UP में चुनावी सर्वेक्षणों को लेकर कांग्रेस ने साधी चुप्पी, जानिए प्रियंका ने क्यों कही ये बड़ी बात
लखनऊ, 8 मार्च: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे 10 मार्च को घोषित किए जाएंगे। लेकिन इससे पहले विभिन्न एजेंसियों के एग्जिट पोल कांग्रेस की हालत निराशाजनक बताई गई है। कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव और यूपी की प्रभारी प्रियंका ने चुनाव से कई महीने पहले ही कांग्रेस को मजबूत करने में जुट गईं थीं। इतना ही नहीं कांग्रेस ने महिलाओं को 40 फीसदी टिकट भी दिया था। वहीं, एग्जिट पोल के नतीजों पर यूपी की प्रभारी प्रियंका गांधी ने केवल इतना ही कहा कि हमने जितनी मेहनत करनी थी उतनी की है। हम मजबूती से चुनाव लड़े हैं इसलिए परिणामों का इंतजार करेंगे।
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चुनाव में कांग्रेस ने खेला था महिलाओं पर दांव
मंगलवार को लखनऊ में प्रियंका ने महिला दिवस पर महिला मार्च निकाला। उन्होंने कहा कि लखनऊ में 'लड़की हूं लड़ सकती हूं' अभियान हमारी 159 महिला उम्मीदवारों का जश्न मनाने के लिए है। मुझे लगता है कि यह बहुत बड़ी बात है कि वे सभी लड़े और महिला दिवस पर हमें जश्न मनाना चाहिए। दरअसल इस बार चुनाव में कांग्रेस ने महिलाओं का दांव खेला था। कांग्रेस ने दावा किया था कि अगर राज्य में कांग्रेस की सरकार बनती है तो महिलाओं के लिए कई नई योजनाएं लागू की जाएंगी। इसके साथ ही कांग्रेस ने 40 फीसदी महिलाओं को टिकट भी दिया था। महिलाओं के मुद्दे पर प्रियंका गांधी ने अन्य राजनीतिक दलों को घेरा।

प्रदेश में कांग्रेस का कोई बड़ा चेहरा नहीं था
दरअसल, एग्जिट पोल के नतीजों को लेकर कांग्रेस का कहना है कि उसे अभी इंतजार करना चाहिए और अंतिम नतीजे से पहले किसी नतीजे पर नहीं पहुंचना चाहिए। वहीं, कांग्रेस नेताओं का मानना है कि पार्टी इस बार अकेले ही चुनावी मैदान में उतरी थी और महिलाओं पर फोकस किया था। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन किया था। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्रियंका गांधी के अलावा राज्य में कोई दूसरा चेहरा नहीं था।

मिशन 2024 के लिहाज से कांग्रेस करेगी परिणाम का आंकलन
चुनावी सर्वेक्षणों में जहां बीजेपी की सरकार बनती दिख रही है वहीं दूसरी ओर कांग्रेस अपने बुरी स्थिति से उबरती नहीं दिखायी दे रही है। कांग्रेस ने इस बार यूपी की सभी 403 सीटों पर अकेले अपने दम पर चुनाव लड़ा था। कांग्रेस की यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी ने कांग्रेस में नई जान फूंकने की कोशिश की थी। बुंदेलखंड से लेकर पश्चिमी यूपी तक हर जगह उनकी रैलियां और रोड शो आयोजित किए गए। लेकिन अब मतगणना के बाद ही पता चलेगा कि कांग्रेस को कितनी सीटें मिली। चुनावी परिणामों के बाद कांग्रेस की नजर अब लोकसभा चुनाव पर रहेगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस के वोट परसेंटेज में कितना इजाफा होता है।

प्रदेश में कांग्रेस कमजोर हो रही है
राज्य में कांग्रेस पार्टी लगातार कमजोर रही है। पार्टी ने राज्य में 2012 के विधानसभा चुनाव में 28 सीटें जीती थीं। लेकिन 2017 के चुनाव में वह सिर्फ सात सीटें ही जीत पाई थी। जबकि 2017 के चुनाव में कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन किया था। लेकिन इस बार भी वह सपा के खिलाफ चुनाव लड़ रही थीं। जानकारों का कहना है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस सिर्फ एक सीट जीत सकी थी। ये सभी आंकड़े राज्य में कांग्रेस की कमजोर स्थिति बताते हैं।












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