"क्या दूसरा किम जोंग उन चाहते हैं लोग?", मोदी योगी पर निशाना साधते हुए बोले राकेश टिकैत

लखीमपुर। उत्‍तर प्रदेश व‍िधानसभा चुनाव के बीच सत्‍तारूढ़ भाजपा के व‍िरुद्ध संयुक्‍त किसान मोर्चा 'मिशन यूपी' लॉन्‍च कर चुका है। संयुक्‍त मोर्चे के नेता राकेश टिकैत का कहना है कि, भारत के सबसे बड़े सूबे यूपी में किसानों की हालत ज्‍यादा खराब है और यहां खेती-किसानी के लिए बेहतर करने वाली सरकार चाहते हैं। चुनावी माहौल के बीच सत्तारूढ़ भाजपा पर हमलावर टिकैत ने आज उत्तर कोरिया का जिक्र किया और कहा कि मतदाताओं को यह तय करना होगा कि वे बेहतर नेतृत्व चाहते हैं या "दूसरा किम जोंग उन" चाहते हैं।

सत्‍तारूढ़ भाजपा पर किसान नेता ने निकाली भड़ास

सत्‍तारूढ़ भाजपा पर किसान नेता ने निकाली भड़ास

टिकैत बोले, "लोगों को यह तय करना है कि क्या वे एक मुख्यमंत्री और प्रधान मंत्री चाहते हैं जो जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं या वे (उत्तर कोरिया) जैसी स्थिति चाहते हैं, जहां दूसरा किम जोंग हो।" उन्‍होंने कहा, "हम किसी भी राज्य में तानाशाही सरकार नहीं चाहते हैं। हम अपील करते हैं कि लोग अपने वोटों का बुद्धिमानी से उपयोग करें।,'' किसान नेता के निशाने पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ही थे, जिन पर वह इस चुनावी मौसम में अक्‍सर निशाना साधते रहे हैं।

बोले- हिंदू-मुस्लिम, जिन्ना की बात करने वालों को वोट नहीं

बोले- हिंदू-मुस्लिम, जिन्ना की बात करने वालों को वोट नहीं

पिछले हफ्ते, उन्होंने भाजपा पर अपने गृहनगर मुजफ्फरनगर में ध्रुवीकरण अभियान चलाने का आरोप लगाया और कहा कि यह "हिंदू-मुस्लिम मार्च के लिए एक स्टेडियम नहीं है।" टिकैत ने ट्वीट किया, "पश्चिमी उत्तर प्रदेश विकास की बात करना चाहता है। इस चुनाव में हिंदू, मुस्लिम, जिन्ना और मजहब की बात करने वालों को वोट गंवाना होगा। मुजफ्फरनगर हिंदू-मुस्लिम मैचों का स्टेडियम नहीं है।"

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    'मुजफ्फरनगर हिंदू-मुस्लिम मैचों का स्टेडियम नहीं है'

    'मुजफ्फरनगर हिंदू-मुस्लिम मैचों का स्टेडियम नहीं है'

    टिकैत ने यह भी अक्सर कहा है कि किसान विकास और बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दों के बारे में अधिक चिंतित हैं। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि मतदाता उनका समर्थन करेंगे जो किसानों के खिलाफ नहीं हैं। वे उनका समर्थन करेंगे जो हिंदू और मुस्लिम मतदाताओं का ध्रुवीकरण नहीं कर रहे हैं। लोग उनका समर्थन करेंगे जो अपने मुद्दों के बारे में बात करते हैं, न कि पाकिस्तान और जिन्ना पर बोलने वालों का।"

    सालभर चले आंदोलन के बाद झुकी थी सरकार

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    दिल्ली के बाहर राजमार्गों पर तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को लेकर चले किसानों के विरोध प्रदर्शन में टिकैत सबसे आगे थे। जिनके तेवरों को देखते हुए बाद में नवंबर 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कानूनों को वापस लेने की घोषणा कर दी गई थी। कानून वापसी के बाद ही किसानों का आंदोलन थमा। हालांकि, केंद्र द्वारा कानूनों को वापस लिए जाने के बाद भी कई मौकों पर यूपी और पंजाब जैसे चुनावी राज्यों में किसानों के प्रदर्शन होते रहे।

    क्‍या सपा-रालोद के समर्थन में हैं टिकैत?

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    टिकैत समेत बहुत से किसान नेता भाजपा का व‍िरोध करते नजर आते हैं। हालाँकि, टिकैत स्पष्ट रूप से उत्तर प्रदेश में विपक्षी समाजवादी पार्टी-रालोद गठबंधन के समर्थन में सामने नहीं आए हैं, जिससे यह अटकलें भी लगाई जा रही हैं कि वह भाजपा पर नरम हो गए हैं। मगर..वे अपने बयानों से ऐसी अटकलों पर व‍िराम लगा देते हैं।

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