एक नजर: जस्टिस खेहर के खूबसूरत सफरनामे पर...
जस्टिस खेहर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट समेत देश के सभी हाईकोर्ट के न्यायमूर्तियों से अपील की वह लंबित मुकदमों के निस्तारण के लिए काम करें। अवकाश के दिनों में सुनवाई करें। जिससे लंबित मुकदमों का निस्तारण हो
इलाहाबाद। इलाहाबाद हाईकोर्ट के स्थापना दिवस समापन समारोह में उस वक्त भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुस्कुरा उठे जब जस्टिस खेहर ने अपने संबोधन में कहा कि आज वह यहां मन की बात कहने आये हैं। उसके बाद चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जेएस खेहर ने अपनी दिल की बात शुरू की और बचपन से लेकर चीफ जस्टिस तक बनने के सफरनामा सुनाया। आपको बता दें कि पीएम मोदी रेडियो पर 'मन की बात' कार्यक्रम करते हैं।

इस सफरनामे में ट्रर्निंग प्वाइंट का भेद बताते हुये जस्टिस खेहर ने व्यवस्था पर तंज कसा तो बदलाव के लिए अपने सुझाव को बेहद ही दिलचस्प तरीके से बताया। जस्टिस खेहर के भाषण का अधिकांश हिस्सा हिंदी में रहा। जिससे वह अपना संदेश अधिक से अधिक देश की आवाम तक पहुंचाना चाह रहे थे जिसमें वह पूरी तरह सफल हुये। उन्होंने प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुये कहा कि वह चाहते हैं न्यायपालिका में सरकार अपना पूरा सहयोग दे और पूरे देश के न्यायमूर्ति देश के आखिरी व्यक्ति तक न्याय की दरकार को निष्पक्ष व त्वरित से पूरा करें।
छुट्टी में हो सुनवाई
जस्टिस खेहर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट समेत देश के सभी हाईकोर्ट के न्यायमूर्तियों से अपील की वह लंबित मुकदमों के निस्तारण के लिए काम करें। अवकाश के दिनों में सुनवाई करें। जिससे लंबित मुकदमों का निस्तारण होगा। खेहर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में सुबह आठ से 9 बजे तक हम छोटे-छोटे मामलों की सुनवाई कर उन्हें निस्तारित करते हैं। अगर यही क्रम यहां इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी अपनाया जाये तो बदलाव नजर आयेगा।
तकनीक का होगा इस्तेमाल
जस्टिस खेहर ने हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक तकनीक के इस्तेमाल से होने वाले बदलाव पर भी जानकारी दी। उन्होंने समय के साथ बहुत सारी खिचखिच दूर होने पर कई तर्क भी दिया। उन्होंने बताया कि डिजिटल तकनीक के जरिये हर मुकदमे की जानकारी व कोर्ट में बहुत आसान होगी और त्वरित न्याय में मदद मिलेगा।












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