Electricity Price Hike: बिजली दरें बढ़ाने की तैयारी, टिकैत बोले- किसानों के सब्र की परीक्षा ना लें सरकार
Electricity Price Hike: उत्तर प्रदेश में बिजली दरों में 30 फीसदी तक की संभावित बढ़ोतरी को लेकर किसानों में आक्रोश तेजी से बढ़ रहा है। सरकार के इस प्रस्ताव को लेकर अब भारतीय किसान यूनियन (संयुक्त मोर्चा) आंदोलन की राह पर उतरने की तैयारी कर चुकी है। किसानों का मानना है कि यह बोझ सीधे-सीधे आम लोगों और खासकर ग्रामीण आबादी की जेब पर भारी पड़ेगा।
भाकियू संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने साफ शब्दों में कहा है कि यह प्रस्ताव किसानों की कमर तोड़ने वाला साबित होगा। उनके मुताबिक, अगर यह बढ़ोतरी लागू होती है तो हर उपभोक्ता को औसतन 600 रुपये प्रतिमाह अतिरिक्त चुकाने पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि यह अन्यायपूर्ण कदम किसानों और आम उपभोक्ताओं के लिए एक और आर्थिक झटका होगा।

गांवों में अब गेहूं की फसल की कटाई का काम पूरा हो चुका है और इसी समय को ध्यान में रखते हुए भाकियू ने जनचौपाल की मुहिम शुरू कर दी है। कार्यकर्ता एक-एक गांव पहुंचकर लोगों को इस प्रस्तावित बढ़ोतरी के खिलाफ जागरूक कर रहे हैं। गांवों में हो रहे संवाद से स्पष्ट है कि जनमानस इस फैसले के विरोध में है।
जनचौपाल से किसानों में गुस्सा
किसानों का कहना है कि बिजली विभाग में बढ़ते घाटे का जिम्मा उपभोक्ताओं पर डालना गलत है। वे मांग कर रहे हैं कि पहले विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार और बेवजह के खर्चों पर लगाम लगाई जाए। उनका कहना है कि बिजली उपकरणों की खरीद में भारी कमीशनखोरी होती है, जिससे कीमतें जरूरत से कहीं ज्यादा बढ़ जाती हैं।
इसके साथ ही किसान यह भी पूछ रहे हैं कि जब लाइन लॉस जैसी समस्याएं वर्षों से बनी हुई हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय क्यों नहीं की जा रही है? किसानों का यह भी आरोप है कि स्मार्ट मीटर और निजी कंपनियों के प्रभाव में लिए गए फैसले आम जनता के हित में नहीं हैं।
किसान नेता बोले- यह आमजन के साथ धोखा
नरेश चौधरी ने साफ शब्दों में कहा कि सरकार बिजली वितरण को निजी हाथों में देने की साजिश कर रही है। उन्होंने इसे एक "ट्रेलर" बताते हुए कहा कि निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए आम उपभोक्ताओं को आर्थिक संकट में डाला जा रहा है।
किसान नेता ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि यह प्रस्ताव वापस नहीं लिया गया, तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भाकियू इस मसले को हर जिले और तहसील स्तर तक ले जाएगी, ताकि सभी प्रभावित लोग एकजुट होकर विरोध दर्ज करा सकें।
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने हाल ही में नियामक आयोग के समक्ष बिजली कंपनियों की वास्तविक आय-व्यय का विवरण पेश किया है। इन आंकड़ों में करीब 19,600 करोड़ रुपये का राजस्व अंतर बताया गया है।
इसी आधार पर पावर कॉरपोरेशन ने बिजली दरों में औसतन 30 फीसदी वृद्धि का प्रस्ताव रखा है। अब यह निर्णय नियामक आयोग पर निर्भर करेगा कि वह इस पर क्या रुख अपनाता है। यदि यह प्रस्ताव स्वीकार होता है, तो यह यूपी के ऊर्जा इतिहास की सबसे बड़ी दर वृद्धि मानी जाएगी।
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