सीएम योगी आदित्यनाथ के तीन तलाक बयान पर देवबंदी उलेमा खफा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीन तलाक की तुलना द्रौपदी के चीरहरण से की थी। देवबंदी उलेमाओं ने इसकी तीखी आलोचना की है।
सहारनपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ट्रिपल तलाक को लेकर दिए गए बयान पर देवबंदी उलेमा खफा हो गए हैं। तीन तलाक की तुलना द्रौपदी के चीरहरण से किए जाने पर देवबंदी उलेमा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उलेमा ने दो टूक कहा कि ट्रिपल तलाक शरई मसला है। शरीयत में सरकारी हस्तक्षेप को मुसलमान कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।

ज्ञात हो कि सोमवार को सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि तीन तलाक द्रोपदी चीरहरण जैसा है इस पर मौन रहने वाले अपराधी है। उन्होंने अपने बयान में कॉमन सिविल कोड लागू किए जाने की भी हिमायत की थी।
सीएम के इस बयान पर दारुल उलूम जकरिया के वरिष्ठ उस्ताद मुफ्ती अरशद फारूकी ने कहा कि हिंदू मुस्लिम दोनों धर्म अलग अलग है। दोनों धर्मों की बातों को इस तरह एक-दूसरे से जोड़ना गलत है। उक्त बयान इस्लाम की तौहीन है। इस तरह के बयान देने वालों को पहले इस्लाम की सही मालूमात कर लेनी चाहिए। कहा कि तीन तलाक मुस्लिमों का शरई मसला है। शरियत की रोशनी में ही इसे हल किया जाएगा। कोई भी बयान शरीयत को बदल नहीं सकता। उन्होंने साफ कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ व शरीयत में दखलअंदाजी और कॉमन सिविल कोड को मुसलमान किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि हर समाज में बुराइयां होती है। मुस्लिम समाज में फैली कमियों को दूर करने के लिए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड, मस्जिदों के इमाम और मदरसों के जिम्मेदार उलेमा अपने-अपने तरीके से काम कर रहे हैं।
दारुल उलूम अशरफिया के मोहतमिम मौलाना सालिम अशरफ कासमी ने कहा कि पिछले कुछ समय से तीन तलाक को मुद्दा बनाकर इस्लाम को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ में तब्दीली किसी कीमत पर कबूल नहीं है।
आल इंडिया अल कुरान फाउंडेशन के अध्यक्ष मौलाना नदीमुल वाजदी ने कहा कि देश में सरकारों द्वारा बिना तथ्यों के तीन तलाक के मामले को गलत तरीके से पेश कर इस्लाम को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है जो सरासर गलत है।












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