्या है।
कल्याण सिंह को हमेशा ही ओबीसी का चेहरा माना जाता था। अभी 15 विधायक इस बिरादरी के हैं जो अलग-अलग पार्टियों में हैं। लोध समुदाय की बात करें तो वो आगरा, फर्रुखाबाद, बदायूं, हाथरस, मुरादाबाद, अमरोहा, बरेली, एटा, इटावा, कासगंज, बुलंदशहर, अलीगढ़, महोबा, झांसी, जालौन, उरई, ललितपुर और बांदा में अच्छी खासी संख्या में हैं।












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