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Gomti River Front Scam: शिवपाल की घेरेबंदी शुरू, ED ने पूछताछ के लिए भेजा नोटिस

उत्तर प्रदेश में अखिलेश से नजदीकी शिवपाल को अब भारी पड़ रही है। प्रवर्तन निदेशालय ने शिवपाल को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है। मैनपुरी उपचुनाव में अखिलेश का समर्थन देने वाले शिवपाल अब मुश्किलों से घिरते नजर आ रहे हैं।
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बीजेपी

Gomti River Front Scam: उत्तर प्रदेश में मैनपुरी लोकसभा उपचुनाव में समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) का समर्थन करने वाले प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (PSP) प्रमुख शिवपाल यादव को प्रवर्तन निदेशालय (ED) को नोटिस भेजा है। पहले ही ऐसी अटकलें लगाईं जा रहीं थीं कि अपने भतीजे अखिलेश का समर्थन कर बीजेपी को नाराज करने वाले शिवपाल के खिलाफ मामले की जांच तेज हो सकती है। हालांकि मैनपुरी उपचुनाव का परिणाम गुरुवार को मतगणना के बाद सामने आएगा।

शिवपाल की घेरेबंदी शुरू

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गोमती रिवर फ्रंट के संबंध में यूपी के राजनीतिक दबंग शिवपाल सिंह यादव को पूछताछ के लिए नोटिस भेजा है। शिवपाल यादव दरअसल मुलायम सिंह यादव के छोटे भाई और समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव के चाचा भी हैं। उनको 16 अन्य आरापियों के साथ तलब किया है। इसमें राज्य सरकार के प्रमुख अधिकारी और सेवानिवृत्त नौकरशाह भी शामिल हैं।

ईडी ने इनको भी भेजा नोटिस

जानकारी के मुताबिक, ईडी ने जिन लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया है, उनमें पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन और तत्कालीन प्रमुख सचिव (सिंचाई) दीपक सिंघल शामिल हैं, जो बाद में यूपी के मुख्य सचिव भी बने और अपने काम के लिए जाने जाते हैं। इन लोगों पर गोमती रिवर फ्रंट परियोजना में कई तरह की अनियमितताएं बरतने का आरोप है। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने भी मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत जांच शुरू की थी।

शिवपाल यादव

गोमती रिवर फ्रंट घोटाले को लेकर उठे थे सवाल

दरअसल शिवपाल यादव यूपी के सिंचाई मंत्री थे जब सपा सरकार के कार्यकाल में गोमती रिवरफ्रंट परियोजना को क्रियान्वित किया गया था। सीबीआई जांच ने शुरू में पुष्टि की कि परियोजना के लिए ₹1,513 करोड़ का बजट स्वीकृत किया गया था और लगभग ₹1,437 करोड़ काम का 60% पूरा किए बिना खर्च किया गया था। खर्च में कई विसंगतियां सामने आईं। इसके अलावा जिस कंपनी को रिवर फ्रंट ब्यूटीफिकेशन का काम दिया गया था, वह डिफाल्टर थी। 17 फरवरी, 2021 को सीबीआई ने लखनऊ में सीबीआई अदालत में छह लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। बाद में लखनऊ में दो सिंचाई इंजीनियरों को गिरफ्तार किया गया था।

योगी सरकार ने की थी सीबीआई जांच की सिफारिश

सीबीआई ने 30 नवंबर, 2017 को राज्य सरकार की सिफारिश पर मामले में मामला दर्ज किया था। यूपी सरकार ने 2017 में सीबीआई जांच की सिफारिश की थी, जब इस मामले की जांच के लिए गठित एक समिति ने रिवर फ्रंट के सौंदर्यीकरण में कई विसंगतियां पाई थीं। राज्य सरकार ने 19 जून, 2017 को सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों सहित कई लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की, जिसमें आरोप लगाया गया कि अनुमानित बजट का 95% से अधिक खर्च होने के बावजूद रिवर फ्रंट चैनलाइजेशन से संबंधित 60% काम भी पूरा नहीं हुआ है।

बीजेपी की नजदीकी की वजह से धीमी हो गई थी जांच

अखिलेश यादव और शिवपाल के बीच दरार के बाद शिवपाल और भाजपा के बीच कथित बढ़ती निकटता के बाद कथित तौर पर रिवरफ्रंट घोटाले की जांच धीमी हो गई थी। शिवपाल यादव कैबिनेट मंत्री थे और 2012-17 से समाजवादी पार्टी के कार्यकाल के दौरान रिवरफ्रंट परियोजना की कल्पना और क्रियान्वित होने पर उन्होंने यूपी सिंचाई विभाग संभाला था। हालांकि, 2017 में सपा सरकार के जाने के बाद परियोजना में करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप लगाया गया था।

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English summary
Gomti River Front Scam: Siege of Shivpal begins, ED sends no for questioning
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