बिना परीक्षा IAS बन गई तीन बहनें! नाकामी ने दिमाग में भरा ऐसा फितूर, अब खाएंगी जेल की हवा

Fake IAS Officer Case: उत्तर प्रदेश के बरेली की गलियों में एक ऐसी "लेडी नटवरलाल" का उदय हुआ, जिसने व्यवस्था की आंखों में धूल झोंककर धोखाधड़ी का एक ऐसा मायाजाल बुना कि बड़े-बड़े धुरंधर गच्चा खा गए। यह कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। सिविल सेवा का सपना टूटने के बाद एक युवती ने 'सिस्टम' का हिस्सा बनने के बजाय 'सिस्टम' को ही लूटने का फैसला कर लिया।

नीली बत्ती की हनक, सफेद एसयूवी पर लिखा 'SDM' का बोर्ड और हाथ में फर्जी नियुक्ति पत्रों का पुलिंदा-विप्रा शर्मा ने अपनी दो बहनों के साथ मिलकर बेरोजगारों की उम्मीदों पर डकैती डाली। सरकारी दफ्तरों के गलियारों से लेकर लखनऊ के पोस्ट ऑफिस तक, इस शातिर तिकड़ी ने जालसाजी का जो साम्राज्य खड़ा किया, उसने उत्तर प्रदेश पुलिस के भी होश उड़ा दिए हैं।

Fake IAS Officer Case

8 साल की नाकामी ने बनाया 'फर्जी अधिकारी'

मुख्य आरोपी विप्रा शर्मा की कहानी काफी चौंकाने वाली है। विप्रा ने रोहिलखंड यूनिवर्सिटी से इतिहास और अंग्रेजी में डबल MA किया है। उसने साल 2012 से 2020 तक लगभग 8 वर्षों तक सिविल सेवा (UPSC) की कड़ी तैयारी की, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। जब वह असली अधिकारी नहीं बन सकी, तो उसने खुद को फर्जी एडीएम (ADM) और पीसएस अधिकारी बताना शुरू कर दिया। उसने एक सफेद रंग की एसयूवी (SUV) गाड़ी खरीदी और उस पर 'SDM' लिखवाकर लोगों पर रौब जमाना शुरू कर दिया।

गजरौला में तैनाती का दावा और नौकरी का झांसा

विप्रा ने बरेली के बारादरी इलाके में अपना नेटवर्क फैलाया। वह खुद को गजरौला में एडीएम एफआर (ADM FR) के पद पर तैनात बताती थी। वह पहले लोगों से दोस्ती करती और फिर उनका भरोसा जीतकर सरकारी विभाग में कंप्यूटर ऑपरेटर या अन्य पदों पर नौकरी दिलाने का दावा करती थी। उसकी बातों और रसूख को देखकर कई युवक उसके जाल में फंस गए और सरकारी नौकरी के सपने में अपनी जमा-पूंजी उसे सौंप दी।

बहनों के साथ मिलकर रचा 'मास्टरप्लान'

इस ठगी के खेल में विप्रा अकेली नहीं थी। पुलिस जांच में उसकी सगी बहन शिखा शर्मा और चचेरी बहन दीक्षा पाठक की सक्रिय भूमिका सामने आई है। इन तीनों का काम बंटा हुआ था।

  • फर्जी दस्तावेज: तीनों मिलकर जाली सरकारी मुहरें और लेटरपैड तैयार करती थीं।
  • लखनऊ से कोरियर: पीड़ितों को पूरा भरोसा दिलाने के लिए ये महिलाएं लखनऊ के सरकारी दफ्तरों के पास स्थित डाकघर से कोरियर भेजती थीं।
  • फर्जी जॉइनिंग लेटर: इन लिफाफों में फर्जी नियुक्ति पत्र और सरकारी निर्देश होते थे, ताकि किसी को शक न हो।

विश्वास जीतने के लिए खाते में भेजी 'सैलरी'

इस गिरोह की शातिरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पीड़ित को शक न हो, इसलिए इन्होंने एक पीड़ित के बैंक खाते में करीब 17,000 रुपये वेतन के रूप में जमा कराए। अभ्यर्थी को लगा कि उसकी सरकारी नौकरी पक्की हो गई है और विभाग ने सैलरी भेजनी शुरू कर दी है। इसी भरोसे की आड़ में इन महिलाओं ने कई लोगों से मोटी रकम वसूली।

5 लाख की ठगी ने खोला राज

Goodnews Today की एक रिपोर्ट के अनुसार, किला थाना क्षेत्र के मलूकपुर निवासी मुसाहिद की शिकायत पर इस पूरे कांड का पर्दाफाश हुआ। मुसाहिद ने पुलिस को बताया कि उसे कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी दिलाने के नाम पर विप्रा ने 5 लाख 21 हजार रुपये ठग लिए। जब जॉइनिंग में देरी हुई और बहानेबाजी बढ़ने लगी, तब मुसाहिद ने पड़ताल की और सच्चाई सामने आने पर पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई।

पुलिस की बड़ी बरामदगी और कार्रवाई

सीओ पंकज श्रीवास्तव के नेतृत्व में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीनों को गिरफ्तार किया। इनके पास से निम्नलिखित सामान बरामद हुआ है-

  • एक सफेद लग्जरी गाड़ी (जिस पर एडीएम/एसडीएम अंकित था)।
  • 10 से ज्यादा चेकबुक और 2 लैपटॉप।
  • 4 लाख रुपये नकद और मोबाइल फोन।
  • विभिन्न बैंक खातों में जमा करीब 50 लाख रुपये, जिन्हें पुलिस ने तुरंत फ्रीज कर दिया है।

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ में अभी कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं और ठगी के शिकार अन्य लोग भी सामने आ सकते हैं।

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