फर्रुखाबाद: गंगा हुई और भी मैली, भाजपा सरकार में भी नहीं हुई साफ!
फर्रुखाबाद। केंद्र में भाजपा सरकार के चार वर्ष पूर्ण होने के बाद भी गंगा मैली की मैली दिखाई दे रही है। शहर से निकलने वाले नालों का पानी सीधा गंगा में प्रवाहित हो रहा है। उन नालों पर कोई भी ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगाया गया है। दूसरी तरफ बड़े नालों के बाद गंगा के किनारे बसे दर्जनों गांवों की गंदगी गंगा में जा रही है।

वर्तमान समय मे गंगा का जल स्तर भी बहुत कम हो गया है जिस कारण उसका जल का रंग भी बदला नजर आ रहा है। ट्रीटमेंट प्लांट को लेकर कई सालों से आंदोलन चलाये जा रहे हैं। बहुत से समाजसेवी आमरण अनशन पर भी बैठे हैं तो जिला प्रशासन ने उनको उठाने के लिए बड़े-बड़े वादे भी कर दिए लेकिन ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगाया जा सका।

शहर में छपाई करने के सैकड़ों कारखाने चल रहे हैं, उनका रंगीन केमिकल्स युक्त पानी भी गंगा के जल में विष घोल रहा है। गंगा प्रदूषण नियंत्रण विभाग के कर्मचारी जब भी कारखानों पर छापेमारी करते हैं वहां लोग अपनी अपनी जेब गर्म करने के बाद कोई कार्रवाई नहीं करते हैं। जबकि गंगा को अपनी मां के रूप में मानने वाले लोग उसके जल को पीने के बाद अपनी प्यास बुझाते हैं। जब गंगा में गिर रहे नालों को लेकर आम जनता से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि 20 वर्ष पहले जनसंख्या कम होने के साथ गंगा के जल का दोहन नहीं होता था, अब कई कार्यो में जल का दोहन किया जा रहा है।

गंगा में जो जल के रूप में पानी दिखाई दे रहा है उसके आधा पानी गन्दे नालों से आता है। सरकार गंगा सफाई में लाखों रुपया खर्च कर रही है लेकिन गंदगी फैलाने वालों पर कार्रवाई नही कर रही है। दूसरी तरफ नगर पालिका की तरफ से भी नालों से निकलने वाले पानी को साफ करने का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। न ही कोई ऐसा इंतजाम किया कि लोगो के घरों से निकलने वाली गंदगी को समाप्त किया जा सके। शहर में जितने भी छपाई के कारखाने चल रहे हैं, उनको एक जगह स्थापित करने के लिए वर्षों से प्रयास चल रहे हैं लेकिन अभी तक स्थापित नहीं हो सके हैं।
जब इस बारे में जिलाधिकारी मोनिका रानी से बात की गई तो उन्होंने बताया की नाले के पानी को शमशाबाद की तरफ जाने बाले खन्ता नाला में डायवर्जन करा दिया जायेगा। नाले का प्रपोजल भेज दिया गया है, जल्द इस पर काम किया जा रहा है।












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